मेरकॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2035-36 तक 900 गीगावॉट नवीकरणीय क्षमता को ग्रिड से जोड़ना प्रस्तावित है। इसके लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। करीब 1,37,500 सर्किट किलोमीटर नई लाइनें बिछाई जाएंगी। साथ ही सबस्टेशन क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।
इस परियोजना पर करीब 7.93 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। योजना का उद्देश्य बिजली आपूर्ति में रुकावट को कम करना है। इससे सौर और पवन ऊर्जा को बेहतर तरीके से ग्रिड में जोड़ा जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे हरित ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
2033 तक भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता होगी 346 गीगावॉट-ऑवर: रिपोर्ट
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऊर्जा भंडारण क्षमता में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो 2033 तक करीब 346 गीगावॉट-ऑवर (जीडब्ल्यूएच) तक पहुंच सकती है। अभी यह एक जीडब्ल्यूएच से भी कम है। यह जानकारी एसईएसआई 2026 सम्मेलन में दी गई। इस सम्मेलन में कई देशों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
रिपोर्ट में बताया गया कि कई बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईईएस) परियोजनाएं निर्माण की प्रक्रिया में हैं। कुल 92 जीडब्ल्यूएच क्षमता की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। सरकार भी इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। बिजली की बढ़ती मांग को संतुलित करने के लिए भंडारण जरूरी माना जा रहा है। इससे बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनेगी।
पीएलआई योजना: सौर उपकरण निर्माताओं को नहीं हुआ भुगतान
सरकार ने संसद में बताया कि सौर उपकरण बनाने वाली कंपनियों को अभी तक प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के तहत प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। उच्च-क्षमता सोलर पीवी मॉड्यूल निर्माण हेतु पीएलआई योजना के लिए 24,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इस योजना का उद्देश्य देश में सौर उपकरण निर्माण बढ़ाना है। सरकार ने बताया कि भुगतान एक साल बाद किया जाता है और यह अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। इसलिए अब तक कोई राशि जारी नहीं की गई है। इस योजना के तहत कई परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। करीब 30 गीगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता, 10.5 गीगावाट सौर सेल क्षमता और 2 गीगावाट इंगट-वेफर क्षमता स्थापित की गई है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भुगतान शुरू होगा।
ट्रांसमिशन के अभाव में बेकार जा सकती है 37 गीगावाट सौर क्षमता: क्राइसिल
भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आ रही है। रेटिंग एजेंसी क्राइसिल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026–27 तक 35-37 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पर ‘ग्रिड कर्टेलमेंट’ का खतरा है, यानि उत्पादन के बावजूद ट्रांसमिशन के अभाव में इस क्षमता का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। यह समस्या खासतौर पर दिन के समय ज्यादा होती है, जब सौर ऊर्जा का उत्पादन अपने चरम पर होता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थिति का मुख्य कारण ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का धीमा विकास है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन परियोजनाओं के पास स्थायी ट्रांसमिशन कनेक्शन नहीं है और जो ‘टेम्पररी जनरल नेटवर्क एक्सेस’ (टीजीएनए) के जरिए ग्रिड से जुड़ी हैं, वे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारत में कुल कर्टेलमेंट का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा ऐसे ही प्रोजेक्ट्स से जुड़ा था।
नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच इन परियोजनाओं की लगभग 39 प्रतिशत क्षमता तक बिजली को उपयोग में नहीं लाया जा सका। वहीं, 13–14 GW क्षमता वाले कुछ प्रोजेक्ट्स में कर्टेलमेंट 50 प्रतिशत तक पहुंच गया, यानी आधी बिजली तक बेकार चली गई। राजस्थान और गुजरात, जो देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
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