आंध्र के तट से टकरा कर आगे बढ़ा चक्रवात अर्णब, 6 मौतों की पुष्टि; कई राज्यों में भारी बारिश
बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्णब आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद कमजोर पड़ गया है, लेकिन इसका असर अभी खत्म नहीं हुआ है। चक्रवात से बने मौसम तंत्र के कारण देश के पूर्वी, मध्य और उत्तरी हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है।
आंध्र प्रदेश में चक्रवात के कारण कम से कम छह लोगों की मौत की आधिकारिक सूचना है। हालांकि, द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में स्थानीय अधिकारियों के हवाले से मृतकों की संख्या नौ बताई गई है। तूफान से बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। प्रशासन अब राहत, बिजली बहाली और नुकसान का आकलन करने में जुटा है।
चक्रवात की ताज़ा स्थिति
आईएमडी के 29 अक्टूबर के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, अर्णब बुधवार रात तक कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया। गुरुवार तड़के इसका केंद्र उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिण ओडिशा, दक्षिण छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के आसपास के क्षेत्र में था।
बुधवार रात 11.30 बजे दर्ज स्थिति के अनुसार, मौसम तंत्र ओडिशा के मलकानगिरी से करीब 60 किलोमीटर दक्षिण में था। यह लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर की ओर बढ़ रहा था। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इसके 29 अक्टूबर की सुबह तक अवदाब (डिप्रेशन) और शाम तक वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में कमजोर होने की संभावना है।
इसका मतलब है कि चक्रवात की ताकत घट रही है, लेकिन इससे जुड़ी नमी और हवा का परिसंचरण आगे भी बारिश करा सकता है।
आंध्र प्रदेश में छह मौतें, बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान
चक्रवात का सबसे सीधा असर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिला। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण पेड़ गिरने, मकानों की दीवारें ढहने और करंट लगने जैसी घटनाओं में लोगों की जान गई। मीडिया खबरों के अनुसार, गुरुवार तक कम से कम छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। वहीं, द टाइम्स ऑफ इंडिया ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से नौ लोगों की मौत की खबर दी।
मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के हवाले से बताया गया कि चक्रवात से कम से कम 15,000 बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं। अधिकांश जिलों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई थी, लेकिन कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी में गुरुवार को भी समस्या बनी हुई थी। प्रशासन के सामने अब बिजली व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने, क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत करने तथा प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की चुनौती है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
चक्रवात के तट से टकराने से पहले आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। दोनों राज्यों में 1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, ताकि तेज हवाओं, समुद्र में ऊंची लहरों और भारी बारिश के कारण जान-माल का नुकसान कम किया जा सके।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालने के साथ राहत एवं बचाव दलों को भी तैयार रखा। कुछ क्षेत्रों में स्कूल बंद किए गए और एहतियात के तौर पर रेल तथा विमान सेवाएं रद्द की गईं।
हालांकि, तूफान कमजोर पड़ने के बावजूद निचले इलाकों में जलभराव, पेड़ गिरने और स्थानीय स्तर पर सड़क यातायात बाधित होने का खतरा बना हुआ है।
पूर्वी और मध्य भारत में भारी बारिश की चेतावनी
चक्रवात के कमजोर होने के बाद बारिश का प्रभाव तटीय इलाकों से आगे बढ़ रहा है। आईएमडी के अनुसार, 29 अक्टूबर को कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका भी है।
ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय यातायात प्रभावित होने की आशंका है। तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी विदर्भ, पश्चिम बंगाल तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश हो सकती है।
दिल्ली के अलावा हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के कुछ हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की आशंका भी जताई गई है।
हालांकि, दिल्ली-एनसीआर के मौसम में होने वाले हर बदलाव को केवल अर्णब से जोड़ना सही नहीं होगा। इसके लिए क्षेत्र में सक्रिय अन्य मौसमी प्रणालियों की भूमिका भी देखनी होगी।
समुद्र में फंसा मालवाहक जहाज, मछुआरों को चेतावनी
चक्रवात के दौरान आंध्र प्रदेश के तट के पास मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज फंस गया। जहाज पर 20 लोग सवार थे। गुरुवार को समुद्र में खराब परिस्थितियों के कारण जहाज की स्थिति सामान्य नहीं हो सकी थी।
आईएमडी ने मछुआरों को पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों के आसपास समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी थी। यह चेतावनी पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों के लिए भी थी।
चक्रवात कमजोर पड़ने के बावजूद समुद्र में तेज हवाएं और ऊंची लहरें जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसलिए मछुआरों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना जरूरी है।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा चक्रवात का व्यापक असर
चक्रवात अर्णब के कमजोर पड़ने के बाद भी उपग्रह की तस्वीरों में इसके बादलों का बड़ा फैलाव दिखाई दिया है। बादलों का यह क्षेत्र पूर्वी और मध्य भारत से होते हुए उत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ है। चक्रवात से जुड़ा हवा का परिसंचरण वातावरण में नमी पहुंचाता है। जब यह नम हवा दूसरे मौसमी कारकों के साथ मिलती है, तो चक्रवात के केंद्र से काफी दूर भी बारिश हो सकती है।
इसी वजह से तट से दूर स्थित छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बारिश का खतरा बना हुआ है।
इसी बीच, अंडमान सागर के ऊपर एक अलग कम दबाव का क्षेत्र भी विकसित हुआ है। आईएमडी के अनुसार, इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और आगे चलकर मजबूत होने की संभावना है। हालांकि, इसे अर्नब का ही हिस्सा नहीं समझना चाहिए; यह एक अलग मौसम प्रणाली है।