रॉयटर्स के अनुसार, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपीईसी ने 2026 में आपूर्ति और मांग के संतुलन का अनुमान लगाया है, जो पहले के आपूर्ति घाटे के अनुमान के विपरीत है। इस अनुमान के चलते तेल की कीमतें प्रति बैरल 2 डॉलर से अधिक गिर गईं।
अमेरिकी सरकार द्वारा बाज़ार को पुन: खोलने से आर्थिक गतिविधियों और कच्चे तेल की मांग को बढ़ावा मिलने की संभावना है। अमेरिका द्वारा जल्द ही अपना नया आउटलुक जारी करने की संभावना भी है।
तेल स्रोतों में बदलाव के बीच रिलायंस स्पॉट मार्केट में मध्य-पूर्वी क्रूड बेचने की तैयारी में
रिलायंस इंडस्ट्रीज मध्य-पूर्वी क्रूड — जैसे मुरबान और अपर जाकुम — को स्पॉट मार्केट में बेचने की तैयारी कर रही है। ब्लूम्सबर्ग ने बताया कि यह कदम इसलिए खास है क्योंकि कंपनी आमतौर पर इन ग्रेड्स की बड़ी खरीदार रहती है।
रिलायंस पहले ही इराकी बसरा मीडियम क्रूड का एक कार्गो एक ग्रीक खरीदार को बेच चुकी है। पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल खरीदना मुश्किल और जोखिम भरा होने के बाद भारत के रिफाइनर अपनी आपूर्ति में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।
पर्यावरणीय चिंताओं को लेकर राजगढ़ के ग्रामीणों का खनन परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ के राजगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र के दर्जनों गांवों के हजारों आदिवासी एक प्रस्तावित निजी कोयला खनन परियोजना की सार्वजनिक सुनवाई रद्द करने की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना दिया। हसदेव–राजगढ़ वन क्षेत्र, जो खनन प्रदूषण और मानव–हाथी संघर्ष से जूझ रहा है, उद्योग विस्तार और आदिवासी अधिकारों के बीच एक नया विवाद का केंद्र बन गया है।
चीन पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका ने 10 नए क्रिटिकल मिनरल्स को सूची में जोड़ा
अमेरिकी प्रशासन ने स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और विदेशी देशों—विशेष रूप से चीन—पर निर्भरता घटाने के लिए अपनी क्रिटिकल मिनरल्स सूची का विस्तार किया है। रॉयटर्स के मुताबिक सूची में कॉपर और कोयला जैसे खनिज शामिल किए गए हैं। सरकार इनके संबंधित प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहन देगी।
पर्यावरणविदों ने इस कदम की आलोचना की है, यह कहते हुए कि प्रशासन अर्थशास्त्र की अनदेखी कर रहा है, कानून का उल्लंघन कर रहा है, और एजेंसियों को बिना पर्याप्त सामुदायिक सुरक्षा के परियोजनाओं को मंजूरी देने का रास्ता खोल रहा है।
एनटीपीसी ने झारखंड में भारत की पहली CO₂ स्टोरेज वेल की ड्रिलिंग शुरू की, कार्बन कैप्चर प्रयासों की शुरुआत
एनटीपीसी लिमिटेड ने झारखंड के पकरी बरवाडीह कोयला खदान में भारत की पहली कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) भंडारण कुएं की ड्रिलिंग शुरू कर दी है, जिससे देश में कार्बन कैप्चर और स्टोरेज प्रयासों की औपचारिक शुरुआत हो गई है।
लगभग 1,200 मीटर गहराई तक जाने के लिए डिज़ाइन किया गया यह बोरवेल भूवैज्ञानिक और भंडार संबंधी डेटा जुटाने में मदद करेगा, ताकि CO₂ के सुरक्षित और दीर्घकालिक भंडारण को सक्षम बनाया जा सके।
दो साल पहले, हमने अंग्रेजी में एक डिजिटल समाचार पत्र शुरू किया जो पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर रिपोर्ट करता है। लोगों ने हमारे काम की सराहना की और हमें प्रोत्साहित किया। इस प्रोत्साहन ने हमें एक नए समाचार पत्र को शुरू करने के लिए प्रेरित किया है जो हिंदी भाषा पर केंद्रित है। हम अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद नहीं करते हैं, हम अपनी कहानियां हिंदी में लिखते हैं।
कार्बनकॉपी हिंदी में आपका स्वागत है।
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