भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 113 प्रतिशत बढ़ी

Editorial Team16 जन॰. 2025
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 113 प्रतिशत बढ़ी

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में लगभग 30 गीगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की। यह 2023 में दर्ज की गई 13.75 गीगावाट से 113 प्रतिशत अधिक है। इस विस्तार के साथ, भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 218 गीगावाट तक पहुंच गई है

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसको हासिल करने के लिए देश को अगले छह वर्षों में हर साल कम से कम 50 गीगावाट नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करनी होगी। इससे पहले भारत ने 2023-24 में नवीकरणीय क्षमता में 18.48 गीगावाट की उच्चतम वृद्धि दर्ज की थी।

2025 में स्वच्छ ऊर्जा निवेश जीवाश्म ईंधन से अधिक होगा: रिपोर्ट

एस&पी ग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पहली बार स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में निवेश तेल और गैस से अधिक हो जाएगाईटी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में स्वच्छ ऊर्जा टेक्नोलॉजी पर निवेश 670 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें सौर पीवी का आधा हिस्सा होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में कम से कम 620 गीगावाट नई सौर और पवन क्षमता जोड़ी जाएगी, जो भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की कुल एनर्जी सिस्टम के बराबर होगी। 2025 तक स्थापित क्षमता में बैटरी ऊर्जा भंडारण पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज से अधिक हो सकता है। रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि अमोनिया कम कार्बन वाले हाइड्रोजन उत्पादन में एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभर रहा है।

हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस पर केंद्र के निर्देश अनिवार्य नहीं: कोर्ट

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार विद्युत अधिनियम के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करके, राज्य के नियामक निकायों को अपने हरित ऊर्जा नियमों का पालन करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती हैमेरकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस को बढ़ावा देने के लिए 2022 में लाए गए नियमों और इससे संबंधित कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (केईआरसी) के नियमों को रद्द कर दिया।

अदालत ने केईआरसी को सभी हितधारकों की जरूरतों पर विचार करने और जरूरत पड़ने पर हरित ऊर्जा एक्सेस के लिए अपने खुद के नियम बनाने का निर्देश दिया। इन्हें राष्ट्रीय विद्युत नीति और टैरिफ नीति के अनुरूप होना चाहिए लेकिन केईआरसी को स्वतंत्र निर्णय लेने की अनुमति देनी चाहिए। विद्युत अधिनियम के तहत केंद्र सरकार की भूमिका नीति मार्गदर्शन प्रदान करने तक सीमित है।

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