अप्रैल-जून के बीच बेकार गई 8.13 टेरावॉट-घंटे सौर ऊर्जा

Editorial Team31 जुल॰. 2026
अप्रैल-जून के बीच बेकार गई 8.13 टेरावॉट-घंटे सौर ऊर्जा

देश में सौर ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उसे पूरी तरह इस्तेमाल करना अभी भी चुनौती बना हुआ है। केंद्र सरकार ने संसद को बताया कि अप्रैल से जून 2026 के बीच बिजली ग्रिड का संतुलन बनाए रखने के लिए 8.13 टेरावॉट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) सौर बिजली कर्टेल करनी पड़ी। यानी सौर संयंत्रों में बिजली बनी, लेकिन उसे ग्रिड में नहीं भेजा गया।

सरकार के अनुसार अप्रैल में 2,417 गीगावॉट-घंटे (जीडब्ल्यूएच), मई में 3,235 जीडब्ल्यूएच और जून में 2,481 जीडब्ल्यूएच सौर बिजली की आपूर्ति रोकी गई। इसी अवधि में देश में बिजली की अधिकतम मांग रिकॉर्ड 270 गीगावॉट तक पहुंच गई।

विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण यह है कि सौर ऊर्जा उत्पादन की रफ्तार के मुकाबले ट्रांसमिशन लाइनें और बड़े स्तर पर बिजली भंडारण (स्टोरेज) की व्यवस्था अभी पर्याप्त नहीं है। दिन में धूप के कारण सौर बिजली का उत्पादन बहुत अधिक होता है, लेकिन उस समय उसकी पूरी खपत नहीं हो पाती।

दूसरी ओर, कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों को भी पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। क्योंकि शाम के समय जब सौर ऊर्जा का उत्पादन घट जाता है, तब बढ़ती मांग पूरी करने के लिए इन्हें तैयार रखना जरूरी होता है। ऐसे में ग्रिड का संतुलन बनाए रखने के लिए दिन में बनने वाली अतिरिक्त सौर बिजली की आपूर्ति सीमित करनी पड़ती है।

यह स्थिति दर्शाती है कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बिजली के भंडारण और ट्रांसमिशन ढांचे को भी तेजी से मजबूत करना होगा, ताकि भविष्य में अधिक से अधिक सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा सके।

 

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2014 के मुकाबले 57 गुना बढ़ी: सरकार

भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता (कुल संयंत्रों की क्षमता ) 2014 से लगभग 57 गुना बढ़कर 162.15 गीगावॉट तक पहुँच गई है, जो देश के क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन में एक बड़ा मील का पत्थर है।

सरकार ने संसद को बताया कि सोलर कैपेसिटी में तेज़ी से बढ़ोतरी कॉम्पिटिटिव बिडिंग मैकेनिज़्म, बढ़ते घरेलू उत्पादन और  निजी निवेश की वजह से हुई है। फैक्ट्रियों, घरों और डिजिटल नेटवर्क से बिजली की बढ़ती डिमांड के बीच सोलर पावर अब भारत के जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करने की योजना का एक ज़रूरी हिस्सा बन गया है। भारत का टारगेट 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल फ्यूल-बेस्ड बिजली जेनरेशन हासिल करना और 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन एमिशन लेवल तक पहुँचना है।

सोलर पावर कैपेसिटी का क्रेडिट बड़े पैमाने पर सोलर पार्क, रूफटॉप, हाइब्रिड रिन्यूएबल और ट्रांसमिशन नेटवर्क में सुधार  को दिया गया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, सोलर कैपेसिटी में लगातार बढ़ोतरी से भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ा है, जिससे हाल के सालों में बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट हुए हैं।

 

2026 में कोयले से आगे निकल सकती है अक्षय ऊर्जा: आईईए

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की नई रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में बिजली की मांग 2026 में 3.6% और 2027 में 3.8% बढ़ने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह उद्योगों का विस्तार, इलेक्ट्रिक वाहन, एयर कंडीशनर, घरेलू उपकरण और डेटा सेंटरों की बढ़ती संख्या है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में पहली बार नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन और जल विद्युत जैसी स्वच्छ ऊर्जा) से बनने वाली बिजली, कोयले से बनने वाली बिजली से अधिक हो सकती है। भारत में 2026 के दौरान बिजली की मांग 7% बढ़ने का अनुमान है।

इस साल की पहली छमाही में देश में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में 25% से अधिक की बढ़ोतरी हुई। हालांकि आईईए ने चेतावनी दी है कि कमजोर मानसून और शाम के समय बढ़ती बिजली मांग के कारण भारत को अभी भी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

सौर उद्योग में कीमतों की होड़ रोकने के लिए चीन ने बनाए नए नियम

चीन ने अपने सौर ऊर्जा उद्योग में लगातार गिरती कीमतों पर रोक लगाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत पॉलीसिलिकॉन, वेफर, सोलर सेल और सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियों के लिए उत्पादन लागत की गणना का एक समान तरीका तय किया गया है। इससे अलग-अलग कंपनियों द्वारा लागत बताने में होने वाले अंतर को कम किया जा सकेगा।

पिछले कुछ समय से चीन में जरूरत से ज्यादा उत्पादन होने के कारण सोलर उत्पादों की कीमतें लगातार गिर रही हैं। इससे कंपनियों का मुनाफा घटा है और कई कंपनियां घाटे में पहुंच गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पहली छमाही के नतीजों का अनुमान जारी करने वाली 26 सूचीबद्ध कंपनियों में केवल चार के ही मुनाफे में रहने की उम्मीद है, जबकि बाकी सभी कंपनियों को भारी नुकसान होने का अनुमान है।

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