नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भारत तीसरे स्थान पर
भारत स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में चीन और अमेरिका के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है। देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 250.52 गीगावाट हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 55.3 गीगावाट की नई गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़ी गई।
जुलाई 2025 में पहली बार कुल बिजली मांग को पूरा करने में 51.5 प्रतिशत हिस्सेदारी नवीकरणीय ऊर्जा की रही। वहीं, कुल बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 29.2 प्रतिशत रही। भारत ने 2025 में ही 50 प्रतिशत स्थापित क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर ली, जो कि 2030 का लक्ष्य था।
सरकार 2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य हासिल करने पर काम कर रही है।
2026 में दूसरा सबसे बड़ा सोलर बाजार बनेगा भारत
भारत 2026 में वार्षिक इंस्टॉलेशन के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने की ओर बढ़ रहा है। नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन के अनुसार, देश ने 14 महीनों में 50 गीगावाट सौर क्षमता जोड़कर 150 गीगावाट का आंकड़ा छू लिया है। पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में 11 साल लगे थे, जबकि 100 गीगावाट क्षमता तीन साल में हासिल हुई। मौजूदा गति से भारत हर साल करीब 50 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ रहा है।
इस रफ्तार से 2030 तक 300 गीगावाट सौर क्षमता हासिल कर 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य पूरा करने की संभावना है।
सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज से भारत को मिल सकती है 90% बिजली: रिपोर्ट
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सौर ऊर्जा और सस्ती बैटरी स्टोरेज के जरिए भारत अपनी 90 प्रतिशत बिजली की जरूरत कम लागत में पूरी कर सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि यह मौजूदा बिजली दरों से भी सस्ता हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत अपनी अधिकांश बिजली जरूरत सोलर और बैटरी से पूरी कर सकता था। इसकी औसत लागत करीब 5.06 रुपए प्रति यूनिट आंकी गई है। यह मॉडल दिन और रात दोनों समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां धूप ज्यादा होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।
कल्पक्कम परमाणु रिएक्टर ने हासिल की क्रिटिकलिटी
तमिलनाडु के कल्पक्कम में भारत के 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने सफलतापूर्वक क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है। इसके साथ ही देश ने अपनी तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा योजना के दूसरे चरण में प्रवेश किया है। इस रिएक्टर में परमाणु विखंडन की नियंत्रित श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हुई है, जिससे ऊर्जा उत्पादन संभव होगा। यह तकनीक जितना ईंधन खर्च करती है, उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करती है।
रिएक्टर के 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक व्यावसायिक संचालन में आने की उम्मीद है। यह उपलब्धि भारत के थोरियम भंडार के उपयोग और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।