अक्टूबर में भारत का डीज़ल बिक्री का ग्राफ गिरा

Editorial Team29 अक्टू॰. 2021
चेतावनी: एल्युमिनियम कंपनियों के संगठन ने सरकार को चेताया है कि कोयले की कमी से लाखों लोगों को रोज़गार से हाथ धोना पड़ सकता है। Photo: Wikimedia Commons

चेतावनी: एल्युमिनियम कंपनियों के संगठन ने सरकार को चेताया है कि कोयले की कमी से लाखों लोगों को रोज़गार से हाथ धोना पड़ सकता है। Photo: Wikimedia Commons


अक्टूबर के पहले पखवाड़े में तेल (रिटेलर) कंपनियों की डीज़ल बिक्री कम होकर 24 लाख टन रह गई। यह पिछले साल के (इसी पखवाड़े की) बिक्री के मुकाबले 9.2% और 2019 की तुलना में करीब 0.9% कम रही। इंडियन ऑइल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के पास मिलाकर 90% रिटेल का बाज़ार है। भारत एशिया की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति है कुल रिफाइंड ईंधन की खपत में 40% गैसोलीन है जो कि औद्योगिक काम धन्धों से जुड़ी है। हालांकि डीज़ल के उलट कोविड के पहले की तुलना में गैसोलीन की सेल बढ़ गई क्योंकि लोगों ने महामारी के डर से अपने निजी वाहनों का अधिक इस्तेमाल किया। अक्टूबर में गैसोलीन की बिक्री 2019 में इसी समय के मुकाबले 8.3% अधिक थी। 

वैसे भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी लगातार जारी है। दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल 105 रुपये से अधिक और डीज़ल 95 तक पहुंच गया है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 111 रुपये प्रति लीटर  से अधिक और डीज़ल 102 को पार कर गया है। 

एल्युमिनियम कंपनियों ने नौकरियों पर संकट के बारे में चेताया, कोयले की आपूर्ति के लिये पीएमओ को लिखा

एल्युमिनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर मांग की है कि देश के एल्युमिनियम उत्पादकों के लिये कोयले की सप्लाई सुगम की जाये। अपने पत्र में एसोसिएशन ने कहा है कि 21 अगस्त से उन्हें ज़रूरत की तुलना में केवल 50% कोयला मिला और फिलहाल केवल 10% मिल पा रहा है और  कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित न होने से 10 लाख कर्मचारियों की नौकरी जाने का खतरा है। एल्युमिनियम उद्योग में कोयले पर बड़ी निर्भरता है क्योंकि इसमें प्रति टन का हिसाब देखें तो स्टील उद्योग के मुकाबले 15 गुना और सीमेंट उद्योग की तुलना में 145 गुना बिजली की खपत होती है ।  

ऑस्ट्रेलिया ने नेट ज़ीरो लक्ष्य का वर्ष 2050 तय किया लेकिन जीवाश्म ईंधन बन्द नहीं होगा 

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने साल 2050 को देश का नेट ज़ीरो वर्ष तय किया है। हालांकि ग्लोबल वॉर्मिंग के लिये ज़िम्मेदार जीवाश्म ईंधन (कोयले, तेल और गैस वगैरह) को रोकने के लिये इसका क्या प्लान है यह नहीं बताया है। सोमवार से शुरू हो रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले ये घोषणा हुई है लेकिन सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों में होने के कारण इसकी कड़ी आलोचना हुई है। प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीशन ने कहा है कि वह कार्बन इमीशन को लेकर किसी का उपदेश नहीं सुनेंगे और साल 2030 तक उनका देश इमीशन में 30-35% कमी करने जा रहा है जबकि उन्होंने पेरिस संधि के दौरान 26% इमीशन कम करने की बात कही थी। उन्होंने कोल माइनिंग कंपनियों से भी कहा है कि वह ईंधन की मांग देखते हुए अधिक प्रतिस्पर्धा करें। आने वाले दिनों में ऑस्ट्रेलिया में गैस का प्रयोग बढ़ेगा भले ही यह सौर ऊर्जा और कार्बन कैप्चर टैक्नोलॉजी में निवेश कर रहा है।

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