ईवी निर्माण के कारण बढ़ेगी चीन पर भारत की निर्भरता: रिपोर्ट

Editorial Team20 मार्च. 2023
बैटरी के उत्पादन, डिस्पोजल और चार्जिंग के दौरान ईवी से भी प्रदूषक तत्व निकलते हैं। Photo: Nerijus jakimavičius/Pixabay.com

बैटरी के उत्पादन, डिस्पोजल और चार्जिंग के दौरान ईवी से भी प्रदूषक तत्व निकलते हैं। Photo: Nerijus jakimavičius/Pixabay.com


एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के घरेलू निर्माण के चलते कच्चे माल, खनिज प्रोसेसिंग और बैटरी उत्पादन के लिए भारत की चीन पर निर्भरता बढ़ेगी

आर्थिक थिंकटैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईवी के प्रभावों का मूल्यांकन करने की जरूरत है। बैटरी के उत्पादन, डिस्पोजल और चार्जिंग के दौरान ईवी से भी प्रदूषक तत्व निकलते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ईवी के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली करीब 70 फीसदी सामग्री चीन और कुछ अन्य देशों से आयात की जाती है।

चीन विश्व स्तर पर उत्पादित लिथियम का 60 प्रतिशत से अधिक प्रोसेस करता है। वह 65 प्रतिशत कोबाल्ट और 93 प्रतिशत मैंगनीज को भी प्रोसेस करता है। वैश्विक स्तर पर उत्पादित चार में से तीन बैटरियों का निर्माण चीन करता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ईवी का नौकरियों और प्रदूषण पर प्रभाव पड़ता है और इनसे जुड़े 13 ऐसे मुद्दे गिनाए हैं जो उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योग और सरकार द्वारा भी ध्यान देने योग्य हैं।

इन मुद्दों में शामिल हैं ईवी की महंगी कीमतें, लंबी यात्रा के लिए ईवी की उपयुक्तता, खराब मौसम में प्रदर्शन, सार्वजनिक परिवहन के लिए उपयुक्तता, चीन पर बढ़ती निर्भरता, और प्रदूषण में कमी न होना आदि।

भारत में पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहन 21 लाख से ऊपर 

भारत में कुल 21.7 लाख इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पंजीकृत हैं, भारी उद्योग राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने मंगलवार को संसद को सूचित किया।

6 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 4.65 लाख ईवी पंजीकृत हैं, इसके बाद महाराष्ट्र में 2.26 लाख पंजीकृत हैं।

जहां दिल्ली 2.03 लाख पंजीकृत वाहनों के साथ तीसरे स्थान पर है, वहीं बेंगलुरु 1.83 लाख ईवी के साथ चौथे स्थान पर रहा।

आंकड़ों से यह भी पता चला है कि दिल्ली में देश में सबसे अधिक 1,845 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (पीसीएस) हैं। जबकि कर्नाटक में 704 ऐसे स्टेशन हैं, और महाराष्ट्र में 660 ईवी चार्जिंग स्टेशन हैं।

कुल मिलाकर, देश भर में 6,586 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन हैं।

एक अलग जवाब में ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में ऐसे कुल 10,967 स्टेशन काम कर रहे हैं।

ईवी की खरीद पर आयकर में छूट चाहिए तो जल्दी कीजिए

यदि आप आयकर अधिनियम की धारा 80EEB के तहत ईवी की खरीद पर टैक्स में छूट चाहते हैं तो जल्दी कीजिए। आपके पास 31 मार्च तक का समय है।

आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80EEB के तहत ईवी खरीदने हेतु लिए गए ऋण के ब्याज पर आयकर में छूट प्रदान की जाती है। इस धारा को इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 2019 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था।

इस धारा के तहत 1.5 लाख रुपए तक की कटौती का लाभ उठाया जा सकता है, यदि कुछ शर्तें पूरी की जाएं तो।

यदि आप लोन लेकर ईवी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपको सुनिश्चित करना होगा कि आपका लोन 31 मार्च 2023 तक स्वीकृत हो जाए। तभी आप धारा 80EEB के तहत कटौती का दावा करने में सक्षम होंगे।

बजट 2021 में सरकार ने (प्रदूषण के स्तर को कम करने के उद्देश्य से) ग्रीन टैक्स नीति की घोषणा की थी। ग्रीन टैक्स वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के समय लगाया जाता है। ईवी इस टैक्स से पूरी तरह मुक्त हैं।    

ऑटो पीएलआई वितरण के पहले होगी गहन जांच

फेम-II (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) पहल के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माताओं द्वारा गलत तरीके से सब्सिडी प्राप्त करने के आरोपों के बाद, सरकार प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) के तहत इंसेंटिव देने के पहले गहन जांच करेगी

दिशानिर्देशों का पालन न करने के आरोपों के बाद लगभग एक दर्जन इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माताओं के खिलाफ जांच चल रही है।   

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इंसेंटिव प्राप्त करने के लिए, अब निर्माताओं को और सख्त नियमों का पालन करना होगा।

ऑटोमोटिव क्षेत्र में पीएलआई योजना को लागू करने वाले भारी उद्योग मंत्रालय ने भी निर्माताओं के लिए विनिर्माण मानक तैयार किए हैं।

सरकार ने इस साल की शुरुआत में पीएलआई के तहत इंसेंटिव देने के लिए बजट में 604 करोड़ रुपए आवंटित किए थे।

अगले चार से पांच वर्षों में योजना का विस्तार होने पर इस राशि में भी वृद्धि होगी।

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