दिल्ली में हवा ज़हरीली; अभिभावकों और कार्यकर्ताओं का इंडिया गेट पर प्रदर्शन

Editorial Team16 नव॰. 2025
फोटो: परिधि चौधरी

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दिल्ली में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के खिलाफ 9 नवंबर को अभिभावकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

बिना अनुमति एकत्र होने के कारण कई प्रदर्शनकारियों को बाद में हिरासत में ले लिया गया। हालांकि दिल्ली में प्रदूषण में गिरावट आई है, लेकिन अभी भी वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ बनी हुई है। प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से 2,300 फीसदी अधिक है। जबकि ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 50 अंक उछलकर 418 तक पहुंच गया।

शहरों में रहने वाले भारतीयों के फेफड़ों में पहुँचते हैं हर रोज़ पहुंच रहे कम से कम 190 प्लास्टिक कण

एक शोध में ‘नई वायु प्रदूषक श्रेणी’ — सांस के साथ अंदर जाने वाले माइक्रोप्लास्टिक्स — की पहचान हुई है। ये माइक्रोप्लास्टिक्स इतने छोटे होते हैं कि मानव फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुँच सकते हैं। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, यह पॉलिमर धूल हवा में स्वतंत्र रूप से तैरती नहीं, बल्कि गतिविधियों के कारण हवा में मिलती है।

कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई के भीड़भाड़ वाले बाजारों से वायु कण एकत्र किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई के एक व्यस्त बाजार में सांस लेने वाला व्यक्ति 8 घंटे में लगभग 190 प्लास्टिक कण अंदर ले सकता है। कोलकात में यह आंकड़ा 370 और दिल्ली में 300 पाया गया है।

पंजाब प्रदूषण बोर्ड ने प्लास्टिक कचरा बढ़ाने पर 14 बड़ी कंपनियों को तलब किया

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने हाल ही के एक ऑडिट में राज्य में प्रदूषण बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार पाई गई 14 बड़ी कंपनियों को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया है। बोर्ड ने इन कंपनियों से प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कार्रवाई की मांग की है।

पीपीसीबी अध्यक्ष ने कहा कि कंपनियाँ ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकतीं और उनसे जवाबदेही और ठोस कदमों की उम्मीद की जाती है। “प्लास्टिक वेस्ट ब्रांड ऑडिट 2025” के आधार पर पता चला कि बरामद 11,880 ब्रांडेड प्लास्टिक पैकेजिंग में से 59% प्लास्टिक कचरे – जिसे रीसाइकल नहीं किया जा सकता – के लिए ये 14 ब्रांड ज़िम्मेदार थे।

ग्रीस के नीले समंदर माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण से दूषित

भूमध्य सागर क्षेत्र में बढ़ता ओवरटूरिज़्म और भारी समुद्री यातायात ग्रीस के समुद्रों में प्रदूषण बढ़ा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक वैज्ञानिकों ने समुद्र तल पर माइक्रोप्लास्टिक जांचने के लिए शेलफिश (मसल्स) — जो फ़िल्टर फीडिंग जीव हैं — का उपयोग किया।

वैज्ञानिकों ने पाया कि पूरा भूमध्य सागर माइक्रोप्लास्टिक का हॉटस्पॉट बन चुका है। उन्होंने बताया कि इसकी मात्रा अभी मनुष्यों के लिए हानिकारक नहीं है, लेकिन टीम द्वारा विश्लेषित हर प्रजाति में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद है।

इंग्लैंड और वेल्स में कम-आय वाले इलाकों में सबसे खराब वायु प्रदूषण

एक अध्ययन में पाया गया कि इंग्लैंड और वेल्स के कम-आय वाले इलाकों में वायु प्रदूषण की सबसे गंभीर स्थिति है — जबकि कुल मिलाकर प्रदूषण में गिरावट आई है। विशेषज्ञों ने इसे “पर्यावरणीय अन्याय” बताया। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, इसका सबसे अधिक प्रभाव रंगभेद का सामना करने वाले समुदायों पर पड़ता है, और ऐसे अधिकतर इलाके लंदन और मैनचेस्टर में स्थित हैं।

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