जागिये: दुनिया में सबसे अधिक सल्फर है हमारी हवा में

Newsletter - August 20, 2019

हवा में बढ़ता ज़हर: नासा को उपग्रह से मिली तस्वीरों और आंकड़ों के आधार पर ग्रीनपीस ने जो रिपोर्ट तैयार की है वह भारत के लिये चिन्ताजनक है। मानचित्र- Greenpeace

ज़हरीली हवा: SO2 उत्सर्जन में भारत है नंबर-1

जहां अमेरिका और चीन ने पिछले 12 साल में उम्दा तकनीक के ज़रिये अपने सल्फर डाइ ऑक्साइड (SO2) के उत्सर्जन तेज़ी से कम किये हैं वहीं भारत मानवजनित SO2 छोड़ने के मामले में दुनिया में सबसे आगे निकल गया है। पर्यावरण पर नज़र रखने वाली ग्रीनपीस ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आंकड़ों और उपग्रह से मिली तस्वीरों के आधार पर एक विश्लेषण जारी किया है।

यह विश्लेषण बताता है कि भारत दुनिया में इंसानी हरकतों से हो रहे SO2 इमीशन के मामले में नंबर-1 है। यह कुल 15% SO2 इमीशन कर रहा है। जबकि चीन ने फ्ल्यू गैस डी-सल्फराइजेशन (FGD) तकनीक से अपने इमीशन तेज़ी से घटाये हैं। इस तकनीक के तहत चिमनी पर ही एक यंत्र लगता है जो वातावरण में जाने वाली हवा से ज़्यादातर SO2 रोक लेता है। SO2 वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है क्योंकि यह अस्थमा के मरीज़ों और बच्चों को गले और फेफड़ों के साथ आंखों में तकलीफ देती है। इसके अलावा SO2 के कण नाइट्रोज़न के तमाम रूपों के साथ मिलकर PM 2.5 के स्तर को बढ़ाते हैं।

सरकार ने दिसंबर 2015 में पहली बार यह मानक तय किये कि कोल पावर प्लांट अधिकतम कितना SO2 और NO2 हवा में छोड़ सकते हैं लेकिन बिजलीघरों ने पर्यावरण मंत्रालय की ओर से तय की गई 2 साल की सीमा के भीतर आवश्यक प्रदूषण नियंत्रक यंत्र लगाने में असमर्थता जता दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह डेडलाइन अब 2022 तक बढ़ गई है लेकिन ऐसा नहीं लगता कि पावर प्लांट 2022 तक भी इस चुनौती से लड़ने को तैयार हो पायेंगे।

नासा आंकड़ों के आंकड़ों के हवाले से ग्रीनपीस का कहना है कि भारत में 97% SO2 उत्सर्जन वहां पर हो रहा है जहां कोयला बिजलीघर मौजूद हैं। भारत के सिंगरौली, कोरबा, झारसुगुड़ा के अलावा कच्छ, चेन्नई और कोराड़ी इसके प्रमुख केंद्र हैं। तमिलनाडु देश के भीतर सबसे अधिक SO2 उत्सर्जन करने वाला राज्य है। उसके बाद उड़ीसा, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश हैं।


क्लाइमेट साइंस

आपदा की मार: राहत एजेंसियों ने देश भर में 9 राज्यों के 18 लाख लोगों को बाढ़ग्रस्त इलाकों से निकाला है। 152 ज़िलों में करीब 8000 राहत शिविर बनाये गये हैं। फोटो - Geospatial Media

भारत में बाढ़ का भारी असर

भारत में बाढ़ का भारी असर कम से कम 9 राज्यों में हुआ है। जहां एक ओर भारत में बाढ़ से 1000 से अधिक लोगों की मौत हो गई है वहीं 150 से अधिक ज़िलों में लाखों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हो गये है

बाढ़ से बांग्लादेश में 4 लाख टन चावल की बर्बादी

भारत में ही नहीं पड़ोसी बांग्लादेश में भी बाढ़ ने फसल को चौपट कर दिया है। माना जा रहा है कि धान की जितनी फसल बर्बाद हुई है उससे इस साल देश में चावल का उत्पादन करीब 4 लाख टन कम हो जायेगा। हालांकि कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि उनके गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है इसलिये अभी घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। बाढ़ से बांग्लादेश में 60 लाख लोग प्रभावित हुये हैं और 100 से अधिक लोगों की जानें गईं हैं।

ग्रीन हाउस गैस स्तर 2018 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे: शोध 

अमेरिकी मीटियोरोलॉजिकल सोसायटी ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसके मुताबिक साल 2018 में ग्लोबल वॉर्मिंग के लिये ज़िम्मेदार ग्रीन हाउस गैसों का स्तर सर्वाधिक मापा गया। अमेरिकी सरकार ने इस रिपोर्ट को बनाया है और इसे तैयार करने के लिये 60 देशों के 470 वैज्ञानिकों ने काम किया। इस रिपोर्ट के मुताबिक CO2 और दूसरी ग्रीन हाउस गैसों का असर 1990 के मुकाबले 43% बढ़ गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2018  में और भी कई  चिंताजनक रिकॉर्ड बने हैं। मिसाल के तौर पर समुद्र का तापमान और जलस्तर सर्वाधिक रिकॉर्ड किया गया है। सारे आंकड़े बता रहे हैं कि लगातार धरती गर्म हो रही है।

शेल गैस से बढ़ रहा है मीथेन का स्तर

अमेरिका की कोर्नल यूनिवर्सिटी के शोध में पाया गया है कि पिछले एक दशक में वातावरण में मीथेन की मात्रा में वृद्धि, शेल गैस के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से है। शेल सामान्य जीवाश्म ईंधन से अलग है और इस गैस के उत्पादन से मीथेन का स्तर बढ़ रहा है। पहले किये गये अध्ययनों में इस बात को नज़रअंदाज़ किया जाता रहा कि शेल गैस उत्पादन मीथेन को बढ़ाता है। यह अध्ययन कहता है कि पिछले एक दशक में अमेरिका और कनाडा में बन रही नई गैसों में दो तिहाई शेल गैस ही हैं।


क्लाइमेट नीति

लापरवाही की कीमत: सिंगरौली में एश डेम से ज़हरीली राख के रिसाव के बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एस्सार पावर पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया है लेकिन क्या यह पैसा उन किसानों तक पहुंचेगा जिनकी फसल और ज़मीन बर्बाद हुई है। फोटो – IamRenew

सिंगरौली: ज़हरीली राख रिसाव मामले में एस्सार को देने होंने ₹ 10 करोड़

कंपनी एस्सार के प्लांट से हुये रिसाव के बाद अब सरकार ने आदेश दिये हैं कि कंपनी प्रभावित किसानों को मुआवज़ा दे।  पिछली 7 अगस्त को एस्सार के कोयला बिजलीघर के ऐश डैम से रिसकर ज़हरीली राख कई किसानों के खेतों में फैल गई थी। अधिकारियों का कहना है कि 490 किसानों ने अपनी फसल को हुये नुकसान की शिकायत की थी। स्थानीय प्रशासन ने पहले कंपनी पर ₹ 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया फिर प्रदूषण बोर्ड ने हालात का मुआयना कर एस्सार को ₹ 10 करोड़ रुपये जमा करने को कहा है।

 कोयला बिजलीघर से निकलने वाली राख में आर्सेनिक और मरकरी समेत कई हानिकारक तत्व होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के रिसाव कृषि और कृषि भूमि के साथ भूजल के लिये ख़तरनाक हैं। इस बारे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी याचिका दायर कर किसानों और स्थानीय लोगों ने मांग की कि कंपनी उस इलाके से ज़हरीली राख और कचरे को हटाये ताकि उसे लोगों के घरों और वहां बने जलाशयों और कुंओं में जाने से रोका जा सके।

इंडोनेशिया में अब जंगल काटने के नये आदेश नहीं,  ग्रीनपीस ने कदम को अपर्याप्त कहा

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने आदेश दिया है कि किसी प्रोजेक्ट के लिये कोई नई फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं दी जायेगी। यानी जंगल काटने का कोई और आदेश जारी नहीं होगा। इससे करीब 6.6 करोड़ हेक्टेयर में फैले वनों को संरक्षण  मिलेगा और जंगलों में लगने वाली आग से होने वाले प्रदूषण रुक सकेगा।

हालांकि ग्रीनपीस का कहना है कि इंडोनेशिया में कड़े नियमों और सज़ा के प्रावधानों की गैरमौजूदगी के चलते राष्ट्रपति विडोडो की यह घोषणा अपर्याप्त होगी। इंडोनेशिया दुनिया के उन देशों में है जहां जंगल बहुत तेज़ी से कट रहे हैं।  पिछले 50 सालों में इंडोनेशिया के भीतर करीब 7.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले रेनफॉरेस्ट या तो काट दिये गये हैं या जला दिये गये हैं।


वायु प्रदुषण

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“प्रदूषित” शहरों की सूची में 20 नये नाम जुड़े, NGT ने सख़्ती करने को कहा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने उन शहरों की लिस्ट में 20 नाम और जोड़े हैं जिनकी हवा साफ करने के लिये विशेष कदम उठाये जाने हैं। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत अब तक  देश के 102 शहरों को चुना गया था। साल 2024 तक इन शहरों के वायु प्रदूषण में 30% कटौती का लक्ष्य था जिसे जानकार ऊंट के मुंह में ज़ीरे की तरह बता रहे  हैं। अब CPCB ने आंध्र प्रदेश के 8 और बंगाल के 6 शहरों समेत कुल 20 शहर इस सफाई अभियान में जोड़ दिये हैं।

उधर NGT ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कहा है कि वह अपना क्लीन एयर प्रोग्राम और दुरस्त करे ताकि 2024 के लिये हवा को साफ करने का एक मज़बूत लक्ष्य हो। पिछली 6 अगस्त को कोर्ट ने एक 15 सूत्रीय कार्यक्रम जारी कर पर्यावरण मंत्रालय से NCAP के लक्ष्य और ऊंचे करने को कहा था ताकि PM2.5 और PM10  जैसे कणों को और अधिक घटाया जा सके।

कोयला बिजलीघर: सरकार समय सीमा बढ़ाने के बाद अब नियमों में देगी ढील?

क्या सरकार ने अपने ही वैज्ञानिकों की सलाह के उलट कोयला बिजलीघरों को प्रदूषण मानकों में और छूट देगी? अंग्रेज़ी अख़बार बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुताबिक केंद्र थर्मल पावर प्लांट्स के लिये 4 साल पहले बनाये गये नियमों में और ढील देने का फैसला किया है। यह महत्वपूर्ण है कि बिजली मंत्रालय ने ऑन-लाइन पॉल्यूशन मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों को मानने से इनकार कर दिया। यह जानना ज़रूरी है कि पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 2015 में बनाये गये नियम अब तक कागज़ों पर ही हैं। पहले इन्हें दिसंबर 2017 से लागू होना था। लेकिन बिजली मंत्रालय के अनुरोध पर बिजलीघरों को 5 साल की छूट दे दी गई लेकिन  ऐसा लगता नहीं कि पावर प्लांट्स 2022 तक से भी इन नियमों का पालन करेंगे।

मुंबई  की हवा होती हवा के पीछे उद्योग और कूड़े के भंडार  

उपग्रह से मिले आंकड़े और तस्वीरें बताती हैं कि मुंबई की ख़राब एयर क्वॉलिटी के लिये कई कारक ज़िम्मेदार हैं।  इनमें थर्मल पावर प्लांट्स का धुंआं, धातु और तार उद्योगों का प्रदूषण और पत्थर निकालने वाली खदानों के अलावा ट्रकों और कारों का प्रदूषण भी शामिल है। इसके अलावा शहर में 12 जगह कूड़े के विशाल भंडार रोज जलाये जाते हैं। इसका धुंआ भी हवा को खराब कर रहा है। इन सभी की वजह से हवा में पार्टिकुलेट मैटर PM बढ़ रहे हैं और सांस की कई बीमारियां हो रही हैं। 

अर्बन इमीशन नाम की संस्था ने सैटेलाइट तस्वीरों और आंकड़ों के आधार पर जो शोध किया है उसमें यह बातें सामने आयीं हैं। इस शोध में कहा गया है कि शहर के बाहर बने इंडस्ट्री हब काफी हद तक मुंबई की हवा पर असर डाल रहे हैं।

सोनभद्र में खनन की इजाज़त को NGT ने किया निरस्त

यूपी में अत्यधिक प्रदूषण के शिकार सोनभद्र के निवासियों को थोड़ी सी राहत मिली है। NGT ने यहां चार खनन कंपनियों – महार स्टोर, जय मां भंडारी स्टोन, वैष्णो स्टोन और गुरु कृपा – को खनन करने से रोक दिया है। अदालत ने  इन सभी खनन यूनिटों से कहा है कि वह एक महीने के भीतर बतायें कि इस इलाके में हुये नुकसान की भरपाई कैसे होगी।


रिन्यूएबिल

कर्ज़ का बोझ: CEA ने कर्ज़ के बोझ में दबी DISCOM के आंकड़े ऑनलाइन करने का फैसला किया है ताकि पावर कंपनियों को उनकी सेहत के बारे में पता रहे। फोटो - MIT Technology Review

डिस्कॉम की बकाया ₹ 3,000 करोड़ हुई

बिजली उत्पादन कंपनियों को अब यह पता चल सकेगा कि कौन सी वितरण कंपनी (डिस्कॉम) कितनी खस्ताहाल है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) अब इस बात का रिकॉर्ड रखेगी कि डिस्कॉम का बिजली उत्पादक कंपनियों पर कितना बकाया है। उत्पादन करने वाली कंपनियों के साथ प्राधिकरण लगातार वितरण कंपनियों की आर्थिक हालत के बारे में जानकारी देगा ताकि पता चल सके कि कौन सी डिस्कॉम को भुगतान में दिक्कत आ सकती है। ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि वितरण कंपनियों पर साफ ऊर्जा कंपनियों का ₹ 3,012 करोड़ से अधिक का बकाया है जो करीब 6,000 मेगावॉट बिजली क्षमता के बराबर है। कंपनियों को जानकारी देने और पारदर्शिता बनाने के लिये अब CEA ने एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है।  

ढलान पर कोयला: एक साल में बिजलीघरों को कर्ज़ में 90% कमी

कोयला बिजलीघरों को दिये जाने वाले कर्ज़ में एक साल के भीतर 90% की कमी आई है। जहां साल 2017 में कुल 17,000 मेगावॉट क्षमता के कोल पावर प्लांट्स को ₹ 60,767 करोड़ का कर्ज़ मिला वहीं 2018 में केवल 3800 मेगावॉट के कोयला बिजलीघरों को ₹ 6081 करोड़ का कर्ज़ मिल पाया। दिल्ली स्थित सेंटर फॉर फाइनेंसियल अकाउंटबिलिटी (CFA)ने 54 एनर्ज़ी प्रोजेक्ट फाइनेंस का अध्ययन कर यह बात कही है।  CFA की रिपोर्ट कहती है कि 2017 और 2018 के बीच साफ ऊर्जा के प्रोजेक्ट्स में कर्ज़ ₹ 1529 करोड़ से बढ़कर ₹ 22,442 करोड़ हो गई। कोयला बिजलीघरों को कर्ज़ देने वाले ज़्यादातर वित्तीय संस्थान सरकारी बैंक रहे जबकि निजी बैंकों का 80% फाइनेंस साफ ऊर्जा के संयंत्रों में लगा।

रुख बदला: आंध्र प्रदेश सरकार साफ ऊर्जा के सभी बिजली खरीद अनुबंध नहीं तोड़ेगी

केंद्र सरकार के दबाव और अदालत के कड़े रुख के बाद अब आंध्र प्रदेश सरकार ने अपना रुख बदलने के संकेत दिये हैं। राज्य में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने साफ ऊर्जा कंपनियों के साथ पुरानी सरकार द्वारा किये गये सभी बिजली खरीद अनुबंध (PPA) निरस्त करने की घोषणा कर दी थी। केंद्र सरकार के आला अधिकारियों ने कहा है कि मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी का इरादा सारे अनुबंध रद्द करने का नहीं है वह केवल “भ्रष्ट और घोटाले में लिप्त” खरीद को कैंसिल करना चाहते हैं। इससे पहले पावर कंपनियों की याचिका के बाद आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट से राज्य सरकार के फैसले पर 22 अगस्त तक रोक लगा दी थी।  


इलेक्ट्रिक मोबिलिटी

PM को उम्मीद: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है देश में पेट्रोल-डीज़ल कारों के साथ साथ बैटरी कारों के बाज़ार के पनपने के लिये पर्याप्त संभावनायें हैं हालांकि ऑटोमोबाइल सेक्टर अभी औंधे मुंह पड़ा है। फोटो - Twitter (@anil0420)

पेट्रोल-डीज़ल और बैटरी कारों का बाज़ार साथ साथ बढ़ेगा: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा जताया है कि भारत में पेट्रोल-डीज़ल और बैटरी कारों का बाज़ार साथ-साथ बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री का चौंकाने वाला बयान उस वक्त आया है जब भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर में ज़बरदस्त मन्दी है और पेट्रोल-डीज़ल कारों की बिक्री में लगातार नवें महीने गिरावट दर्ज की गई है। सवाल यह भी है सरकार ने साल 2030 तक 100% बैटरी कारों का लक्ष्य रखा है। अगर उस लक्ष्य को हासिल करना है तो पेट्रोल-डीज़ल कारों को धीरे धीरे बाज़ार से हटाना होगा।

सरकार ने हाल में यह भी कहा कि वह 2023 तक पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाले तिपहिया वाहनों पर औऱ 2025 तक दुपहिया वाहनों पर रोक लगायेगी। बाज़ार के हाल को देखते हुये इस फैसले की व्यवहारिकता पर भी सवाल खड़े हैं। 

GM, VW बनायेंगे सिर्फ बैटरी वाहन, टोयोटा और फोर्ड पसोपेश में

जनरल मोटर्स और फोक्सवेगन ने तय किया है कि ये कंपनियां अमेरिका में हाइब्रिड कारें  बनाना बन्द कर अब  सिर्फ बैटरी कारें ही बनायेंगी।  इन दो कंपनियों ने 2018 में अमेरिका में कुल 32 लाख कारें बेचीं। इस फैसले से बैटरी वाहनों के बाज़ार में तेज़ी आने की संभावना है।

हालांकि दो अन्य बड़ी कंपनियों टोयोटा और फोर्ड का इरादा हाइब्रिड उत्पादन बन्द करने का नहीं है। ये कंपनियां पूरी तरह बैटरी चालित कार बनाना जारी रखेंगी ताकि उन ग्राहकों के लिये विकल्प खुला रहे जो लम्बी ड्राइव और चार्जिंग सुविधा को लेकर फिक्रमंद रहते हैं। 

चीन ने सब्सिडी खत्म की तो बैटरी वाहनों की बिक्री में दिखी गिरावट

जुलाई के महीने में चीन में बैटरी वाहनों की बिक्री में 4.7% की गिरावट (जुलाई 2018 के मुकाबले) दर्ज की गई। दो साल में पहली बार बैटरी वाहनों की बिक्री में यह कमी दर्ज की गई। चीन में जुलाई में केवल 80,000 बैटरी कारें बिकीं और फ्रांस की कार निर्माता प्यूश्यो निर्माता ने अपने प्लांट को बन्द करने के अलावा कुछ कर्मचारियों की छंटनी भी की। इस झटके के बाद भी चीन विश्व बैटरी बाज़ार में नंबर-वन पर है।   उसका इरादा साल 2020 तक 90% मिनी ट्रकों को बैटरी चालित बनाना है। चीन में पिछले साल के मुकाबले इस साल चार्जिंग सुविधा में भी करीब 72% की वृद्धि हुई है।


जीवाश्म ईंधन

नया ख़तरा: ऐसे दुर्लभ और संवेदनशील क्षेत्र जल्दी ही तेल और गैस निकालने के लिये खोले जायेंगे क्योंकि अमेरिका ने विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण के लिये बने क़ानून को ढीला कर दिया है। फोटो - Pew Charitable Trust

अब विलुप्त होती प्रजातियों से जुड़ा कानून ढीला किया अमेरिका ने

ट्रम्प प्रशासन ने विलुप्त होती प्रजातियों से जुड़ा कानून ढीला कर अब उन इलाकों को “आर्थिक सर्वे” के लिये खोल दिया है जहां अब तक इंसानी दखल नहीं था। इन दुर्लभ क्षेत्रों में अब अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनियां तेल और गैस की संभावनाओं का पता लगायेंगी। ट्रम्प ने इससे पहले स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के विरोध के बावजूद अलास्का के राष्ट्रीय वन्य जीव क्षेत्र में भी तेल और गैस  परिशोधन की अनुमति दे दी थी। जानकारों को डर है कि अभी इस तरह के कई और क्षेत्रों से पाबंदियां हटेंगी।

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी ने जीवाश्म ईंधन से तौबा की

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने घोषणा की है कि वह जीवाश्म ईंधन से जुड़ी किसी भी कंपनी से रिश्ता नहीं रखेगी। कंपनी ने तय किया है कि वह ऐसी कंपनियों से हर तरह के निवेश हटा लेगी। यह फैसला दुनिया को यह संदेश देने के लिये है कि कोयला, तेल और गैस से जुड़ी हर कंपनी मानवाधिकारों के खिलाफ है क्योंकि जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन हो रहा है जो कि जलवायु परिवर्तन का कारण है। जलवायु परिवर्तन ही बाढ़, चक्रवाती तूफान और सूखे जैसे विनाशलीला के लिये ज़िम्मेदार है। ऐसी आपदाओं की सबसे बड़ी मार कमज़ोर और गरीब लोगों पर पड़ रही है।

अमेरिका में 10600 MW के कोयला बिजलीघर होंगे बन्द  

अमेरिका में इस साल 10,600 मेगावॉट के कोयला बिजलीघर या तो बन्द कर दिये जायेंगे या फिर उन्हें गैस से चलाया जायेगा। पिछले साल (2018 में) 13,000 मेगावॉट क्षमता के कोयला बिजलीघर बन्द किये गये थे। सस्ती शेल गैस की उपलब्धता और साफ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने से अमेरिका में कोयला बिजलीघर बन्द हो रहे हैं। हालांकि जानकार कहते हैं कि इसके बावजूद यह नहीं कहा जा सकता कि अमेरिका से कार्बन उत्सर्जन कम होगा क्योंकि अमेरिका अभी तेल और गैस का बिजली के लिये इस्तेमाल कर रहा है और शेल गैस का ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में काफी रोल रहता है। यह भी सच  है कि बन्द हो रहे कई कोयला बिजलीघर पुराने पड़ चुके हैं जिन्हें रिटायर होना ही था।