भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख सप्लायर बनेगा अमेरिका

Editorial Team15 फ़र॰. 2025
भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख सप्लायर बनेगा अमेरिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बावजूद दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी मजबूत करने के लिए सहमति बनी है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देश ऊर्जा व्यापार बढ़ाने और अमेरिका को भारत का कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) का प्रमुख सप्लायर बनाने के लिए कटिबद्ध हुए हैं।

भारत सरकार के अनुसार दोनों नेताओं ने हाइड्रोकार्बन उत्पादन को बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने संकट के दौरान आर्थिक स्थिरता को संरक्षित करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के मूल्य पर भी प्रकाश डाला और रणनीतिक तेल आरक्षित व्यवस्थाओं का विस्तार करने के लिए प्रमुख भागीदारों के साथ काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कोल इंडिया: कोयला उत्पादन में जनवरी में मामूली गिरावट 

इस साल जनवरी में कोल इंडिया लिमिटेड के कोयला उत्पादन में पिछले साल इसी महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की गिरावट हुई है। पिछले साल जनवरी माह में कोल इंडिया का उत्पादन 78.8 मिलियन टन था जो कि 2025 जनवरी में 77.8 मिलियन रहा। हालांकि दिसंबर 2024 में (दिसंबर 2023 की तुलना में) सीआईएल का कोयला उत्पादन सवा पांच प्रतिशत बढ़ा था। अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 के बीच कंपनी ने (पिछले वित्त वर्ष में इस अवधि की तुलना में ) कोयला उत्पादन में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि की है और इस वित्तीय वर्ष में कुल उत्पादन 621 मिलियन टन हो गया है। 

अमेरिकी जीवाश्म ईंधन पाइपलाइन कंपनी के खिलाफ़ ग्रीनपीस ने यूरोपीय अदालत में मामला दायर किया 

ग्रीनपीस ने सोमवार को एक अमेरिकी ऊर्जा कंपनी के खिलाफ एंटी इंटिमिडेशन कोर्ट (धमकी-रोधी अदालत) में मामला दायर किया। इस कंपनी ने पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस पर करोड़ों का मुकदमा दायर किया। ग्रीनपीस का यह कदम यूरोपीय संघ के उस निर्देश के तहत है जो सिविल सोसायटी को परेशान करने के उद्देश्य किये जाने वाले मुकदमों का मुकाबला करने को कहता है। यूरोपीय आयोग ने पिछले साल जन भागीदारी के खिलाफ रणनीतिक मुकदमों पर अंकुश लगाने के लिए सुरक्षा उपाय किये हैं जिसे SLAPPS के नाम से जाना जाता है। 

जीवाश्म ईंधन पाइपलाइन कंपनी एनर्जी ट्रांसफर ने नॉर्थ डकोटा 2016 में एक विरोध प्रदर्शन के आयोजन के लिए ग्रीनपीस पर 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर का मुकदमा दायर किया है। पर्यावरण समूहों और अमेरिकी भारतीय जनजातियों ने उस प्रोजेक्ट से संभावित तेल रिसाव और उससे वहां के लोगों के लिए होने वाली पानी की सप्लाई के प्रदूषित होने की चिंता को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।

ग्रीनपीस का मुख्यालय एम्सटर्डम में है और इसने एक डच अदालत में यह अपील की है कि वह एनर्जी ट्रांसफर को मुआवजा देने के लिए बाध्य करे। पिछले साल लागू हुए नए नियमों को तहत यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों की अदालतों को यह शक्ति देते हैं कि वह संघ के बाहर SLAPP मुकदमों के प्रवर्तन को रोकने और कंपनियों को कानूनी शुल्क के लिए मुआवजा देने का आदेश दें। एनर्जी ट्रांसफ़र के पास जवाब को लिए जुलाई तक का वक़्त है। 

फ्रांस की कंपनी के साथ प्रतिवर्ष 4 लाख टन गैस की डील 

फ्रांस की बड़ी ऊर्जा कंपनी टोटलएनर्जीस ने 2026 से गुजरात राज्य पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीपीएससी) को प्रति वर्ष 400,000 टन एलएनजी बेचने का समझौता किया है। अगले 10 वर्षों के लिए इस करार पर बीते बुधवार को हस्ताक्षर किए।

मुख्य रूप से जीएसपीसी के औद्योगिक ग्राहकों के लिए एलएनजी को भारत के वेस्ट कोस्ट पर टर्मिनलों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही घरेलू और व्यावसायिक उपयोगों और सीएनजी स्टेशनों पर भी इसकी आपूर्ति की जाएगी। गुजरात के मुंद्रा में जीएसपीसी की एक एलएनजी आयात फैसिलिटी है।

यह पिछले एक वर्ष में भारतीय कंपनियों के साथ टोटलएनर्जीस का दूसरा सौदा है। इससे पहले कंपनी ने जून 2024 में 10 साल के लिए इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) के साथ प्रति वर्ष 800,000 टन एलएनजी बेचने का सौदा किया था।

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