इसरो के फार्म फायर एस्टीमेशन प्रोटोकॉल अपनायें दिल्ली के पड़ोसी राज्य: वायु गुणवत्ता पैनल

Editorial Team27 अग॰. 2021
ताड़ की खेती: पाम ऑइल आर्थिक मुनाफे के हिसाब से तो अच्छा है लेकिन जैव विविधता और पर्यावरण के लिये इसकी खेती एक चुनौती है। फोटो – Pixabay

ताड़ की खेती: पाम ऑइल आर्थिक मुनाफे के हिसाब से तो अच्छा है लेकिन जैव विविधता और पर्यावरण के लिये इसकी खेती एक चुनौती है। फोटो – Pixabay


हवा में प्रदूषण के प्रबंधन के लिये बने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली और उसके पड़ोसी राज्यों को कहा है कि पराली जलाने की घटनाओं के आकलन के लिए वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी (इसरो)  द्वारा विकसित एक प्रोटोकॉल अपनायें। यह प्रोटोकॉल उपग्रह डेटा का उपयोग करके इन घटनाओं का अनुमान लगाता है।

आयोग ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को एक समयबद्ध और व्यापक कार्य योजना विकसित करने के लिए भी कहा। आयोग ने कहा है कि खेतों में धान और गेहूं जैसी फसलों की खुंटी जलाने की घटनाओं की जिम्मेदारी, निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए योजना हितधारक एजेंसियों के साथ परामर्श से चलाई जाये। 

यह प्रोटोकॉल राज्य रिमोट सेंसिंग सेंटर और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के परामर्श से तैयार किया गया है। आयोग के मुताबिक यह प्रोटोकॉल सिर्फ पंजाब और हरियाणा तक सीमित नहीं रहना चाहिये। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली राज्यों में भी प्रोटोकॉल को समान रूप से अपनाया जाना चाहिए। पैनल ने इन राज्यों को 30 अगस्त तक प्रोटोकॉल अपनाने पर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में  15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच धान की कटाई होती है । कटाई के बाद बचे फसल अवशेषों को जल्दी से हटाने के लिए किसान अपने खेतों में आग लगा देते हैं। यह दिल्ली में प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि के मुख्य कारणों में से एक है।

वायु प्रदूषण: अगले साल तक आ सकते हैं नये मानक 

करीब 12 साल बाद अब देश में नये नेशनल एयर एंबिएंट क्वॉलिटी स्टैंडर्ड (NAAQS) आ सकते हैं। वायु प्रदूषण नापने के नये मानकों में पीएम 2.5 से छोटे प्रदूषकों (अल्ट्रा फाइन पार्टिकल) को शामिल किया केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर और नेशनल फिजिकल लेबोरेट्री, नीरी और एम्स के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को मानकों को अपडेट करने का काम दिया है। जायेगा। संभावना है कि अगले साल 2022 में यह लागू हो जायेंगे।

मानकों से पता चलता है कि किसी जगह वायु प्रदूषण का स्तर क्या है और वह कितना हानिकारक है। इन्हें 1982 में अपनाया गया था और उसके बाद 1994 और फिर 2009 में अपडेट किया गया। अभी प्रदूषकों में पीएम 2.5 और पीएम 10 के अलावा सल्फर डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइ ऑक्साइड, अमोनिया, कार्बन मोनो ऑक्साइड,  बैंजीन और  ओज़ोन को गिना जाता है। 

दिल्ली: वायु प्रदूषण पर काबू के लिये पहला देश का स्मॉग टावर 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को राजधानी के कनॉट प्लेस इलाके में 20 मीटर ऊंचे स्मॉग टावर का उद्घाटन किया। यह स्मॉग टावर दिल्ली सरकार ने 20 करोड़  रुपये की लागत से बनवाया है। केजरीवाल का कहना है कि विशेषज्ञ इस टावर से वायु प्रदूषण पर नियंत्रण का अध्ययन करेंगे और उसके नतीजों के आधार पर आगे और ऐसे प्रोजेक्ट लगाये जायेंगे। 

इससे अलावा दिल्ली से सटे यूपी के आनन्द विहार इलाके में केंद्र सरकार ने एक स्मॉग टावर लगाया गया है। माना जा रहा है यह इस महीने के अंत तक काम शुरू कर देगा। इनमें से हर टावर में कुल 1200 फिल्टर लगे हैं जिन्हें अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा के विशेषज्ञों ने विकसित किया है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि ये स्मॉग टावर अपने आसपास एक किलोमीटर के दायरे में पीएम 2.5 के स्तर को करीब 70% कम कर देंगे।   

वैसे वायु प्रदूषण पर काम कर रहे जानकार ऐसी कोशिशों को ‘शो-पीस’ खड़ा करने से अधिक कुछ नहीं मानते। उनका मानना है कि यह कोशिश अव्यवहारिक और बेअसर होगी। हवा को साफ करने के लिये प्रदूषण को उसके सोर्स पर रोकना होगा।

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