कोरोना: सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स की लागत 5% बढ़ी

Editorial Team4 जून. 2021
फोटो – Photo by Science in HD on Unsplash

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कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए हालात से साल 2021 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स की औसत लागत 5 प्रतिशत बढ़ गई है। जहां पिछले साल इसी अवधि में प्रति मेगावॉट कीमत 4.83लाख डॉलर थी वहीं अब यह बढ़कर 5.05 डॉलर हो गई है।  वेबसाइट मरकॉम के मुताबिक यह वृद्धि कच्चे माल की बढ़ी कीमतों और महंगे हो चुके सोलर मॉड्यूल के कारण हुई है। इसी तरह रूफ टॉप सोलर (छतों पर सौर ऊर्जा पैनल) की कीमत में 3% की बढ़ोतरी हो गई है और इसे लगाने की कीमत 5.25 लाख प्रति मेगावॉट है। 

कोरोना: सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश में गिरावट 

भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने सोलर सेक्टर में निवेश पर चोट की है। साल की पहली तिमाही में यह 30% गिरा है और कुल निवेश 104 करोड़ डॉलर रहा। जबकि साल 2020 की आखिरी तिमाही (अक्टूबर- दिसंबर) में यह 149 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर था।  साफ ऊर्जा क्षेत्र में सलाह देने वाली फर्म ब्रिज टु इंडिया ने दूसरी तिमाही के लिये सौर ऊर्जा क्षमता में बढ़ोतरी का अनुमान 2.3 गीगावॉट से घटाकर 1.3 गीगावॉट कर दिया है। हालांकि पहली तिमाही में ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर में 2.1 गीगावॉट की वृद्धि हुई थी। यह बढ़ोतरी तब हुई जब कोरोना की पहली लहर में कमी के बाद पाबंदियां हटाई गईं थी। 

बोरोसिल के मुनाफे में उछाल, घरेलू उत्पादकों ने कहा मोनोपोली से खत्म हो रहा है बिजनेस 

भारत की अकेली सोलर ग्लास निर्माता कंपनी बोरोसिल रिन्यूएबल्स का सालाना राजस्व में पिछले साल के मुकाबले 22% की बढ़ोतरी हुई और यह 502.3 करोड़ हो गया। कोरोना के बावजूद यह मुनाफा आखिरी तिमाही में बिक्री में बढ़ोतरी के कारण हुआ। जानकार कहते हैं कि चीन के घरेलू बाज़ार में सोलर ग्लास की बढ़ी मांग के कारण पूरी दुनिया में इसकी किल्लत हो गई। दुनिया का 95% वैश्विक सोलर ग्लास चीन को जाता है। बोरोसिल को सोलर ग्लास की इसी बढ़ी मांग का फायदा मिला है। 

दूसरी ओर बाज़ार में एक कंपनी के दबदबे से छोटे उत्पादक और खरीदार परेशान हैं। उनका कहना है कि मलेशिया से आयात होने वाले कांच पर टैक्स और एंडी डम्पिंग ड्यूटी ने उनके लिये बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी है और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिये बराबरी का धरातल नहीं है। 

भारत 2047 तक पैदा कर देगा 295 करोड़ टन सोलर कचरा 

आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर भारत 2030 तक 347.5 गीगा टन के सौर ऊर्जा प्लांट लगाता है तो भारत इलैक्ट्रानिक वेस्ट साइकिल में करीब 295 करोड़ टन के उपकरण स्थापित हो जायेंगे। वैज्ञानिकों के मुताबिक सोलर उपकरण कचरे में 645 लाख करोड़ अमेरिकी डालर की महत्वपूर्ण धातुयें होंगी। इनमें से 70% को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। 

रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों का कहना है कि 645 लाख करोड़ डॉलर में से 44% सोना, 26% एल्युमिनियम और 16% कॉपर(तांबा)  होगा।  

अमेरिका: समुद्र में पवनचक्की फार्म की योजना का खुलासा 

अमेरिकी सरकार पश्चिमी तट पर समुद्र के भीतर (ऑफशोर) विन्ड पावर डेवलपमेंट का काम शुरू कर रही है। इसके तहत ढाई लाख एकड़ में करीब 380 पवन चक्कियां, कैलिफोर्निया तट से कई किलोमीटर भीतर समुद्र में लगेंगी। कैलिफोर्निया राज्य और अमेरिकी सरकार में इस बारे में एक समझौता होगा जिसके तहत राज्य केंद्रीय और उत्तरी तट को पवन चक्कियों के लिये खोलेगा। यह पश्चिमी तट पर अमेरिका का पहला व्यवसायिक ऑफशोर विन्ड फार्म होगा जो करीब 16 लाख घरों को बिजली देगा।

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