तेल और गैस कंपनी सऊदी अरामको ने चेतावनी दी है कि दुनिया में पेट्रोल और जेट ईंधन का भंडार ‘खतरनाक रूप से कम’ स्तर तक पहुंच सकता है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीन नासिर ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़) में पैदा हुए संकट से वैश्विक ईंधन आपूर्ति तेजी से प्रभावित हो रही है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जलडमरूमध्य के बंद रहने से वैश्विक तेल बाजार हर सप्ताह करीब 10 करोड़ बैरल तेल खो रहा है। वहीं, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने चेतावनी दी है कि यदि यह समुद्री मार्ग कई सप्ताह तक बंद रहा, तो तेल बाजार 2027 तक सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाएगा।
भारत में 3 रुपए प्रति लीटर बढ़े पेट्रोल-डीज़ल के दाम
कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। चार साल से ज्यादा समय बाद ईंधन कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में पेट्रोल अब 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
वहीं सीएनजी की कीमत भी 2 रुपए प्रति किलो बढ़ाई गई है। सरकार का कहना है कि तेल कंपनियां लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं और यह ‘सीमित’ बढ़ोतरी है। विशेषज्ञों के अनुसार महंगे ईंधन से परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई पर असर पड़ने की आशंका है।
इससे पहले फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट में बताया कि वैश्विक तेल बाजार अगले चार सप्ताह में बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है। तेल व्यापारियों और विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन का भंडार तेजी से घट रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मई के अंत तक ईंधन भंडार बेहद कम स्तर पर पहुंच सकते हैं, जिसके बाद कीमतों में तेज बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियों का कहना है कि जलमार्ग बंद रहने के हर दिन दुनिया अपने वाणिज्यिक भंडार, रणनीतिक रिजर्व और जहाजों में जमा तेल का इस्तेमाल करने को मजबूर हो रही है।
ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में पेट्रोल 52% महंगा
खाड़ी युद्ध से उपजे संकट का असर अमेरिका में भी दिखने लगा है। ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में 52 प्रतिशत महंगा हो चुका है। इसका मुख्य कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास फंसे तेल टैंकर बताए जा रहे हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। ईरान के कारण इस जलमार्ग पर असर पड़ने से कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर कम आय वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ रहा है।
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