भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले पखवाड़े 11 दिनों में चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार बीते सोमवार को डीजल के दाम में 2.71 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल में 2.61 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई।
हालांकि हालिया बढ़ोतरी के बावजूद इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियां अब भी भारी अंडर-रिकवरी का सामना कर रही हैं।
कई चरणों में कीमतों में कुल 7 रुपए प्रति लीटर से अधिक की बढ़ोतरी की जा चुकी है, लेकिन वित्तीय बाजार के अनुमानों के मुताबिक यह पर्याप्त नहीं है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले नुकसान की पूरी भरपाई करने और कच्चे तेल की लागत तथा खुदरा बिक्री कीमतों के बीच अंतर खत्म करने के लिए सैद्धांतिक रूप से भारत में ईंधन की कीमतों में अभी 28 से 33 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है। यानी हालिया बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों को बीते महीनों के नुकसान की भरपाई के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में दोपहिया वाहनों के लिए 300 रुपए तक पेट्रोल सीमा, अफरा-तफरी रोकने की कोशिश
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के कलेक्टर ने जिले के सभी पेट्रोल पंपों को आदेश जारी कर दोपहिया वाहनों को 300 रुपए से अधिक और चारपहिया वाहनों को 1,000 रुपये से अधिक का पेट्रोल नहीं देने के निर्देश दिए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक ईंधन स्टॉक की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। हालांकि बाद में प्रशासन ने कहा कि चारपहिया वाहनों पर लगी सीमा हटाई जाएगी।
अखबार ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ईंधन की कमी की अफवाहों का जिक्र किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल की घबराहट में खरीदारी (panic buying) देखने को मिली। गुरुवार को राजधानी रायपुर में लंबी कतारें और अव्यवस्था की स्थिति बनी रही, हालांकि रायपुर प्रशासन ने फिलहाल किसी तरह की खरीद सीमा लागू नहीं की है।
द प्रिंट के अनुसार आदेश में कहा गया है कि “मौजूदा स्थिति और उपभोक्ताओं द्वारा अनावश्यक खरीद के कारण जमाखोरी तथा अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए प्रतिबंध लगाए गए हैं। पेट्रोल पंप ड्रम, जरी कैन या बोतलों में पेट्रोल-डीजल नहीं बेचेंगे। निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
आदेश में यह भी कहा गया कि एम्बुलेंस सहित आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को ईंधन आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाए।
एलपीजी संकट के बीच खाना पकाने के लिए कोयला वितरण पर स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर सवाल
पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के युद्ध तथा इसके बाद ईरान और अमेरिका द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से उत्पन्न एलपीजी संकट के बीच बिहार सरकार ने घरेलू खाना पकाने के लिए कोयला वितरित करने का फैसला किया है। मोंगाबे इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बिहार सरकार के इस “असामान्य” नीतिगत फैसले ने इसकी व्यवहारिकता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों ने इस फैसले को स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों से पीछे हटने जैसा बताया है। उनका कहना है कि घरेलू खाना पकाने में कोयले के इस्तेमाल से प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए बिहार सरकार को इसके उपयोग को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी करने चाहिए ताकि प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।
2027 के मध्य तक सामान्य नहीं होगा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल प्रवाह: यूएई की सरकारी कंपनी ADNOC प्रमुख
पश्चिम एशिया का संघर्ष अभी समाप्त भी हो जाए, तब भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में 2027 की पहली या दूसरी तिमाही तक का समय लग सकता है। संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के प्रमुख ने यह बात कही। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने इस जलमार्ग पर व्यावहारिक रूप से नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जो दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
ऊर्जा कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी ने महंगाई को और बढ़ा दिया है तथा वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं को भी गहरा किया है।
बुधवार को अटलांटिक काउंसिल के एक कार्यक्रम में ADNOC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुल्तान अल जाबेर ने कहा, “अगर यह संघर्ष कल भी समाप्त हो जाए, तब भी संघर्ष-पूर्व तेल प्रवाह के 80 प्रतिशत स्तर तक लौटने में कम से कम चार महीने लगेंगे, जबकि पूरी तरह सामान्य आपूर्ति 2027 की पहली या दूसरी तिमाही से पहले संभव नहीं होगी।”
रॉयटर्स के मुताबिक ईरान चेकपोस्ट, जांच-पड़ताल और कुछ मामलों में शुल्क लगाकर जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमले शुरू होने के बाद तेहरान ने इस जलमार्ग में जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था, जिससे वास्तविक रूप से नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई।
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