जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी देना आत्मघाती: यूएन प्रमुख
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सरकारों से जीवाश्म ईंधन के उत्पादन पर दी जाने वाली सब्सिडी समाप्त करने और इस राशि को लोगों तथा पर्यावरण के हित में खर्च करने की अपील की है। 16 अक्टूबर को आर्मेनिया की राजधानी येरेवान में उन्होंने कहा, 'जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी देना आत्महत्या को सब्सिडी देने जैसा है'।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि जीवाश्म ईंधन धरती का तापमान बढ़ा रहे हैं और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने सरकारों से इन आर्थिक सहायता योजनाओं को पूरी तरह समाप्त करने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, प्रकृति के संरक्षण और पुनर्बहाली पर खर्च किए जाने वाले प्रत्येक एक डॉलर के मुकाबले, प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर लगभग 30 डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। खनन, जीवाश्म ईंधन के निष्कर्षण और गहन कृषि जैसी गतिविधियों को मिलने वाली सार्वजनिक सब्सिडी का अनुमान सालाना 2.6 लाख करोड़ डॉलर है।
वर्ष 2022 में देशों ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर सार्वजनिक खर्च घटाने का संकल्प लिया था, लेकिन अब तक प्रगति सीमित रही है। गुटेरेस की यह अपील 19 अक्टूबर से येरेवान में शुरू होने वाले संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (कॉप17) से पहले आई है। सम्मेलन में करीब 200 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इससे पहले जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने चेतावनी दी थी कि दुनिया 2030 तक जैव विविधता संरक्षण के लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर नहीं है।
सितंबर में तेल आयात सामान्य होने के बाद फिर संकट, इस महीने फिर से बंद है हॉर्मुज़
सितंबर में हॉर्मुज़ स्ट्रेट से तेल का ट्रैफिक फिर से शुरू होने के बाद इस महीने खाड़ी में फिर तनाव बढ़ गया फाइनेंशियल टाइम्स ने बताया कि सितंबर में मिडिल ईस्ट में तेल का उत्पादन बढ़ा क्योंकि ज़्यादा टैंकर चले। सऊदी अरब ने पिछले महीने हर दिन 8.4 मिलियन बैरल तेल खरीदा, जो फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने से पहले का सबसे ऊंचा लेवल था। हालांकि, आउटलेट ने कहा कि 'इस महीने तनाव बढ़ने से फिर से हालत बिगड़ने का खतरा है'।
डेली टेलीग्राफ के मुताबिक ईरान ने एक ही दिन में छह कमर्शियल जहाजों पर हमला किया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि ईरान युद्ध दुनिया के 'एनर्जी ऑर्डर' की परीक्षा ले रहा है यानी यह पता चलेगा कि संकट में ईंधन कैसे हो पाती है।
भारत को बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए और कोयले से बिजली की ज़रूरत पड़ सकती है: सीईए चेयरपर्सन
भारत 2035 तक बिजली की मांग को पूरा करने के लिए 105-150 गीगावाट कोयले से चलने वाली बिजली कैपेसिटी बढ़ा सकता है, जो अभी 97 गीगावाट की योजना से काफी ज़्यादा है। यह बात देश की बिजली योजना बनाने वाली सबसे उच्च संस्था सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) के चेयरपर्सन घनश्याम प्रसाद ने भारतीय उद्योग महासंघ (आईसीसी) के बीसवें इंडिया एनर्जी समिट में कही।
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रसाद ने रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स के रुक-रुक कर आने से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए बेसलोड कैपेसिटी को अधिक बनाए रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इस आर्टिकल में बताया गया कि सोलर और विंड पावर जेनरेशन मौसम के हिसाब से ऊपर-नीचे होता रहता है, जबकि एनर्जी स्टोरेज की कम उपलब्धता शाम और रात की मांग को पूरा करने के लिए सरप्लस रिन्यूएबल पावर का इस्तेमाल करने की क्षमता को रोकती है।