दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री 2025 में पहली बार 2 करोड़ के पार पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीसीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल बिकने वाली हर चार नई कारों में एक इलेक्ट्रिक थी। बैटरी से चलने वाली कारों की हिस्सेदारी 2024 में 14 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई।
चीन सबसे बड़ा बाजार बना रहा, जहां नई कारों की बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के अनुसार भारत में भी इलेक्ट्रिक कारों के बड़े मॉडल, जैसे एसयूवी और एमपीवी, तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
भारत में उपलब्ध ईवी मॉडलों की संख्या 33 से बढ़कर 47 हो गई। वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे उभरते बाजारों में भी ईवी की मांग तेजी से बढ़ी।
भारत में 2032 तक 10 गुना बढ़ सकती है ईवी बैटरी की मांग: रिपोर्ट
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों की मांग 2032 तक 10 गुना बढ़कर 200 गीगावॉट-ऑवर (GWh) पहुंच सकती है। इंडियन एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) के अनुसार, 2025 में यह मांग करीब 20 GWh रही।
आईईएसए और कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब सिर्फ ईवी निर्माण ही नहीं, बल्कि बैटरी, मोटर और अन्य पुर्जों के घरेलू उत्पादन पर भी जोर दे रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में भारत में 25 लाख से ज्यादा ईवी बिक चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक कारों और छोटे व्यावसायिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।
चीन ने पहली बार पारंपरिक कारों से ज्यादा निर्यात किए इलेक्ट्रिक वाहन
चीन ने अप्रैल 2026 में पहली बार पेट्रोल-डीजल कारों से ज्यादा इलेक्ट्रिक और नए ऊर्जा वाहन (न्यू एनर्जी व्हीकल्स) विदेश भेजे। एनईवी में बैटरी कारें, प्लग-इन हाइब्रिड और कुछ हाइड्रोजन वाहन शामिल होते हैं। चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन के अनुसार, अप्रैल में चीन के कुल वाहन निर्यात में एनईवी की हिस्सेदारी 52.7 प्रतिशत रही। इनकी संख्या दोगुनी होकर 4.06 लाख पहुंच गई। हालांकि चीन के घरेलू बाजार में कारों की बिक्री 21.5 प्रतिशत गिरकर 14 लाख रह गई, जो 2022 के बाद सबसे कम है।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा पुरानी कार बदलने पर मिलने वाली सब्सिडी घटाने और ईवी पर खरीद कर दोबारा लगाने से मांग कमजोर हुई। इस बीच अमेरिकी वाहन उद्योग ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चीन को अमेरिकी बाजार में और पहुंच न देने की मांग की है।
होंडा को 70 सालों में पहली बार हुआ घाटा, ईवी योजनाओं पर असर
जापान की कार कंपनी होंडा को 70 साल में पहली बार सालाना घाटा हुआ है। कंपनी को मार्च 2026 तक के वित्तीय वर्ष में 423 अरब येन (करीब 2.7 अरब डॉलर) का नुकसान हुआ। होंडा ने माना कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग उसकी उम्मीद से कम रही। अमेरिका में ईवी खरीदने पर मिलने वाली टैक्स छूट हटने और आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ने से भी कंपनी को नुकसान हुआ।
अब होंडा अपनी कुछ ईवी योजनाएं घटाएगी और सस्ते पुर्जे चीन से खरीदेगी। कंपनी ने 2030 तक नई कारों में ईवी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य भी वापस ले लिया है। होंडा अब मोटरसाइकिल, हाइब्रिड कारों और वित्तीय सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देगी। भारत, जापान और उत्तर अमेरिका को कंपनी ने भविष्य के अहम बाजार बताया है।
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