मंकीपॉक्स: डब्ल्यूएचओ ने बजाई ख़तरे की घंटी, भारत में भी अलर्ट

Editorial Team17 अग॰. 2024
मंकीपॉक्स: डब्ल्यूएचओ ने बजाई ख़तरे की घंटी, भारत में भी अलर्ट

स्वीडन और यूरोप के दूसरे हिस्सों के बाद अब पकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में भी एम-पॉक्स (जिसे पहले मंकीपॉक्स कहा जाता था)  के मामले मिले हैं।

भारत सरकार ने सभी हवाईअड्डों के साथ-साथ बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमा पर भूमि बंदरगाहों के अधिकारियों को भी सतर्क रहने के लिए कहा है

सरकारी सूत्रों का कहना है कि हालांकि भारत में अभी एम-पॉक्स का कोई केस नहीं है, और किसी बड़े आउटब्रेक का खतरा बहुत कम है, फिर भी बाहर से आनेवाले यात्रियों के बीच कुछ मामले मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है

बुधवार, 14 अगस्त को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था। साल 2022 और 23 के बीच इसके फैलाव के दौरान भी एम-पॉक्स को पब्लिक हेल्थी इमरजेंसी घोषित किया गया था।  मूल रूप से यह बीमारी अफ्रीकी देशों में फैली थी और कांगो में इसके नये मामले आने और तेज़ी से बढ़ने से पूरे विश्व में अलर्ट है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि 2022 से अब तक कुल  99,000 से अधिक मामले पाये जा चुके हैं और 116 देशों में कम से कम 208 लोगों की मौत हुई है। 

एम-पॉक्स चिकित्सा विज्ञान की भाषा में सेल्फ लिमिटिंग वायरल इंफेक्शन है जो MPVX वायरस से होता है लेकिन लापरवाही की स्थिति में इससे मौत भी हो सकती है। बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द के अलावा त्वचा पर चकत्ते होना इसके लक्षण हैं। यह संक्रमित रोगी के साथ स्पर्श होने और यौनसंबंध बनाने से फैलता है।  बीबीसी हिन्दी में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक डब्लू एच ओ के महानिदेशक टेड्रॉस ए गेब्रीयेसुस ने कहा, “एमपॉक्स के एक क्लेड का उभरना, कांगो गणतंत्र में इसका तेज़ी से फैलना और कई पड़ोसी देशों में इसके मामलों की जानकारी मिलना बहुत चिंताजनक है।”

भारत में 2022 में हुए आउटब्रेक के दौरान इस बीमारी के मरीज पहचाने गए थे। जानकारों ने कहा है कि यूरोप में इसके मामले सामने आने और  वहां से लगातार अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण भारत के लिए यह सतर्क रहने का समय है। 

अगस्त-सितंबर में सामान्य से अधिक मॉनसून का पूर्वानुमान 

मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का पूर्वानुमान है कि अगस्त और सितंबर में ला निना की अनुकूल परिस्थितियों के कारण अधिक सामान्य से अधिक बारिश होगी। इसका एक मतलब भूस्खलन और बाढ़ की अधिक संभावना भी है। मॉनसून भारत की कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की 52 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर है। जलायशों से पेय जल आपूर्ति और बिजलीघरों के लिए पानी हेतु भी बारिश का बड़ा महत्व है। 

मौसम विभाग का कहना है कि दीर्घ अवधि औसत (लॉन्ग पीरियड एवरेज) के हिसाब से 422.8 मिमी का 106 प्रतिशत रहेगा। देश में एक जून से अब तक 453.8 मिमी वर्षा हुई है जबकि सामान्य वर्षा का आंकड़ा 445.8 मिमी है। इस 2 प्रतिशत की वृद्धि के कारण शुष्क जून के बाद हमारे सामने सामान्य से अधिक बारिश वाला जुलाई है। 

अगस्त-सितंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान है। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र को मुताबिक पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों, पूर्वी भारत से सटे लद्दाख, सौराष्ट्र और कच्छ और मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की उम्मीद है।

गर्मियों के हालात मॉनसून के महीनों में भी हो रहे महसूस: शोध 

भारत में गर्मियों का मौसम अधिक लंबा हो रहा है। सितंबर में होने वाले एनवाईसी क्लाइमेट सप्ताह से पहले प्रकाशित एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अधिकांश जिलों में मानसून के महीनों – जून, जुलाई और सितंबर – के दौरान भी अत्यधिक आर्द्र गर्मी का सामना करना पड़ रहा है, जिस आधार पर यह कहा जा सकता है कि 140 करोड़ लोगों के देश में गर्मीकी स्थितियां प्रभावी रूप से बढ़ गई हैं।

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक “मैनेजिंग मॉनसून इन वॉर्मिंग क्लाइमेट” नाम की यह रिपोर्ट, जलवायु मॉडलिंग और इसरो, आईएमडी और मौसम पूर्वानुमान के लिए यूरोपीय केंद्र के डेटा पर आधारित तैयार की गई है और इसके विश्लेषण में चार मौसमों को शामिल किया गया: जनवरी-फरवरी, मार्च-अप्रैल-मई, जून-जुलाई-अगस्त-सितंबर और अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर। रिपोर्ट बताती है कि 84% से अधिक भारतीय जिले अत्यधिक गर्मी की चपेट में हैं, जिनमें से 70% में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी जा रही है।

गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मेघालय और मणिपुर जैसे कुछ प्रमुख राज्य हैं जहां अत्यधिक गर्मी और लगातार अनियमित बारिश दोनों तरह घटनाएं एक साथ देखी जा रही हैं। 

अटलांटिक सागर का तापमान प्रभावित कर रहा अमेरिका में चरम हीटवेव की घटनायें

एक नए अध्ययन में कहा गया है कि अटलांटिक महासागर में समुद्र की सतह का तापमान दक्षिण-पूर्वी अमेरिका में यौगिक आर्द्र गर्मी की चरम सीमा – उच्च तापमान और आर्द्रता की घातक सह-घटना – की आवृत्ति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। पृथ्वी-प्रणाली मॉडल का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने कई कारकों का अध्ययन किया जो संभावित रूप से इन चरम घटनाओं के शुरुआत की भविष्यवाणी करने में मददगार हैं।

उन्होंने पाया कि असामान्य रूप से गर्म समुद्र का तापमान वायुमंडलीय सर्कुलेशन को प्रभावित कर सकता है, जिससे मैक्सिको की खाड़ी से लेकर दक्षिण-पूर्वी अमेरिका तक गर्मी और नमी एक साथ हो सकती है। इससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि “इस अध्ययन के परिणामों का प्रयोग (आर्द्र गर्मी की एक्सट्रीम घटनाओं के बारे में)    प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को विकसित करने में किया जा सकता है।”

राज्य में एंटीबायोटिक्स की बिक्री में ₹ 1,000 करोड़ की गिरावट 

केरल में राज्य सरकार के सख्त नियमों के बाद एंटीबायोटिक्स दवाओं की बिक्री में ₹ 1,000 करोड़ की गिरावट हुई है। वैसे राज्य में हर साल ₹ 15,000 करोड़ की दवायें बिकती हैं जिनमें ₹ 4,500 करोड़ की एंटीबायोटिक्स बिका करती हैं लेकिन सरकार ने बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध प्रयोग को रोकने के लिए सख्त नियम बनाये जिस कारण इनकी बिक्री में गिरावट हुई है। 

यह देखते हुए कि कई संक्रामक वायरस रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबिएल रजिस्टेंस) विकसित कर रहे हैं, केरल के राज्य स्वास्थ्य विभाग ने एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग को रोकने के लिए एक साल पहले हस्तक्षेप किया था। इस प्रयास के तहत, विभाग ने डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स बेचने वाली दवा दुकानों के लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे चिकित्सा संगठनों को भी मरीजों को एंटीबायोटिक दवाएं लिखते समय सावधानी बरतने का निर्देश दिया है। 

सड़क निर्माण और भू-उपयोग में बदलाव से शाकाहारी जीवों की आनुवंशिकता पर प्रभाव  

एक नए अध्ययन में पाया गया है कि मध्य भारत में भूमि उपयोग पैटर्न में बदलाव और सड़कों के विकास से बड़े शाकाहारी गौर और सांभर की आनुवंशिक कनेक्टिविटी बाधित हो रही है। 

अध्ययन में कहा गया है कि गौर और सांभर दोनों पर भूमि उपयोग परिवर्तनों का नकारात्मक प्रभाव दिख रहा है, और इसका प्रभाव गौर आबादी पर अधिक स्पष्ट था। 

मोंगाबे की रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस तरह के अध्ययन से मध्य भारत जैसे महत्वपूर्ण जैव विविधता से समृद्ध इलाकों में कई लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

वायनाड भूस्खलन: जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की तीव्रता 10% बढ़ी

पिछले दिनों केरल के वायनाड जिले में अचानक हुई भारी वर्षा के कारण कई भूस्खलन हुए जिनमें अबतक करीब 231 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। अब एक अध्ययन में सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा की तीव्रता 10% बढ़ गई थी। भारत, स्वीडन, अमेरिका और ब्रिटेन के 24 शोधकर्ताओं की टीम ने कहा कि दो महीने की मानसून वर्षा से अत्यधिक संतृप्त मिट्टी पर एक ही दिन में 140 मिमी से अधिक वर्षा हुई, जो विनाशकारी भूस्खलन और बाढ़ का कारण बनी। 

रेड क्रॉस रेड क्रिसेंट क्लाइमेट सेंटर के क्लाइमेट रिस्क सलाहकार माजा वाह्लबर्ग ने कहा, “जलवायु गर्म होने के साथ और भीषण वर्षा हो सकती है, इसलिए उत्तरी केरल में भूस्खलन के लिए तैयारी करने की तत्काल आवश्यकता है।”

यदि औसत वैश्विक तापमान दो डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है तो वर्षा की तीव्रता में चार प्रतिशत की और वृद्धि हो सकती है। अन्य शोधकर्ताओं ने भी कहा है कि वायनाड भूस्खलन फॉरेस्ट कवर में कमी, संवेदनशील इलाके में खनन और लंबे समय तक बारिश के बाद भारी वर्षा आदि का मिलाजुला असर था।

काबू में आई ग्रीस के एथेंस में जंगल में लगी भयानक आग

ग्रीस ने एथेंस के पास जंगल में भीषण आग पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया है। पिछले कई दिनों से आग ने कहर बरपा रखा था। वर्नावास के पास एक जंगली इलाके में शुरू हुई यह आग तेजी से एथेंस के उत्तरी उपनगरों में फैल गई, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति की मौत हो गई, कई इमारतें नष्ट हो गईं और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

जंगल की आग ने लगभग 10,000 हेक्टेयर (24,710 एकड़) भूमि को नुकसान पहुंचाया और इस क्षेत्र पर काफी प्रभाव डाला है। आग लगने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तापमान और तेज़ हवाओं के पूर्वानुमान के कारण ग्रीस हाई अलर्ट पर है। संभावना है कि इस तरह की आग की घटनाएं और हो सकती हैं।

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