अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2025 रिपोर्ट जारी की है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा सुरक्षा का संकट अब पूरी दुनिया में फैल चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर बाधित होने से 20 करोड़ से अधिक परिवारों को बिजली आपूर्ति में रुकावट आई। पॉवर लाइनें सबसे अधिक प्रभावित रहीं, जबकि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन ग्रिड डैमेज होने से 85% मामलों में आपूर्ति ठप हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देशों को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोत बढ़ाने होंगे और एक-दूसरे के साथ सहयोग करना होगा, ताकि भविष्य में बढ़ रही अनिश्चितताओं का सामना किया जा सके।
रिपोर्ट में तीन प्रकार की स्थितियों का वर्णन है।
- करेंट पॉलिसीज़ परिदृश्य (सीपीएस) बताता है कि अगर दुनिया सिर्फ मौजूदा नीतियों पर चलेगी तो तेल की मांग लगातार बढ़ती रहेगी, जो 2050 तक 113 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो सकती है।
- स्टेटेड पॉलिसीज़ परिदृश्य (स्टेप्स) के तहत यदि सरकारें अपनी घोषित योजनाओं पर अमल करें तो तेल और कोयले की मांग 2030 तक चरम पर पहुंचकर घटने लगेगी।
- नेट ज़ीरो उत्सर्जन (एनजेडई) परिदृश्य यह दिखाता है कि तेज़ और सख्त कदम उठाकर दुनिया तापमान वृद्धि को नियंत्रित कर सकती है।
रिपोर्ट कहती है कि तीनों ही स्थितियों में आने वाले वर्षों में ऊर्जा की मांग बढ़ेगी — चाहे वह यात्रा के लिए हो, घरों में ठंडक और गर्मी पाने के लिए, या तेजी से बढ़ रही डेटा और एआई सेवाओं के लिए। इन सभी परिस्थितियों में सबसे तेज़ बढ़त नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) की ही होगी, क्योंकि अब यह दुनिया भर में काफी सस्ती और प्रतिस्पर्धी हो चुकी है।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं — खासकर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया — में ऊर्जा की मांग सबसे तेज़ बढ़ रही है। इसके साथ ही, रिपोर्ट महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में बढ़ते जोखिमों की भी ओर संकेत करती है, जो नई ऊर्जा तकनीकों के लिए जरूरी हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर की वजह से विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2025 में डेटा सेंटर में निवेश $580 बिलियन तक पहुंच जाएगा, जो तेल आपूर्ति पर खर्च को पछाड़ देगा।
आईईए का कहना है कि साफ ऊर्जा की दिशा में दुनिया पहले ही तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन अगर सरकारें कदम नहीं बढ़ातीं, तो भविष्य में लागत और नुकसान दोनों और बढ़ सकते हैं।
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