कोयला मंत्रालय ऐसी योजना बना रहा है जिसके मुताबिक जिस कंपनी को कोयला खदान आवंटित की गई है, वह अगर किसी तकनीकी समस्या के कारण खनन शुरू नहीं कर पा रही तो खदान वापस की जा सकती है। पीटीआई के मुताबिक ऐसे में कंपनी एक कमेटी द्वारा जांच के बाद – बिना कोई वित्तीय दंड या मैरिट के आधार पर तय किये गये दंड को चुकाकर – खदान वापस कर सकती है। मंत्रालय के एजेंडा नोट के मुताबिक यह योजना “कोयला उत्पादन बढ़ाने और ईज़ ऑफ बिज़नेस” को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। सरेंडर किये गये कोल ब्लॉक को तुरंत नीलामी के लिये उपलब्ध कराया जायेगा।
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