Vol 1, May 2026 | भारत में रातों को भी तप रहे घर, भीषण गर्मी से नहीं मिल रही राहत

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अप्रैल में दुनिया के 50 सबसे गर्म शहर भारत में: रिपोर्ट

अप्रैल के अंत में दुनिया के 50 सबसे गर्म शहर भारत में स्थित थे। इसे ‘वैश्विक मौसम निगरानी में एक असामान्य स्थिति’ बताया गया है। यह खुलासा कंपनी एक्यूआई की रिपोर्ट में हुआ, जिसे इनसाइड क्लाइमेट न्यूज़ ने प्रकाशित किया। वहीं, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि भारत में केवल 8 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनर (एसी) की सुविधा उपलब्ध है। बाकी लोग छाया, रिफ्लेक्टिव छतों और प्राकृतिक वेंटिलेशन जैसे ‘पैसिव कूलिंग’ उपायों पर निर्भर हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, देश की लगभग तीन-चौथाई  कार्यशक्ति (वर्क फोर्स) कृषि और निर्माण क्षेत्र में लगी हुई है। इसके अलावा, अनौपचारिक और गिग वर्कर्स देश के कुल श्रमबल का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा हैं, जिनमें से अधिकांश के पास रोजगार सुरक्षा और श्रमिक संरक्षण उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी सलाटा इंस्टिट्यूट्स क्लाइमेट अडॉप्टेशन इन साउथ एशिया रिसर्च क्लस्टर के शोधपत्र में दी गई है।

रिपोर्ट के सह-लेखक कार्तिकेय भाटोटिया ने इनसाइड क्लाइमेट न्यूज़ से कहा, ‘गर्मी केवल मौसम का मुद्दा नहीं है। यह स्वास्थ्य, आवास, श्रम, बुनियादी ढांचे और वित्त से भी जुड़ा हुआ है।’

नए अध्ययन में खुलासा: भारतीय घरों में रातभर बनी रहती है खतरनाक गर्मी

नई दिल्ली स्थित संस्था क्लाइमेट ट्रेंड (क्लाइमेट ट्रेंड्स) के एक नए अध्ययन में सामने आया है कि चेन्नई के निम्न और मध्यम आय वर्ग के घरों में रात के समय भी गर्मी खतरनाक स्तर पर बनी रहती है। अध्ययन के अनुसार, इन घरों का तापमान शायद ही कभी 31 डिग्री सेल्सियस से नीचे गया और कई बार सर्दियों में भी सूर्यास्त के घंटों बाद तक 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा।

यह शोध अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच सात महीनों तक 50 घरों में लगाए गए हाई-रिजॉल्यूशन सेंसर के आंकड़ों पर आधारित था। डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन, तेज शहरीकरण और गर्मी को सोखकर रखने वाली निर्माण सामग्री से पैदा हो रहे ‘क्रॉनिक इंडोर हीट’ के खतरे को उजागर किया है।

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक पहलू रात की गर्मी को बताया गया। घरों में तापमान रात 8 से 9 बजे के बीच चरम पर पहुंचकर करीब 34.7 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, कंक्रीट की दीवारें और फर्श दिनभर जमा हुई गर्मी को रात में धीरे-धीरे छोड़ते हैं, जिससे घरों के अंदर तापमान लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है। यहां तक कि सुबह के शुरुआती घंटों में भी तापमान 33.8 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा।

26 मई तक केरल के तट पर पहुंच सकता है मानसून: आईएमडी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून के करीब केरल में दस्तक देता है। मौसम विभाग ने कहा कि इसमें चार दिन आगे-पीछे होने की संभावना है। मानसून केरल पहुंचने के बाद धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में फैलता है और गर्मी से राहत मिलती है।

जून से सितंबर तक मानसून के मौसम के दौरान देश में करीब 70 प्रतिशत सालाना बारिश होती है, जो खेती और जल भंडारण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि आईएमडी ने इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है। विभाग के मुताबिक एल नीनो परिस्थितियों के कारण बारिश प्रभावित हो सकती है।

हंटा वायरस को लेकर बढ़ी चिंता, क्रूज शिप से जुड़े 11 मामले; 3 लोगों की मौत

दुनिया में हंटा वायरस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। हाल ही में अंटार्कटिका यात्रा से लौटे क्रूज शिप MV Hondius से जुड़े 11 संदिग्ध मामलों की पहचान हुई है, जिनमें 3 लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, इनमें से 8 मामलों में एंडीज़ हंटा वायरस की पुष्टि हुई है। संक्रमित लोगों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इजरायल, नीदरलैंड और ब्रिटेन के यात्री शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, हंटा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों (रोडेंट प्रजातियों) के मूत्र, मल और लार के संपर्क से फैलता है। वायरस से संक्रमित धूल या हवा के जरिए भी संक्रमण हो सकता है। एंडीज़ स्ट्रेन में सीमित मानव-से-मानव संक्रमण की संभावना बताई गई है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह कोविड-19 की तरह तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है।

यह संक्रमण इंसानों में गंभीर फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारी पैदा कर सकता है, जिसे हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (एचपीएस) कहा जाता है। गंभीर मामलों में मृत्यु का खतरा भी रहता है। डब्ल्यूएचओ, सीडीसी और संबंधित देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां संपर्क ट्रेसिंग, निगरानी और संक्रमित लोगों को आइसोलेट करने की प्रक्रिया चला रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को रोडेंट प्रजातियों से दूरी बनाए रखने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

हवा में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक बढ़ा रहे हैं धरती की गर्मी: अध्ययन

वायुमंडल में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक पृथ्वी को और अधिक गर्म बना रहे हैं तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ‘और गंभीर’ कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग ने नेचर क्लाइमेट चेंज  में प्रकाशित नए शोध के हवाले से यह जानकारी दी। अध्ययन में चीन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने पाया कि हवा में तैरने वाले बेहद छोटे रंगीन प्लास्टिक कण सूर्य की रोशनी को अवशोषित कर लेते हैं। ये कण हवाओं के साथ दुनिया भर में फैलते हैं और वातावरण में गर्मी को फंसाकर तापमान बढ़ाने में योगदान देते हैं। अध्ययन के सह-लेखक होंगबो फू के अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि में प्लास्टिक की भूमिका को ध्यान में रखते हुए अब जलवायु मॉडलों को अपडेट करने की जरूरत है।

यूपी में भीषण आंधी-तूफान का कहर, 100 से अधिक लोगों की मौत

उत्तर प्रदेश में तेज बारिश और ओलावृष्टि के साथ आए भीषण तूफान ने भारी तबाही मचाई है। रायटर्स  की रिपोर्ट के अनुसार, इस तूफान में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। राहत अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को आए इस तूफान में 59 लोग घायल हुए, 87 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 114 पशुओं की भी मौत हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से जून के बीच उत्तर भारत में इस तरह के तूफान आम होते हैं, लेकिन इस बार का तूफान बेहद विनाशकारी साबित हुआ। राज्य के राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर ने बताया कि करीब एक दर्जन जिलों में कम से कम 104 लोगों की मौत हुई, जिनमें प्रयागराज क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा।

वैज्ञानिकों की चेतावनी: 2026 में एल नीनो बढ़ा सकता है चरम मौसम की घटनाएं

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026 में एल नीनो के कारण दुनिया भर में हीटवेव, जंगलों में आग, बाढ़ और सूखे जैसी चरम मौसम घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं। क्लाइमेट होम की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर के सतही तापमान में असामान्य वृद्धि से बनने वाली यह प्राकृतिक जलवायु घटना वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।

द टाइम्स के मुताबिक, यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस समेत चार मौसम एजेंसियों के औसत अनुमान के अनुसार, 2026 में ‘बहुत शक्तिशाली’ एल नीनो बनने की 82 प्रतिशत संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके प्रभाव से 2027 में ब्रिटेन में गर्मियों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है और वैश्विक सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।गैबी हेगरल ने द इंडिपेंडेंट से कहा कि सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल) के साथ मिलकर एल नीनो का असर ‘और अधिक शक्तिशाली’ हो सकता है। इससे जंगलों में आग, सूखा और अन्य चरम मौसम घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका है।

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‘लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं’, तेल बचाने की अपील पर सरकार ने अफवाहों को किया खारिज

प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकों से खाद्य तेल, पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने तथा वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील के बाद देश में संभावित लॉकडाउन की ख़बरें फैलने लगीं। यह अपील अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए ईंधन संकट और आपूर्ति दबाव के बीच की गई थी।

हालांकि, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी  ने ऐसी आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि ‘लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं आने वाली है’। इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार, सरकार फिलहाल ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने के उपायों पर जोर दे रही है।

इस बीच, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान पर जारी युद्ध लंबा खिंचता है तो ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय रुपया कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर तक पहुंच गया है।

तेल और उर्वरक संकट से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव, सरकार बचाव में जुटी

अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने भारत की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब संकट काल जैसे कदम उठाकर अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने की कोशिश कर रही है।

भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल और लगभग 50 प्रतिशत गैस आयात करता है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना, उसके वित्तपोषण की व्यवस्था करना और रुपये की गिरावट रोकना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 20 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है। वहीं, रुपया 2026 में एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बन गया है और युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 5 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है।

इस बीच, भारत में खुदरा महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी, उर्वरकों की महंगाई और एल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका आने वाले महीनों में महंगाई को और बढ़ा सकती है।

अरावली खनन: सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाधारकों को राहत देने से इंकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों में खनन को लेकर फिलहाल खनन पट्टा धारकों को कोई राहत देने से इंकार किया है। अदालत ने कहा कि उसे अरावली क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर ‘काफी परेशान करने वाली’ जानकारी मिल रही है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जब तक वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं होगी, तब तक किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और उससे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है। इससे पहले नवंबर 2025 में अदालत ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर रोक लगाई थी।

पर्यावरणविदों ने नई परिभाषा से संरक्षण कमजोर पड़ने की आशंका जताई है।

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ा जलवायु आपदाओं का खतरा, 2025 में 12 लाख लोग प्रभावित: आईसीआईमॉड

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईमॉड) की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में हिंदूकुश-हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र के कम से कम चार देशों में 10 से अधिक बड़ी प्राकृतिक आपदाएं दर्ज की गईं। इन आपदाओं से करीब 12 लाख लोग सीधे प्रभावित हुए या विस्थापित हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार और चीन समेत कई देशों में भारी मानसूनी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ीं। कुछ क्षेत्रों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लॉफ़) जैसी घटनाएं भी सामने आईं।

आईसीआईमॉड ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ‘मल्टी-हैजार्ड’ घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जहां बाढ़, भूस्खलन और सूखे जैसी आपदाएं एक-दूसरे को और गंभीर बना रही हैं। संस्था के महानिदेशक ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में आपदाओं का ओवरलैप होना घरों, बुनियादी ढांचे और जरूरी सेवाओं को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

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दिल्ली में अवैध पेड़ कटाई पर एनजीटी ने मांगी पांच सालों की रिपोर्ट

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली में अवैध रूप से पेड़ काटे जाने के मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने दिल्ली के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को निर्देश दिया है कि पिछले पांच साल में पेड़ कटाई की शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का ब्यौरा जुटाया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि नियमों के तहत बदले में कितने पेड़ लगाए गए। इस पूरी जानकारी को तीन महीने के भीतर सरकारी वेबसाइट पर डालने को कहा गया है। एनजीटी ने अधिकारियों को दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के तहत शिकायतों का जल्द निपटारा करने का निर्देश भी दिया। अदालत ने कहा कि आने वाले मानसून में नियमों के अनुसार क्षतिपूरक वनीकरण सुनिश्चित किया जाए।

दिल्ली-एनसीआर में पराली जलाने के बढ़ते मामलों पर सीएक्यूएम सख्त

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। आयोग की बैठक में बताया गया कि 1 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच पंजाब में 8,986 और हरियाणा में 3,290 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से काफी ज्यादा हैं।

आयोग ने राज्यों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही दिल्ली-एनसीआर में 46 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र लगाने की योजना पर भी चर्चा हुई। 2026-27 के लिए क्षेत्र में 4.60 करोड़ पेड़, झाड़ियां और बांस लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।

लकड़ी जलाने से हवा में बढ़ रहा सीसा, नई रिसर्च में चेतावनी

अमेरिका के वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में पाया गया है कि लकड़ी जलाने से हवा में सीसा (लेड) जैसे जहरीले तत्व बढ़ रहे हैं। सीसा एक जहरीली धातु है, जो दिमाग और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका के कई इलाकों में सर्दियों के दौरान हवा के नमूनों की जांच की। इसमें पाया गया कि जहां लकड़ी ज्यादा जलाई गई, वहां हवा में सीसे के कण भी ज्यादा थे।

वैज्ञानिकों का कहना है कि पेड़ मिट्टी से पानी और पोषक तत्वों के साथ सीसा भी सोख लेते हैं, जो लकड़ी जलाने पर हवा में फैल जाता है। हालांकि इसकी मात्रा कानूनी सीमा से कम थी, लेकिन विशेषज्ञों ने कहा कि सीसे का कोई भी स्तर स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता।

चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण घटा, लाखों मौतें टलीं: अध्ययन

एक नए अध्ययन के अनुसार चीन में 2023 तक इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बढ़ते इस्तेमाल से वायु प्रदूषण में कमी आई और लाखों लोगों की जान बची। रिसर्च में कहा गया कि हवा में बेहद छोटे प्रदूषक कण पीएम2.5 में करीब 24 प्रतिशत और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस में 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज हुई। PM2.5 ऐसे बेहद छोटे कण होते हैं, जो फेफड़ों के जरिए शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।

अध्ययन के मुताबिक इससे करीब 2.62 लाख गैर-दुर्घटनाजनित मौतें टाली जा सकीं। शोधकर्ताओं ने उपग्रह आंकड़ों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से यह विश्लेषण किया। हालांकि लाभ मुख्य रूप से आर्थिक रूप से विकसित शहरों में ज्यादा देखने को मिला।

भारत की सौर क्षमता में रिकॉर्ड 143% उछाल

भारत ने 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी-मार्च के दौरान 15.3 गीगावॉट (GW) सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। ऊर्जा शोध संस्था मेरकॉम इंडिया के अनुसार, यह पिछले साल की तुलना में 143 प्रतिशत ज्यादा है। जबकि पिछली तिमाही की तुलना में यह 49 प्रतिशत अधिक है। इसमें बड़े सौर पार्कों और ओपन एक्सेस परियोजनाओं का सबसे बड़ा योगदान रहा।

कुल नई क्षमता में 82 प्रतिशत हिस्सा बड़े प्रोजेक्ट्स का था। रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 से नए नियम लागू होने से पहले कंपनियों ने तेजी से परियोजनाएं पूरी कीं, जिससे स्थापना में उछाल आया।

परमाणु ऊर्जा लक्ष्य पूरा करने के लिए 2047 तक चाहिए 25 लाख करोड़ रुपए: टेरी

ऊर्जा शोध संस्था टेरी की रिपोर्ट के अनुसार भारत को 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए 23 से 25 लाख करोड़ रुपए निवेश करने होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए नियमों में बड़े बदलाव, तेज परियोजना निर्माण और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) जैसी नई तकनीक जरूरी होगी।

एसएमआर छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर होते हैं, जिन्हें फैक्टरी में तैयार कर आसानी से लगाया जा सकता है। फिलहाल भारत में 25 परमाणु रिएक्टर हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 8.8 गीगावॉट है। रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती सौर और पवन ऊर्जा के बीच रात या कम धूप के समय लगातार बिजली देने में परमाणु ऊर्जा अहम भूमिका निभा सकती है।

गुजरात के मोढेरा में शुरू हुआ देश का पहला बैटरी-इंटीग्रेटेड सौर ऊर्जा संयंत्र

गुजरात के मोढेरा गांव में भारत का पहला ऐसा सौर ऊर्जा संयंत्र शुरू हुआ है, जिसमें बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) भी जोड़ी गई है। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली में बड़ी बैटरियां होती हैं, जिनमें दिन में बनी अतिरिक्त सौर बिजली स्टोर की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। 

रिपोर्ट के अनुसार गुजरात ने पांच जगहों पर कुल 870 मेगावॉट क्षमता की बैटरी परियोजनाएं शुरू की हैं। अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा, पाटन और कच्छ में नई परियोजनाएं भी पंजीकृत की गई हैं। राज्य सरकार ने 2025 की नई नवीकरणीय ऊर्जा नीति में ऊर्जा भंडारण को अहम हिस्सा बनाया है। इससे भारत को 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित 500 गीगावॉट क्षमता के लक्ष्य में मदद मिलेगी।

बैटरी वाली सौर-पवन बिजली कई जगहों पर कोयले से सस्ती: रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (इरेना) की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कई क्षेत्रों में सौर और पवन ऊर्जा को बैटरी भंडारण के साथ जोड़कर चौबीसों घंटे बिजली देना अब कोयला और गैस आधारित बिजली से सस्ता पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार जहां धूप और हवा अच्छी मात्रा में उपलब्ध है, वहां यह मॉडल लगातार और सस्ती बिजली देने में सफल हो रहा है।

शोध में बताया गया कि सौर ऊर्जा और बैटरी वाले प्रोजेक्ट्स से बिजली की लागत कई जगह नई कोयला परियोजनाओं से कम है। बैटरी प्रणाली अतिरिक्त बिजली को जमा करती है, जिससे रात या कम उत्पादन के समय भी बिजली मिलती रहती है। विशेषज्ञ इसे स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा समाधान मान रहे हैं।

वैश्विक ईवी बिक्री 2 करोड़ के पार, हर चौथी नई कार इलेक्ट्रिक

दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री 2025 में पहली बार 2 करोड़ के पार पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीसीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल बिकने वाली हर चार नई कारों में एक इलेक्ट्रिक थी। बैटरी से चलने वाली कारों की हिस्सेदारी 2024 में 14 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई।

चीन सबसे बड़ा बाजार बना रहा, जहां नई कारों की बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के अनुसार भारत में भी इलेक्ट्रिक कारों के बड़े मॉडल, जैसे एसयूवी और एमपीवी, तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

भारत में उपलब्ध ईवी मॉडलों की संख्या 33 से बढ़कर 47 हो गई। वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे उभरते बाजारों में भी ईवी की मांग तेजी से बढ़ी। 

भारत में 2032 तक 10 गुना बढ़ सकती है ईवी बैटरी की मांग: रिपोर्ट

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों की मांग 2032 तक 10 गुना बढ़कर 200 गीगावॉट-ऑवर (GWh) पहुंच सकती है। इंडियन एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) के अनुसार, 2025 में यह मांग करीब 20 GWh रही।

आईईएसए और कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब सिर्फ ईवी निर्माण ही नहीं, बल्कि बैटरी, मोटर और अन्य पुर्जों के घरेलू उत्पादन पर भी जोर दे रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में भारत में 25 लाख से ज्यादा ईवी बिक चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक कारों और छोटे व्यावसायिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।

चीन ने पहली बार पारंपरिक कारों से ज्यादा निर्यात किए इलेक्ट्रिक वाहन

चीन ने अप्रैल 2026 में पहली बार पेट्रोल-डीजल कारों से ज्यादा इलेक्ट्रिक और नए ऊर्जा वाहन (न्यू एनर्जी व्हीकल्स) विदेश भेजे। एनईवी में बैटरी कारें, प्लग-इन हाइब्रिड और कुछ हाइड्रोजन वाहन शामिल होते हैं। चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन के अनुसार, अप्रैल में चीन के कुल वाहन निर्यात में एनईवी की हिस्सेदारी 52.7 प्रतिशत रही। इनकी संख्या दोगुनी होकर 4.06 लाख पहुंच गई। हालांकि चीन के घरेलू बाजार में कारों की बिक्री 21.5 प्रतिशत गिरकर 14 लाख रह गई, जो 2022 के बाद सबसे कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा पुरानी कार बदलने पर मिलने वाली सब्सिडी घटाने और ईवी पर खरीद कर दोबारा लगाने से मांग कमजोर हुई। इस बीच अमेरिकी वाहन उद्योग ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चीन को अमेरिकी बाजार में और पहुंच न देने की मांग की है

होंडा को 70 सालों में पहली बार हुआ घाटा, ईवी योजनाओं पर असर

जापान की कार कंपनी होंडा को 70 साल में पहली बार सालाना घाटा हुआ है। कंपनी को मार्च 2026 तक के वित्तीय वर्ष में 423 अरब येन (करीब 2.7 अरब डॉलर) का नुकसान हुआ। होंडा ने माना कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग उसकी उम्मीद से कम रही। अमेरिका में ईवी खरीदने पर मिलने वाली टैक्स छूट हटने और आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ने से भी कंपनी को नुकसान हुआ।

अब होंडा अपनी कुछ ईवी योजनाएं घटाएगी और सस्ते पुर्जे चीन से खरीदेगी। कंपनी ने 2030 तक नई कारों में ईवी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य भी वापस ले लिया है। होंडा अब मोटरसाइकिल, हाइब्रिड कारों और वित्तीय सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देगी। भारत, जापान और उत्तर अमेरिका को कंपनी ने भविष्य के अहम बाजार बताया है।

ईरान युद्ध और हॉर्मुज़ संकट से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप, भारत में बढ़े पेट्रोल-डीज़ल के दाम

तेल और गैस कंपनी सऊदी अरामको ने चेतावनी दी है कि दुनिया में पेट्रोल और जेट ईंधन का भंडार ‘खतरनाक रूप से कम’ स्तर तक पहुंच सकता है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीन नासिर ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़) में पैदा हुए संकट से वैश्विक ईंधन आपूर्ति तेजी से प्रभावित हो रही है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जलडमरूमध्य के बंद रहने से वैश्विक तेल बाजार हर सप्ताह करीब 10 करोड़ बैरल तेल खो रहा है। वहीं, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने चेतावनी दी है कि यदि यह समुद्री मार्ग कई सप्ताह तक बंद रहा, तो तेल बाजार 2027 तक सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाएगा।

भारत में 3 रुपए प्रति लीटर बढ़े पेट्रोल-डीज़ल के दाम

कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। चार साल से ज्यादा समय बाद ईंधन कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में पेट्रोल अब 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर हो गया है।

वहीं सीएनजी की कीमत भी 2 रुपए प्रति किलो बढ़ाई गई है। सरकार का कहना है कि तेल कंपनियां लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं और यह ‘सीमित’ बढ़ोतरी है। विशेषज्ञों के अनुसार महंगे ईंधन से परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई पर असर पड़ने की आशंका है।

इससे पहले फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट में बताया कि वैश्विक तेल बाजार अगले चार सप्ताह में बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है। तेल व्यापारियों और विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन का भंडार तेजी से घट रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मई के अंत तक ईंधन भंडार बेहद कम स्तर पर पहुंच सकते हैं, जिसके बाद कीमतों में तेज बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है। 

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियों का कहना है कि जलमार्ग बंद रहने के हर दिन दुनिया अपने वाणिज्यिक भंडार, रणनीतिक रिजर्व और जहाजों में जमा तेल का इस्तेमाल करने को मजबूर हो रही है।

ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में पेट्रोल 52% महंगा

खाड़ी युद्ध से उपजे संकट का असर अमेरिका में भी दिखने लगा है। ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में 52 प्रतिशत महंगा हो चुका है। इसका मुख्य कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास फंसे तेल टैंकर बताए जा रहे हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। ईरान के कारण इस जलमार्ग पर असर पड़ने से कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर कम आय वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ रहा है।

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