सुप्रीम कोर्ट ने बंद की प्रदूषित नदियों पर सुनवाई, एनजीटी को निगरानी का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में प्रदूषित नदियों की सफाई पर शुरू की गई स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) कार्यवाही बंद कर दी है। अदालत ने नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल  (एनजीटी) की प्रधान पीठ को मामले पर दोबारा संज्ञान लेकर नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पानी और प्रदूषण-मुक्त वातावरण में जीना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है।

अदालत ने माना कि नदियों में प्रदूषण पर पहले से एनजीटी सुनवाई कर रहा था, इसलिए समानांतर कार्यवाही उचित नहीं थी। जल अधिनियम के तहत केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की जिम्मेदारी है कि बिना ट्रीटमेंट के सीवेज नदियों में न छोड़ा जाए। मामला यमुना में बढ़ते प्रदूषण से जुड़ा था, जिसे बाद में सभी प्रमुख नदियों तक बढ़ाया गया था।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित: सर्वे 

दिल्ली-एनसीआर में 6 से 15 वर्ष के 1,257 बच्चों पर किए गए एक नए सर्वे में वायु प्रदूषण के गंभीर असर सामने आए हैं। ‘चिल्ड्रन अंडर सीज’ नामक यह अध्ययन दिल्ली की संस्था चिंतन ने जारी किया। सर्वे दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के अधिक प्रदूषण वाले महीनों में किया गया।

करीब 70% बच्चों ने खराब हवा के कारण तनाव और चिंता महसूस की। 77% ने कहा कि प्रदूषण से डर, चिड़चिड़ापन और घबराहट होती है। 86% बच्चों का मानना है कि प्रदूषित हवा से स्वास्थ्य बिगड़ता है। वहीं 44% बच्चों को सांस, खांसी या सिरदर्द जैसी समस्याओं के लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ा। 55% बच्चे बीमारी के कारण स्कूल नहीं जा सके। कई बच्चों ने आंखों में जलन और थकान की शिकायत भी की।

दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों के लिए कड़े किए गए प्रदूषण मानक

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में स्थित उद्योगों के लिए पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन की सीमा घटाकर 50 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर करने का प्रस्ताव दिया है। पहले यह सीमा 80 मिलीग्राम थी, जो जून 2022 में तय की गई थी। यह फैसला केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आईआईटी कानपुर के अध्ययन की सिफारिशों पर आधारित है। तकनीकी समिति ने माना कि 50 मिलीग्राम की सीमा तकनीकी रूप से संभव और पर्यावरण के लिए जरूरी है।

यह नियम 17 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों और अन्य बड़े व मध्यम उद्योगों पर लागू होगा। बड़े और मध्यम उद्योगों को 1 अगस्त से, जबकि अन्य को 1 अक्टूबर से इसका पालन करना होगा। राज्यों को सख्ती से अमल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुंबई में 1,000 से अधिक निर्माण स्थलों पर काम रोका गया

मुंबई में वायु प्रदूषण रोकने के लिए राज्य सरकार और नगर निकाय ने सख्त कार्रवाई की है। पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने पर 1,000 से अधिक निर्माण स्थलों को काम बंद करने का नोटिस दिया गया है। यह जानकारी राज्य की मंत्री पंकजा मुंडे ने विधानसभा में दी। अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 1,981 कारण बताओ नोटिस और 1,047 काम रोकने के आदेश जारी किए गए। 2,224 सक्रिय स्थलों में से 1,952 ने कम लागत वाले वायु गुणवत्ता सेंसर लगाए हैं। 16 जनवरी को 678 परियोजनाओं को सेंसर न लगाने पर रोका गया।

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