प्रदूषण की सबसे अधिक मार पड़ती है ग़रीबों पर

Editorial Team29 जुल॰. 2021
गरीबों पर मार: वायु प्रदूषण से न केवल बीमारियां बढ़ रही हैं बल्कि गरीबों पर इसकी सर्वाधिक मार पड़ रही है। फोटो – Pexels

गरीबों पर मार: वायु प्रदूषण से न केवल बीमारियां बढ़ रही हैं बल्कि गरीबों पर इसकी सर्वाधिक मार पड़ रही है। फोटो – Pexels


भारत में किस व्यक्ति पर वायु प्रदूषण की कितनी मार पड़ेगी यह बात आर्थिक स्थिति से भी जुड़ी हुई है। देश के सबसे गरीब 10 प्रतिशत को सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों के मुकाबले वायु प्रदूषण से मरने का ख़तरा नौ गुना अधिक होता है। यह बात सोमवार को नेचर सस्टेनिबिलिटी नाम के जर्नल में प्रकाशित हुए शोध में कही गई है। स्टडी में पाया गया कि ऊंची आय वर्ग के लोग आउटडोर प्रदूषण के लिये सबसे अधिक ज़िम्मेदार हैं जो पीएम 2.5 के रूप में मापा जाता है और जिसका स्रोत वाहन और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री है। इकट्ठा किये गये आंकड़ों और फिर सॉफ्टरवेयर के ज़रिये उनके विश्लेषण से पता चला कि जहां सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों में प्रति यूनिट प्रदूषण से 6.3 लोगों की मौत होती है वहीं सबसे ग़रीब में प्रदूषण से जुड़ी इन मौतों का आंकड़ा 54.7 है। 

वायु प्रदूषण से बढ़ रही हैं अ-संक्रामक बीमारियां 

एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स ऑफ इंडिया (एसोचैम) के एक सर्वे में पता चला है कि भारत में असंक्रामक बीमारियां बढ़ने का प्राथमिक कारण वायु प्रदूषण है। व्यायाम न करना और असंतुलित भोजन इसके बाद दो सबसे बड़े कारण हैं। सर्वे में कहा गया कि पूरे देश में असंक्रामक बीमारियों( जैसे उच्च रक्तचाप , दिल की  बीमारियाँ , डायबिटीज आदि)  की दर 116 व्यक्ति प्रति हज़ार है।  उड़ीसा में यह आंकड़ा सबसे अधिक 272 व्यक्ति प्रति हज़ार है जबकि गुजरात में यह सबसे कम 60 व्यक्ति प्रति हज़ार है। सांस संबंधी रोगों के अलावा कैंसर, दिल की बीमारी, रक्तचाप, किडनी संबंधी रोग और  पाचन संबंधी बीमारियां वायु प्रदूषण से जुड़ी हैं। 

थॉट आर्बिट्राज रिसर्च इंस्टिट्यूट (TARI) द्वारा किये गये इस सर्वे में कहा गया है कि 18 साल की उम्र के बाद ये बीमारियां शुरू होती हैं और 35 साल की उम्र के बाद तेजी से बढ़ती हैं। सर्वे बताता है कि 26-59 साल की सबसे अधिक कार्य-सक्रिय उम्र में ये बीमारियां घेरती हैं। 

अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में जंगलों की आग से पूर्वी तट के शहरों में प्रदूषण बढ़ा 

पश्चिमी अमेरिका के जंगलों में 80 आग की घटनाओं से जो धुंआं उठा उस वजह से पूर्वी अमेरिका और कनाडा के कई शहरों, जिनमें फिलेडेल्फिया, वॉशिंगटन डीसी, पिट्सबर्ग, टोरन्टो और न्यूयॉर्क शामिल हैं, वायु प्रदूषण हानिकारक स्तर तक बढ़ गया है। न्यूयॉर्क में वायु प्रदूषण के स्तर दुनिया के सबसे ख़राब शहरों जितने बिगड़ गये और प्रशासन ने अस्थमा और सांस की बीमारी वाले लोगों को कोई अधिक परिश्रम वाला काम न करने की सलाह दी। 

विशेषज्ञों ने उपग्रह की तस्वीरों का अध्ययन कर बताया कि पहले धुंआं कनाडा में घुसा और उसके बाद पूर्वी अमेरिका में प्रविष्ट हो गया और मिनिसोटा जैसे राज्य की हवा बहुत प्रदूषित हो गई। अमेरिका में लगातार दूसरे साल पश्चिम में जंगलों की आग से उठा धुंआं करीब 2000 मील की दूरी तय करके पूर्वी इलाके में पहुंच गया। पश्चिमी हिस्से में सूखे और मानव जनित क्लाइमेट चेंज के कारण ये हालात पैदा हो रहे हैं। 

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