मॉन्ट्रियल सम्मेलन: जैव विविधता क्यों है मीडिया की बहस से गायब
जलवायु परिवर्तन पर कम ही सही लेकिन हर साल सालाना सम्मेलन के वक्त कुछ चर्चा
जलवायु परिवर्तन पर कम ही सही लेकिन हर साल सालाना सम्मेलन के वक्त कुछ चर्चा
भले ही यह निकट अवधि में कार्बन उत्सर्जन कम करने के एक कामचलाऊ उपाय के
कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद आखिर शर्म-अल-शेख में वह एकमात्र बड़ी कामयाबी हो पाई जिसकी
शर्म-अल-शेख में सम्पन्न हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप-27) में आखिरकार जलवायु आपदाओं से लड़ने के
आईईए की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोयले की जगह साफ ऊर्जा विकल्पों के
मिस्र में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत ने दीर्घकाल के लिये कम कार्बन
मालदीव, मॉरीशस, फिजी, बारबाडोस सहित 39 छोटे द्वीप देशों से बने लघु द्वीपीय देशों के
रिपोर्ट ने कई सिफारिशों के ज़रिए शहरों, क्षेत्रों, कंपनियों और फाइनेंसरों को बताया है कि
आज भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से जुड़ी है बिजली की मांग। भारत को
भले ही सम्मेलन में लॉस एंड डैमेज को फाइनेंस एजेंडा में शामिल कर लिया गया