दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया (सीआईएल) के चेयरमैन ने कहा है कि आने वाले दिनों में सीआईएल बढ़ चढ़ कर सोलर एनर्जी में निवेश करेगी। कंपनी ने 2024 तक इसके लिये 6000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। माना जा रहा है कि इस दौरान कोल इंडिया 13,000-14,000 कर्मचारियों की छंटनी कर देगा क्योंकि छोटे स्तर की कई खदानें बन्द होंगी। सीआईएल के चेयरमैन ने कहा है कि अगले दो-तीन दशकों में कोयला क्षेत्र में कंपनी का बिजनेस कम होगा और नये सिरे से सोलर कोयले की जगह ऊर्जा का नया स्रोत बनेगा।
अभी इस बारे में अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है लेकिन कंपनी के आला अधिकारी का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि सरकार ने कंपनी को साल 2023-24 तक 100 करोड़ टन सालाना कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया हुआ है। सरकार की रणनीति में साल 2050 तक भारत के एनर्जी सेक्टर में कोयला ईंधन का बड़ा स्रोत रहेगा।
कोयले उत्पादन में वृद्धि से बढ़ेगा मीथेन उत्सर्जन
सालाना 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन का भारत सरकार का लक्ष्य ग्लोबल वॉर्मिंग के ख़तरों को बढ़ा सकता है। ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ाने में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड के बाद मीथेन दूसरा सबसे बड़ा कारक है। इससे जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे भारत जैसे देश के लिये संकट बढ़ सकता है।
अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संगठन ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि अगले 20 साल में दुनिया भर की नई कोयला खदानों से होने वाले मीथेन उत्सर्जन का असर सालाना 1,135 मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साइड के बराबर होगा। कोयला खदानों से जिन देशों का मीथेन उत्सर्जन सर्वाधिक होगा उनमें चीन (572 मिलियन टन सालाना) सबसे आगे है। ऑस्ट्रेलिया (233 मिलियन टन प्रतिवर्ष) और रूस (125 मिलियन टन सालाना) के बाद भारत का नंबर है जिसका उत्सर्जन 45 मिलियन टन प्रतिवर्ष रहेगा।
यह उत्सर्जन भारत की 52 प्रस्तावित कोयला खदानों से अनुमानित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, अमेरिका, टर्की, पोलैंड और उजबेकिस्तान जैसे देशों का 40-50% ग्रीन हाउस गैस इमिशन मीथेन के रूप में होगा। इस रिपोर्ट को जारी करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि कोयला खनन में होने वाला मीथेन इमीशन अब तक हमेशा ही पड़ताल के दायरे से बाहर रहा है जबकि ग्लोबल वॉर्मिंग के मामले में यह CO2 से अधिक खतरनाक गैस है। हालांकि कई दूसरे विशेषज्ञ कहते हैं कि मीथेन उत्सर्जन का मुद्दा तेल और गैस निकालने से अधिक जुड़ा है और कोयला सेक्टर में इसे कोई बड़ी चिन्ता नहीं माना जाना चाहिये।
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