प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत को आयातित ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए। केरल में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार भारत सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने जैसे कई कदम पहले ही उठा चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और देश धीरे-धीरे ऊर्जा के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।
अमेरिकी जांच के दायरे में भारतीय सोलर मॉड्यूल
अमेरिका ने भारत सहित कुछ देशों के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत जांच शुरू की है। इस जांच का उद्देश्य यह देखना है कि क्या इन देशों में उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन हो रहा है, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकता है। जांच में सोलर मॉड्यूल, बैटरी, ऊर्जा उपकरण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। अमेरिकी एजेंसी का कहना है कि यदि किसी देश में उत्पादन घरेलू मांग से अधिक होता है, तो कंपनियां ज्यादा निर्यात करती हैं। इससे वैश्विक कीमतें गिर सकती हैं और अन्य देशों के उद्योगों को नुकसान हो सकता है। इस जांच के बाद टैरिफ या अन्य व्यापार प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
चीन की नई पांच वर्षीय योजना में सौर ऊर्जा की भूमिका सीमित
चीन की आगामी 15वीं पांच वर्षीय योजना के मसौदे में सौर ऊर्जा का अपेक्षाकृत कम उल्लेख किया गया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार इस योजना में 2030 तक नई सौर क्षमता के लिए कोई स्पष्ट लक्ष्य तय नहीं किया गया है।
इसके बजाय चीन ने अपतटीय पवन ऊर्जा (ऑफशोर विंड) और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं पर अधिक ध्यान दिया है। योजना में समुद्र में लगने वाली पवन ऊर्जा क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 100 गीगावॉट पंप्ड-स्टोरेज जलविद्युत क्षमता जोड़ने की भी योजना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा को कम महत्व देनेका मतलब इसे छोड़ना नहीं है, बल्कि ऊर्जा परिवर्तन की रणनीति में बदलाव का संकेत हो सकता है।
सौर मिनी-ग्रिड की सफलता बिजली आपूर्ति पर निर्भर: अध्ययन
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि सौर मिनी-ग्रिड परियोजनाओं की सफलता बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और लंबे समय तक अच्छे प्रबंधन पर निर्भर करती है। सौर मिनी-ग्रिड छोटे बिजली नेटवर्क होते हैं जो दूरदराज क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराते हैं।
कोलंबिया के द्वीप समुदायों पर किए गए अध्ययन में देखा गया कि जब बिजली की आपूर्ति भरोसेमंद नहीं रही, तो लोगों ने डीजल जनरेटर का इस्तेमाल शुरू कर दिया। इससे लागत बढ़ी और असमानता भी बढ़ी।
शोधकर्ताओं ने कहा कि केवल बिजली पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। ऐसी परियोजनाओं के लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था, लंबे समय तक प्रशासनिक प्रबंधन और सामाजिक ढांचे में निवेश भी जरूरी है।
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