दिल्ली सरकार ने नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 का मसौदा जारी किया है, जिसमें कुछ कैटेगरी के वाहनों की खरीद पर दिए जाने वाले प्रोत्साहनों में बदलाव किया गया है। दोपहिया वाहनों के लिए टेपरिंग, यानी घटती हुई सब्सिडी का प्रावधान है। पहले वर्ष में बैटरी क्षमता के आधार पर अधिकतम 30,000 रुपए तक की सब्सिडी मिलेगी, जो अगले वर्षों में घटेगी।
पुराने बीएस-IV या उससे पुराने पेट्रोल-दोपहिया वाहनों को स्क्रैप कराने पर 10,000 रुपए का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इससे पहले वर्ष में इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत काफी कम हो सकती है।
चारपहिया वाहनों पर सीधे सब्सिडी नहीं दी गई है। हालांकि पुराने पेट्रोल या डीजल कार को स्क्रैप कर नई ईवी खरीदने पर 1 लाख रुपए का इंसेंटिव मिलेगा। यह लाभ सीमित खरीदारों के लिए होगा। ईवी पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट जारी रहेगी। साथ ही, मजबूत हाइब्रिड वाहनों पर 50 प्रतिशत टैक्स छूट का प्रस्ताव भी रखा गया है।
खाड़ी युद्ध के बाद ईंधन की कीमतों में उछाल से यूरोप में EVs में दिलचस्पी बढ़ी
खाड़ी में युद्ध शुरू होने के बाद से पूरे यूरोप में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) में दिलचस्पी बढ़ी है, क्योंकि पेट्रोल की बढ़ती कीमत के मुकाबले प्लग से मिलने वाली सस्ती बिजली फायदेमंद है।
फरवरी में जंग शुरू होने के बाद से UK, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन के ऑनलाइन मार्केटप्लेस ने EVs के बारे में पूछताछ में भारी बढ़ोतरी की सूचना दी है।
रॉयटर्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट संघर्ष ने EVs की ओर लोगों को बढ़ावा दिया है। युद्ध से यूरोप में पुरानी EV की बिक्री भी बढ़ी है। फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा है कि फॉक्सवैगन, BMW और रेनॉल्ट सहित “पश्चिमी कार बनाने वाली कंपनियाँ” उनमें से हैं जो” रेंज-एक्सटेंडेड EVs पर विचार कर रही हैं जिनमें “एक छोटा इंजन होता है जो बैटरी को चार्ज करने के लिए सिर्फ़ जनरेटर का काम करता है”। उधर इस युद्ध के बाद नए ऊर्जा वाहन (NEV) में “रुचि फिर से बढ़ने” के कारण मार्च में चीन से इसके निर्यात में एक साल पहले की तुलना में 140% की वृद्धि हुई।
बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 32,000 करोड़ रुपए की योजना
भारत सरकार घरेलू बैटरी निर्माण बढ़ाने के लिए 3.8 अरब डॉलर (करीब 32,000 करोड़ रुपए) का प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर रही है। इस योजना के तहत बैटरियों के लिए ‘एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स’ (एएलएमएम) लागू की जाएगी, जैसा सोलर सेक्टर में है। इसका उद्देश्य गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आयात, खासकर चीन पर निर्भरता कम करना है।
सरकार ईवी और ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के साथ देश में गीगाफैक्ट्रियां स्थापित करने के लिए वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना चाहती है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सप्लाई चेन मजबूत करेगा और भारत को बैटरी निर्यात का प्रमुख केंद्र बना सकता है।
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