जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के लिहाज़ से साल 2025 बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। तमाम चेतावनियों के बीच रिकॉर्ड उत्सर्जन हुआ और तापमान लगातार बढ़ा। जबकि जलवायु महासम्मेलन कॉप30 में जीवाश्म ईंधन पर प्रतिबंध लगाकर ग्लोबल वार्मिंग रोकने के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हुए। लेकिन इन्हीं चिंताजनक खबरों के बीच कुछ आशा की किरणें भी दिखाई दीं।
आइए नज़र डालें पांच ऐसी खबरों पर जिनसे इस साल उम्मीद बंधी।
- अरावली पर सुप्रीम कोर्ट ने रोका अपना फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों से जुड़े विवादित आदेश पर बड़ा कदम उठाते हुए 20 नवंबर 2025 के अपने फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। उस आदेश में अरावली रेंज की नई परिभाषा को मंजूरी दी गई थी। अदालत ने मामले की दोबारा समीक्षा की जरूरत बताते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञ रिपोर्ट और पूर्व आदेश तब तक लागू नहीं होंगे, जब तक नई विशेषज्ञ समिति विस्तृत अध्ययन नहीं कर लेती। पहले के फैसले में 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र को ही अरावली मानने का मानदंड तय किया गया था, जिस पर व्यापक विरोध हुआ था। आलोचकों ने कहा था कि इससे अरावली के बड़े हिस्से संरक्षण से बाहर हो सकते हैं। अदालत ने केंद्र और राज्यों को नई समिति के गठन में सहयोग का निर्देश दिया है।
- पहली बार प्रदूषण को लेकर सड़कों पर उतरे लोग
दिल्ली में हर साल सर्दियों के साथ वायु प्रदूषण की समस्या बेहद गंभीर हो जाती है। इस साल भी नवंबर-दिसंबर के दौरान अधिकतर समय वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में रही। लेकिन इस साल शायद पहली बार इंडिया गेट पर दर्जनों लोगों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों में पर्यावरण कार्यकर्ताओं के साथ कई अभिभावक भी थे, जिनका कहना था कि प्रदूषण से बच्चों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है और साफ हवा उनका बुनियादी अधिकार है। कई माताएं अपने बच्चों के साथ आईं और सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया।
हालांकि इसके कुछ दिनों बाद, 23 नवंबर को एक और प्रदर्शन हुआ जिसने हिंसक रूप ले लिया और कुछ पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल भी हुए।
- भारत ने हासिल किया गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन का लक्ष्य
भारत ने 2030 तक अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन यह लक्ष्य जुलाई 2025 में ही हासिल कर लिया गया। केंद्र सरकार के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच करीब 45 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता जोड़ी गई, जिसमें से 35 गीगावाट सौर ऊर्जा से प्राप्त हुई। 2025 में भारत के कुल ऊर्जा उत्पादन का एक तिहाई हिस्सा पवन, सौर, लघु पनबिजली और परमाणु सहित गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त किया गया।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि नवीकरणीय ऊर्जा की तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी ने ग्रिड असंतुलन और ट्रांसमिशन देरी जैसी चुनौतियाँ पैदा की हैं।
- जलवायु परिवर्तन पर एक दूसरे को आईसीजे में घसीट सकेंगे देश
संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे), ने जुलाई 2025 में जलवायु परिवर्तन पर एक ऐतिहासिक फैसला दिया। अदालत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित देश, नुकसान के लिए अन्य देशों से मुआवजे की मांग कर सकते हैं, चाहे वह पुराने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से ही क्यों न हुआ हो। हालांकि यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे वैश्विक स्तर पर बेहद अहम बताया। अदालत ने कहा कि देशों को जलवायु संकट से निपटने के लिए सबसे सख्त कदम उठाने होंगे। आईसीजे ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारें अपने देश में काम कर रही कंपनियों और जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं के असर की जिम्मेदार होंगी।
- सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल-डीज़ल कारों पर बैन का सुझाव दिया
बीते नवंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लग्जरी पेट्रोल और डीजल कारों को चरणबद्ध तरीके से बंद करना इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी शुरुआत हो सकती है। इस याचिका में सरकार की ईवी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि बाजार में अब बड़े और सुविधाजनक इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध हैं, जो वीआईपी और बड़ी कंपनियों द्वारा इस्तेमाल होने वाली ‘गैस गज़लर’ कारों का विकल्प बन सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पहले चरण में सिर्फ हाई-एंड कारों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा सकता है, जिससे आम लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि सरकार भी इस विचार के पक्ष में है और 13 मंत्रालय इस दिशा में काम कर रहे हैं।
दो साल पहले, हमने अंग्रेजी में एक डिजिटल समाचार पत्र शुरू किया जो पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर रिपोर्ट करता है। लोगों ने हमारे काम की सराहना की और हमें प्रोत्साहित किया। इस प्रोत्साहन ने हमें एक नए समाचार पत्र को शुरू करने के लिए प्रेरित किया है जो हिंदी भाषा पर केंद्रित है। हम अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद नहीं करते हैं, हम अपनी कहानियां हिंदी में लिखते हैं।
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