कचरा प्रबंधन में फेल: CPCB ने राज्यों पर लगाया जुर्माना

Editorial Team8 जून. 2019
निकम्मेपन की कीमत: सरकारी महकमों का हाल यह है कि वह हर महीने 1 करोड़ रुपये जुर्माना देने को तैयार हैं लेकिन प्लास्टिक के प्रबंधन के लिये तैयार नहीं I फोटो – Yale

निकम्मेपन की कीमत: सरकारी महकमों का हाल यह है कि वह हर महीने 1 करोड़ रुपये जुर्माना देने को तैयार हैं लेकिन प्लास्टिक के प्रबंधन के लिये तैयार नहीं I फोटो – Yale


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB ने देश की 25 राज्य सरकारों पर प्रति माह 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना इन राज्यों द्वारा प्लास्टिक वेस्ट के प्रबंधन का कोई एक्शन प्लान न दिये जाने की वजह से लगाया गया है। इस मामले मेंCPCB ने केंद्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) में शिकायत की थी जिसके बाद यह जुर्माना लगाया गया।

देश में सालाना 1.6 करोड़ टन से अधिक प्लास्टिक इस्तेमाल होता है लेकिन 80%कचरा यूं ही फैला रहता है। संयुक्त राष्ट्र (UNFCCC) में जमा की गई रिपोर्ट में भारत ने कहा है कि साल 2000 से 2010 के बीच देश में ठोस कचरे की वजह होने वाला ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन सालाना 3.1% बढ़ा है।

NGT ने आंध्र सरकार के रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट पर लगाई रोक

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने आंध्र प्रदेश सरकार की गोदावरी, कृष्णा और पन्ना नदियों को जोड़ने की योजना पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह रोक पर्यावरण संबंधी अनुमति न मिलने की वजह से लगाई है। NGT ने पर्यावरण मंत्रालय से एक महीने के भीतर रिपोर्ट जमा करने को कहा है।

जानकारों ने चेतावनी दी है कि रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट से कृषि के इस्तेमाल होने वाला पानी उद्योगों के लिये खर्च किया जायेगा। इससे खाद्य सुरक्षा को ख़तरा है। विशेषज्ञ याद दिला रहे हैं कि देश में 50% से अधिक कृषि भूमि अभी भी सिंचाई के लिये मॉनसून पर ही निर्भर है इसलिये सरकार जल संकट की दुहाई देकर नदियों को जोड़ने के प्रोजक्ट को सही नहीं ठहरा सकती।

कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण: 80 देश बढ़ायेंगें अपने घोषित लक्ष्य

संयुक्त राष्ट्र को उम्मीद है कि सितंबर में हो रहे न्यूयॉर्क सम्मेलन में करीब 80 देश कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण के लिये अपने घोषित लक्ष्य को और बढ़ाने का ऐलान करेंगे। करीब 200 देशों ने 2015 में हुये पेरिस सम्मेलन के तहत जलवायु परिवर्तन पर काबू करने के लिये कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिये साफ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने और जंगलों को लगाने का वादा किया है।

चिली – जो कि दिसम्बर में होने वाले महासम्मेलन का मेजबान है – ने घोषणा की है कि वह 2040 तक कोयला बिजलीघरों को पूरी तरह बन्द कर देगा तो दक्षिण कोरिया ने 2040 तक साफ ऊर्जा उत्पादन को 35% बढ़ाने का वादा किया है। कड़वी सच्चाई यह है कि अगर धरती को ग्लोबल हीटिंग से बचाना है तो सभी देशों को अपने घोषित लक्ष्य कई गुना बढ़ाने होंगे लेकिन अभी तो देश पेरिस सम्मेलन के वादों से ही बहुत दूर है।

ब्राज़ीली राष्ट्रपति बोल्सनेरो: अमेज़न वर्षा वनों का दुश्मन

उपग्रह से मिली तस्वीरों से स्पष्ट हो गया है कि क्लाइमेट चेंज को हौव्वा कहने वाले ब्राज़ीली राष्ट्रपति जेर बोल्सनेरो के राज में पर्यावरण पर सबसे अधिक चोट हुई है। पिछले एक दशक पर नज़र डालें तो अमेज़न रेन फॉरेस्ट में सबसे अधिक जंगल इस साल मई के महीने में कटे और कुल 739 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का सफाया हो गया। समाचार एजेंसी राइटर के मुताबिक राष्ट्रपति द्वारा पर्यावरण नियमों में ढील के बाद अवैध टिंबर माफिया के हौसले काफी बढ़ गये हैं। बोल्सनेरो ने वन कमीशन को कृषि मंत्रालय के अधीन कर दिया है जिससे वन कटान की वकालत करने वाले कृषि से जुड़े उद्योगपतियों की खूब चल रही है।

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