आईईए प्रमुख: मौजूदा तेल और गैस संकट 1973, 1979, 2022 के कुल संकट से भी बदतर

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के फातिह बिरोल ने फ्रांस के सबसे पुराने और प्रमुख समाचार पत्र ले फिगारो को बताया कि मौजूदा एनर्जी संकट ‘1973, 1979 और 2022 के कुल संकट’ से भी बदतर है, रॉयटर्स के मुताबिक बिरोल ने कहा: ‘दुनिया ने कभी भी एनर्जी सप्लाई में इतनी बड़ी रुकावट का अनुभव नहीं किया है’। 

द गार्डियन ने भी इस इंटरव्यू को कवर किया और लिखा है कि बिरोल ने कहा कि विकासशील देशों को तेल और गैस की ऊंची कीमतों, खाने की चीजों की ऊंची कीमतों और महंगाई में तेजी से सबसे ज्यादा नुकसान होगा, जबकि यूरोपीय देशों पर भी इसका असर पड़ेगा।

फाइनेंशियल टाइम्स के एनर्जी सोर्स न्यूज़लेटर ने बिरोल के छह अनुमानों की रिपोर्ट दी कि एनर्जी संकट भविष्य को कैसे आकार देगा। आउटलेट के अनुसार, इनमें न्यूक्लियर पावर में तेजी, कोयले के इस्तेमाल में बढ़ोतरी और यूरोप में रिन्यूएबल पावर इंस्टॉलेशन में बढ़ोतरी शामिल है।

कोयला गैसीकरण मिशन: 6 साल बाद भी नहीं शुरू हो सका उत्पादन

भारत का कोयला गैसीकरण मिशन शुरू होने के छह साल बाद भी अपेक्षित प्रगति नहीं दिखा पाया है। 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अभी तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। सरकार ने 2026-27 के बजट में इस मिशन के लिए 3,525 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से कई गुना अधिक है। हालांकि 2025-26 के बजट का अधिकांश हिस्सा खर्च ही नहीं हुआ।

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा संकट बढ़ने के बीच यह मिशन फिर चर्चा में है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना है। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। चीन जहां बड़े पैमाने पर कोयला गैसीकरण कर रहा है, वहीं भारत की प्रगति धीमी रही है। कई परियोजनाएं मंजूरी और क्रियान्वयन में देरी से जूझ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद मिशन को तेज करने की जरूरत है

एलपीजी निर्भरता घटाने के लिए ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करेगा भारत

भारत सरकार ईंधन संकट से बचने के लिए एलपीजी पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार मध्यम और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसके तहत पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार आयात स्रोतों में विविधता भी ला रही है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने 2026 के लिए अमेरिका से करीब 2.2 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी आयात के समझौते किए हैं। यह देश की कुल एलपीजी आयात जरूरत का लगभग 10 प्रतिशत पूरा करेगा।

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