बिजली नहीं बनाई तो छोड़ना होगा ग्रिड कनेक्शन: सीईआरसी
देश में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ग्रिड क्षमता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने नए नियम जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि जिन कंपनियों ने ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी तो ले ली है, लेकिन बिजली उत्पादन शुरू नहीं किया है, उन्हें या तो यह कनेक्टिविटी छोड़नी होगी या फिर अतिरिक्त बैंक गारंटी जमा करनी होगी।
कंपनियां चाहें तो अपने समूह की किसी ऐसी परियोजना को भी यह कनेक्टिविटी हस्तांतरित कर सकती हैं जो बिजली बना रही है लेकिन उसके पास ग्रिड कनेक्शन नहीं है। सीईआरसी के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच आवंटित कई परियोजनाओं के आगे नहीं बढ़ने से करीब 15.7 गीगावाट ट्रांसमिशन क्षमता बेकार पड़ी है, जिसे अब अन्य परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
भारत ने चार चीनी बिजली उपकरण कंपनियों को सरकारी निविदाओं में दी छूट
केंद्र सरकार ने भारत में विनिर्माण इकाइयां रखने वाली चीनी मूल की चार बिजली उपकरण कंपनियों को महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं की सरकारी निविदाओं में भाग लेने की अनुमति दे दी है। वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार, टीबीईए एनर्जी, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) को यह छूट मिलेगी। बिजली मंत्रालय ने जनवरी में इन कंपनियों के लिए छूट का प्रस्ताव भेजा था।
2020 में भारत-चीन सीमा पर तनाव के बाद चीनी कंपनियों के लिए सरकारी ठेकों में भाग लेने से पहले सुरक्षा और राजनीतिक मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बाद सरकार कुछ क्षेत्रों में इन नियमों में राहत देने पर विचार कर रही है।
भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता एक साल में 22% बढ़कर 297.36 गीगावाट हुई
भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित ऊर्जा क्षमता जून 2026 में बढ़कर 297.36 गीगावाट पहुंच गई, जो एक साल पहले के मुकाबले 22 प्रतिशत अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून 2025 में यह क्षमता 242.78 गीगावाट थी। इस दौरान सौर ऊर्जा क्षमता 116.25 गीगावाट से बढ़कर 162.15 गीगावाट हो गई, जबकि पवन ऊर्जा क्षमता 51.67 गीगावाट से बढ़कर 57.44 गीगावाट पहुंची।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक वर्ष में सौर ऊर्जा और कुल गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो देश के ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अदाणी परियोजना के लिए जमीन देने पर गुजरात के किसानों ने बाजार भाव का चार गुना मुआवजा मांगा
गुजरात के मोरबी जिले के जेटपर गांव सहित कई इलाकों के किसान अदाणी समूह की बिजली ट्रांसमिशन परियोजना के लिए जमीन देने के बदले बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ने केवल सरकारी 'जंत्री दर' के दोगुने मुआवजे का प्रस्ताव दिया है, जबकि यह वास्तविक बाजार कीमत से काफी कम है। उनका आरोप है कि ऊंचे वोल्टेज की बिजली लाइनें और टावर लगने के बाद कृषि भूमि का उपयोग करना लगभग असंभव हो जाएगा। प्रदर्शन कर रहे किसान इस संबंध में लिखित सरकारी प्रस्ताव भी चाहते हैं। यह परियोजना मोरबी के अलावा कच्छ, जामनगर, देवभूमि द्वारका, सुरेंद्रनगर, पाटन और बनासकांठा जिलों के सैकड़ों किसानों को भी प्रभावित करेगी।