आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु आपदाओं से लड़ने के लिए जिस स्तर पर अनुकूलन की तैयारी चाहिए उसके मुकाबले अभी क्षमता काफी कम है। एक्शन प्लान में अनुकूलन क्षमता और लचीलापन बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के जोखिम को कम करने के लिए परिवर्तनकारी दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा गया है।
उत्सर्जन को कम करने और ग्लोबल वॉर्मिंग की रफ्तार को घटाने के बाद लोगों और समुदायों को जलवायु आपदाओं से बचाने की कोशिशों को एडाप्टेशन या अनुकूलन कहा जाता है।
शर्म-अल-शेख वार्ता में अनुकूलन में कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है; आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु आपदाओं से लड़ने के लिये जिस स्तर पर अनुकूलन की तैयारी चाहिए उसके मुकाबले अभी क्षमता काफी कम है।
एक्शन प्लान में अनुकूलन क्षमता और लचीलापन बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के जोखिम को कम करने के लिए परिवर्तनकारी दृष्टिकोण अपनाने के लिये कहा गया है।
विकसित देशों से आग्रह किया गया कि वह क्लाइमेट फाइनेंस और तकनीकी सहायता प्रदान करके विकासशील देशों की अनुकूलन क्षमता बढ़ने में मदद करें ताकि वह अपनी राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाओं को लागू कर सकें।
जलवायु परिवर्तन का सामना करने में विकासशील देशों की मदद के लिए लीस्ट डेवलप्ड कंट्रीज़ फंड और स्पेशल क्लाइमेट चांस फंड की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। दोनों कोषों के लिए किए गए वादों का स्वागत किया गया और विकसित देशों को दोनों कोषों में और योगदान करने के लिए आमंत्रित किया गया।
इसके अलावा नदी घाटियों, जलभृतों और झीलों सहित जल और जल से संबंधित पारितंत्रों की रक्षा, संरक्षण और बहाली के महत्व पर बल दिया गया, और देशों से अनुकूलन प्रयासों में जल का एकीकरण बढ़ाने का आग्रह किया गया।
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