नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राष्ट्रीय ताप बिजली कॉर्पोरेशन यानी एनटीपीसी को पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के लिये 57 लाख 96 हज़ार का जुर्माना भरने को कहा है। एनटीपीसी पर यह जुर्माना उत्तराखंड में उसके निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड़ प्रोजेक्ट में पर्यावरण नियमों की अवहेलना के लिये लगाया गया था। एनटीपीसी ने राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से पास किये गये आदेश के खिलाफ एनजीटी में अपील की थी।
महत्वपूर्ण है कि यह एनटीपीसी का वही हाइड्रो प्रोजेक्ट है जिसमें पिछली 7 फरवरी को आई आपदा के बाद कई मज़दूरों की मौत हुई है। इस आपदा के बाद साफ दिखा कि एनटीपीसी के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों का भारी कमी थी। पिछले साल राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने पाया था कि यहां मलबा निस्तारण (मक डम्पिंग) के लिये बनाई गई साइट्स पर मलबे का ढलान 60 डिग्री से अधिक है जो कि तय मानकों से दुगना है। राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने पिछले साल जून में साइट का दौरा करने के बाद एनटीपीसी को मलबा निस्तारण यार्ड्स को दुरुस्त करने को कहा था लेकिन अक्टूबर में किये गये दौरे में पाया कि कंपनी ने कोई एहतियाती कदम नहीं उठाये।
एनर्जी निवेश संधि में ग्रीन सुधार पर यूरोपीय सदस्य एकमत नहीं
यूरोपीय सदस्य एनर्जी इन्वेस्टमेंट ट्रीटी (ईसीटी) के तहत ग्रीन सुधारों पर एकमत नहीं हैं। फ्रांस और स्पेन इस संधि में ऐसे कड़े सुधारों के हिमायती जिसके तहत जीवाश्म ईंधन कंपनियां उन देशों पर मुआवजे के लिये मुकदमा कर सकती हैं जहां क्लाइमेट पॉलिसी से उनके मुनाफे पर चोट पड़ती हो। हालांकि पूर्वी यूरोपीय देश ऐसे बदलावों का विरोध कर रहे हैं। थिंक टैंक ओपन एक्सपी के मुताबिक अगर कंपनियां ऐसे मुकदमे करेंगी – जर्मनी की कंपनी आरडब्लूई पहले ही नीदरलैंड सरकार पर 140 करोड़ यूरो का मुकदमा कर चुकी है – तो आम आदमी पर 1.3 लाख करोड़ यूरो का बोझ पड़ेगा। इसमें से आधा बोझ यूरोपीय यूनियन उठायेगी।
यूरोपीय यूनियन की नीति में गैस प्रोजेक्ट के लिये “सीमित छूट”
कोरोना महामारी के बाद आर्थिक रिकवरी पैकेज में यूरोपीय देशों ने भले ही उन प्रोजेक्ट को बाहर रखने की कोशिश की हो जो जलवायु परिवर्तन का कारण हों लेकिन गैस प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिये सीमित गुंजाइश रखी है। जहां ब्रेसेल्स आर्थिक रिकवरी फंड को 2050 तक पूरे यूरोप को क्लाइमेट न्यूट्रल बनाने की दिशा में लगाने की बात कर रहा है वहीं जर्मनी और पोलैंड नेचुरल गैस को जीवाश्म ईंधन और साफ ऊर्जा के बीच एक ‘पुल’ के तौर पर इस्तेमाल करने को कह रहे हैं।
क्लाइमेट पर ग़लत जानकारी रोकने के लिये फेसबुक का अभियान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने घोषणा की है कि वह क्लाइमेट चेंज पर दी जा रही गलत जानकारी पर ‘मिसइन्फोर्मेशन’ लेबल लगायेगा। अभी उसका यह ट्रायल यूनाइटेड किंगडम में शुरू होगा। फेसबुक का क्लाइमेट साइंस इंफोर्मेशन सेंटर, फैक्ट चेक के दावों के साथ यह लेबलिंग करेगा। हालांकि यह कैसे किया जायेगा इसकी प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि अल्गोरिदम का वही तरीका फेसबुक इस्तेमाल करेगा जो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान किया गया।
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