केंद्र सरकार ने नए ठोस कचरा (अपशिष्ट) प्रबंधन नियमों को अधिसूचित कर दिया है, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे। इन नियमों के तहत सोर्स पर कचरे का चार श्रेणियों –गीला, सूखा, सेनेटरी और स्पेशल केयर कचरे — में विभाजन अनिवार्य किया गया है। बड़े अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं, जिनमें सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आवासीय सोसायटियां शामिल हैं। नियमों का उद्देश्य शहरी निकायों पर बोझ कम करना और विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना है। उल्लंघन पर ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के तहत पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।
शहरी सीवेज में मिले एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया
भारतीय शहरों की सीवर लाइनों और खुले नालों में बह रहा गंदा पानी अब एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी खतरनाक बैक्टीरिया का बड़ा स्रोत बन रहा है। नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, अस्पतालों, घरों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले एंटीबायोटिक अवशेष सीवेज में बैक्टीरिया को दवाओं से बचना ‘सिखा’ रहे हैं। शोध में पाया गया कि यमुना नदी सहित कई जल स्रोतों में दूषित अपशिष्ट पहुंच रहा है। चिंताजनक रूप से, कुछ दवाओं के प्रति प्रतिरोध अस्पतालों की तुलना में सीवेज में अधिक मिला, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे की आशंका जताई गई है।
वायु प्रदूषण से निपटने से भारत को हो सकता है 220 अरब डॉलर का फायदा: रिपोर्ट
वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण हासिल करने से भारत को 2030 तक करीब 220 अरब डॉलर का आर्थिक लाभ हो सकता है। डाउन टू अर्थ में एक नए अध्ययन के हवाले से यह जानकारी दी गई है कि वायु प्रदूषण कम करने से पीएम 2.5 स्तर को लगभग 20 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य और उत्पादकता को होने वाले बड़े नुकसान रोके जा सकते हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इससे 14 लाख नए रोजगार और जॉब ट्रांजिशन के अवसर पैदा होंगे, जबकि व्यवसायों को होने वाले करीब 85 अरब डॉलर के नुकसान से भी बचाव होगा। अध्ययन ने वायु गुणवत्ता सुधार को आर्थिक और विकास प्राथमिकता बताया है।
बीएमसी ने 106 सरकारी, निजी निर्माण स्थलों को काम रोकने का नोटिस दिया
मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (बीएमसी) ने अनिवार्य एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं लगाने पर 106 निर्माण स्थलों को ‘स्टॉप वर्क’ नोटिस जारी किया है। इनमें निजी परियोजनाएं, रेलवे ब्रिज निर्माण, एसआरए और म्हाडा के प्रोजेक्ट शामिल हैं। बीएमसी के अनुसार मई 2025 से बार-बार चेतावनी देने के बावजूद इन निर्माण स्थलों पर नियमों का उल्लंघन जारी था। 1,000 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं को उच्च-स्तरीय मॉनिटर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। अनुपालन नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह कार्रवाई सिर्फ निर्माण स्थलों तक सीमित नहीं रहेगी।
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