केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि देश भर के शहरी स्थानीय निकायों (अर्बन लोकल बॉडीज़) ने सड़क पर धूल को नियंत्रित करने के लिए कुल 7,094.39 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह जानकारी मंत्रालय ने 2 फरवरी को सदन में दी, जिसमें कहा गया कि यह धन नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के अंतर्गत सड़कों पर धूल और वायु गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर लगाया गया है।
130 शहरों के बीच 48 मिलियन-प्लस आबादी वाले शहरी क्षेत्रों को पंद्रहवें वित्त आयोग के ‘मिलियन-प्लस सिटी चैलेंज फंड’ के तहत सहायता मिली है, जबकि शेष 82 शहरों को प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत वित्त पोषण हुआ है।
सरकार ने कहा कि एनसीएपी के तहत सड़क की धूल को कम करने के लिए किए गए उपायों – जैसे मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण – ने कई शहरों में पीएम10 स्तर में सुधार लाने में मदद की है।
प्रदूषण से बढ़ता बलगम फेफड़ों के लिए खतरा: अध्ययन
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बॉम्बे के एक अध्ययन में पाया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण शरीर में अत्यधिक बलगम बनने से फेफड़ों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है। शोध के अनुसार, सामान्यतः बलगम बाहरी कणों को फंसाकर श्वसन तंत्र को सुरक्षा देता है, लेकिन प्रदूषण के कारण जब इसकी मात्रा बहुत बढ़ जाती है तो यह समान रूप से फैलने के बजाय संकरे उभार बना लेता है। इससे श्वासनली की दीवारों के कई हिस्से खुले रह जाते हैं, जहां सूक्ष्म कालिख कण आसानी से जमा हो सकते हैं। अध्ययन में बताया गया कि इससे एलर्जी और अस्थमा के तेज हमलों का खतरा बढ़ता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि महानगरों में बढ़ते प्रदूषण के बीच यह निष्कर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकेत है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन बजट में कटौती, सीएक्यूएम आवंटन घटा
केंद्र सरकार ने 2026-27 के बजट में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आवंटन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का कुल बजट 3,759.46 करोड़ रुपए रहा, जो 2025-26 के बजट अनुमान से 10 प्रतिशत अधिक है। हालांकि मंत्रालय के तहत काम करने वाले वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को 35.26 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले बजट अनुमान 38.98 करोड़ रुपए से कम हैं। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 123 करोड़ रुपए मिले, जो पिछले अनुमान से कम लेकिन संशोधित अनुमान से अधिक हैं।
मशीनों से सड़क की सफाई के लिए सीएक्यूएम ने जारी किए नए मानक
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सफाई मशीनों के उपयोग संबंधी नए मानक जारी किए हैं। आयोग ने कहा कि सड़क की धूल पीएम10 का प्रमुख स्रोत है और शुष्क मौसम में पीएम2.5 में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। अधिसूचना के अनुसार, मशीनों की तैनाती सड़क की चौड़ाई के अनुसार की जाएगी और उनमें प्रभावी धूल निस्पंदन प्रणाली अनिवार्य होगी। नए बेड़े में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक मशीनें शामिल की जाएंगी, जो कम से कम आठ घंटे काम कर सकें। सफाई का दिन और समय पहले से सार्वजनिक करना भी जरूरी होगा।
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