भारत ने 2025 में 2.3 टेरावॉट-ऑवर सौर ऊर्जा की कटौती की

भारत ने 2025 में तेजी से बढ़ती सौर क्षमता के बावजूद 2.3 टेरावाट-घंटे (TWh) सौर बिजली की कटौती की। वैश्विक ऊर्जा थिंक टैंक एंबर की रिपोर्ट के अनुसार, दिन के समय सौर उत्पादन बढ़ने और मांग कमजोर रहने से बिजली प्रणाली उस ऊर्जा को समायोजित नहीं कर पाई। यह कटौती लगभग चार लाख घरों की सालाना बिजली खपत के बराबर है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में भारत ने रिकॉर्ड 38 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी और गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता कुल स्थापित क्षमता का 50 प्रतिशत हो गई। लेकिन कोयला संयंत्रों की सीमित फ्लेक्सिबिलिटी, खासकर न्यूनतम तकनीकी लोड की बाध्यता, एक बड़ी अड़चन बनी। इसके कारण स्वच्छ बिजली का उपयोग नहीं हो सका, कार्बन उत्सर्जन में अपेक्षित कमी भी नहीं आई और सिस्टम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के लिए भूमि, ग्रिड से जुड़ी बाधाएं दूर करना आवश्यक: आर्थिक सर्वे

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की रफ्तार बनाए रखने के लिए उच्च-पूंजी लागत, भूमि अधिग्रहण में देरी और ग्रिड से जुड़ी बाधाओं को दूर करना जरूरी है। सर्वे में बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के बड़े पैमाने पर विस्तार पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया कि उद्योगों की प्रतिस्पर्धा के लिए ऊर्जा लागत उतनी ही अहम है जितनी पूंजी लागत। नवंबर 2025 तक देश की स्थापित बिजली क्षमता बढ़कर 509.74 गीगावाट हो गई, जो सालाना 11.6 प्रतिशत की वृद्धि है। सर्वे में इंडिया एनर्जी स्टैक को एक अहम डिजिटल सुधार बताया गया है, जिससे उपभोक्ता बिजली बाजार में सीधे भाग ले सकेंगे।

सर्वे के अनुसार, डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है और पहली बार उन्होंने मुनाफा दर्ज किया। नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गई है, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला अभी भी अहम बना रहेगा।

भारत 100 गीगावाट पंप्ड स्टोरेज विकसित करेगा

भारत 2047 तक 100 गीगावाट की हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज क्षमता विकसित करने की योजना बना रहा है ताकि तेजी से बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा को स्थिर किया जा सके। डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 5–6 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि पंप्ड स्टोरेज पीक डिमांड को संभालने और ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसे भारत के नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में एक जरूरी कदम माना जा रहा है। योजना के तहत बड़े निवेश और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की भी उम्मीद जताई गई है।

अब हर साल स्वच्छ ऊर्जा टेंडर का लक्ष्य तय नहीं करेगा भारत

भारत सरकार स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए हर साल टेंडर लक्ष्य तय करना बंद करेगीरॉयटर्स के अनुसार, पिछले साल लक्ष्य चूकने और बिना खरीदार वाली परियोजनाओं का बड़ा बैकलॉग बनने के बाद यह फैसला लिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डेवलपर्स के पास करीब 43 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता के अधिकार हैं, लेकिन अभी खरीदार नहीं मिले हैं। राज्य बिजली कंपनियां ट्रांसमिशन में देरी और कीमतें घटने की उम्मीद में खरीद टाल रही हैं। हालांकि सरकार को भरोसा है कि बैकलॉग की काफी बिजली आगे बिक सकेगी।

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