केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की 2025 की वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार, भारत भर में लिए गए लगभग 15,000 भूजल नमूनों में से 13-15 प्रतिशत में यूरेनियम (uranium) का स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक पाया गया है। विशेष रूप से दिल्ली में, 86 निगरानी स्थलों पर किए गए परीक्षणों में कुल 83 नमूनों में से 24 नमूनों — यानी लगभग 13.35 % से 15.66 % — में यूरेनियम स्तर तय मानकों से अधिक पाया गया।
रिपोर्ट में यह बताया गया है कि प्रदूषण मुख्यतः उन क्षेत्रों में ज्यादा है जहाँ भूजल की खपत अधिक है और aquifer (भूजल स्तर) गिर चुका है — जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि। यह भी स्पष्ट किया गया है कि मानसून-पूर्व और मानसून-पश्चात दोनों मौसमों में नमूनों में यूरेनियम पाया गया और कई नमूनों में यह 30 पीपीबी (पार्ट्स प्रति बिलियन) से अधिक था, जो कि सुरक्षित सीमा से ऊपर है। विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है — क्योंकि लंबे समय तक यूरेनियम युक्त जल पीने से गुर्दे और हड्डियों को नुकसान, कैंसर या अन्य बीमारियाँ हो सकती हैं।
CGWB रिपोर्ट इस उभरते खतरे की ओर चेतावनी देती है: भूजल की नियमित निगरानी, दूषित जल स्रोतों की पहचान, और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित जल उपलब्ध कराने के लिए तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।
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