2024 में दुनिया ने जोड़ी रिकॉर्ड नवीकरणीय क्षमता, सोलर सबसे आगे

Editorial Team31 मार्च. 2025
2024 में दुनिया ने जोड़ी रिकॉर्ड नवीकरणीय क्षमता, सोलर सबसे आगे

अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (इरेना) की नवीनतम वार्षिक सांख्यिकीय रिलीज़ से पता चलता है कि पिछले साल दुनिया भर में 585 गीगावाट नई ‘स्वच्छ’ ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, जो एक रिकॉर्ड वार्षिक वृद्धि है। बिज़नेस ग्रीन की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में शुरू की गई कुल ऊर्जा क्षमता का 92.5 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से आया, जो 15.1 प्रतिशत की रिकॉर्ड वार्षिक दर्शाता है।

येल एनवायरनमेंट 360 की रिपोर्ट के अनुसार, सोलर सबसे तेजी से बढ़ने वाला नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत रहा। नई क्षमता में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 77 प्रतिशत थी। जबकि पवन ऊर्जा का योगदान 19% रहा।

इरेना के आंकड़ों के अनुसार, चीन ने 2024 में अन्य सभी देशों की तुलना में अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित की। जी7 और जी20 देशों में क्रमशः 14.3% और 90.3% नई क्षमता जोड़ी गई। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, इस वृद्धि के बावजूद, दुनिया अभी भी 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने के अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते पर नहीं है। इरेना की गणना के हिसाब से वर्तमान में इस लक्ष्य से 28% कम प्राप्त होने की उम्मीद है।

जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण से भारत के सौर ऊर्जा उत्पादन में गिरावट

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन भारत में सौर पैनलों की दक्षता को कम कर रहे हैं। हालांकि भारत में साल भर में 300 धूप वाले दिन होते हैं, लेकिन प्रदूषण के कारण सौर ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हो रहा है। बढ़ता तापमान भी सौर सेल की कार्यक्षमता घटा रहा है। अध्ययन के अनुसार, सदी के मध्य तक सौर पैनलों की दक्षता में 2.3% तक गिरावट आ सकती है, जिससे हर साल 840 गीगावाट-घंटे बिजली का नुकसान होगा। शोध में बेहतर प्रदूषण नियंत्रण और सौर सेल डिज़ाइन में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

भारत का सोलर निर्यात 16% गिरा, आयात में 10% की कमी: मेरकॉम

साल 2024 में भारत के सौर मॉड्यूल और सेल निर्यात 16 प्रतिशत गिरकर 1.5 बिलियन डॉलर पहुंच गया। 2023 में यह 1.8 बिलियन डॉलर था। फोटोवोल्टिक मॉड्यूल सौर निर्यात का 97.7%  था, जिसमें से 97.5% अमेरिका ने खरीदा। सोलर मॉड्यूल शिपमेंट की कड़ी निगरानी, और विभिन्न देशों की  चीनी घटकों को लेकर चिंताओं के कारण निर्यात में गिरावट आई।

भारत का सौर आयात भी 10.2 प्रतिशत गिरकर 4.5 बिलियन डॉलर हो गया। सोलर मॉड्यूल ने कुल आयात का 65.1% रहा, जबकि सोलर सेल की हिस्सेदारी 34.9% रही। घरेलू सौर उत्पादन को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों के कारण आयात में कमी आई। भारत ने 86.5% आयात चीन से किया। इसके बाद वियतनाम और थाईलैंड का नंबर रहा।

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