ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी से भारत का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य हो सकता है प्रभावित

Editorial Team1 जुल॰. 2026
ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी से भारत का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य हो सकता है प्रभावित

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन ट्रांसमिशन नेटवर्क की धीमी रफ्तार इसके सामने बड़ी चुनौती बन रही है। एक विश्लेषण के अनुसार, देश में करीब 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तैयार होने के बावजूद बिजली ग्रिड तक नहीं पहुंच पा रही है। मई-दिसंबर 2025 के दौरान लगभग 2.3 टेरावाट-घंटे सौर बिजली का उत्पादन रोकना पड़ा, जबकि 2026 की पहली तिमाही में भी ट्रांसमिशन बाधाओं के कारण बड़ी मात्रा में सौर ऊर्जा व्यर्थ गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि सौर परियोजनाओं के साथ-साथ ट्रांसमिशन लाइनें भी समय पर तैयार करनी होंगी। इसके अलावा कोयला-आधारित बिजलीघरों को अधिक लचीला बनाना, बैटरी भंडारण को बढ़ावा देना और ट्रांसमिशन से जुड़े आंकड़ों में पारदर्शिता लाना भी जरूरी है, ताकि सस्ती और स्वच्छ बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंच सके।

 

सितंबर तक 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार करेगा भारत: प्रह्लाद जोशी

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि भारत चालू तिमाही के अंत तक 300 गीगावाट स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लेगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगी।

जोशी ने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेज़ प्रगति करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। सरकार सौर, पवन, जलविद्युत और हरित हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन से न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी और हरित रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। केंद्र सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा के जरिए आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक प्रतिबद्धताओं को भी पूरा करना है।

 

गोवा तट पर पवन और समुद्री ऊर्जा से बिजली उत्पादन की परियोजना की तैयारी

गोवा के दक्षिणी तट पर एक पायलट परियोजना के तहत पवन और समुद्री ऊर्जा को मिलाकर अधिक भरोसेमंद नवीकरणीय बिजली उत्पादन की तैयारी की जा रही है। सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईओ) के निदेशक प्रो सुनील कुमार सिंह ने बताया कि मानसून में बादलों के कारण सौर ऊर्जा कम मिलती है, लेकिन तेज हवाओं, ऊंची लहरों और समुद्री धाराओं से अधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

वहीं अन्य मौसमों में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ जाता है। इस तरह सभी स्रोत मिलकर सालभर अपेक्षाकृत स्थिर बिजली उपलब्ध करा सकते हैं। परियोजना के तहत समुद्र में एक फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाएगा, जिसे बदलती समुद्री परिस्थितियों के अनुसार लचीला बनाया जाएगा। इसका पहला प्रोटोटाइप एक वर्ष में तैयार होने की उम्मीद है। भविष्य में इसी प्लेटफॉर्म पर समुद्री जल से हरित हाइड्रोजन बनाने की भी योजना है।

 

चीन ने तय किया 2030 तक पवन और सौर ऊर्जा क्षमता 2,800 गीगावाट करने का बड़ा लक्ष्य

चीन ने अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत पवन और सौर ऊर्जा क्षमता को 2,800 गीगावाट से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है

रिपोर्टों के अनुसार, देश अगले पांच वर्षों में प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं और नए ऊर्जा मॉडल पर 20 ट्रिलियन युआन (करीब 2.9 ट्रिलियन डॉलर) से अधिक निवेश करेगा। चीन का राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन (एनईए) ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, बिजली ग्रिड के विस्तार और हरित हाइड्रोजन जैसी परियोजनाओं पर विशेष जोर देगा।

अधिकारियों ने कहा कि ग्रिड निवेश में पिछले पंचवर्षीय योजना काल की तुलना में 30 प्रतिशत वृद्धि की जाएगी। चीन बिजली उत्पादन की प्रति इकाई कार्बन उत्सर्जन में 10 प्रतिशत से अधिक कमी लाने और प्रमुख उद्योगों में 15 करोड़ टन से अधिक कोयला समतुल्य ऊर्जा की बचत करने का भी लक्ष्य रखता है। 

साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा के लिए जीवाश्म ईंधनों का सीमित लेकिन स्थिर उपयोग जारी रहेगा।

Share

LinkedInXFacebook

लेखक के बारे में

Editorial Team

Editorial Team

A team of handpicked and dedicated writers committed to fact check each climate-related statement. They go to the roots and intent of each policy implemented, internationally and at home, to help you understand climate better.
लेखक के और लेख देखें