मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों पर 71,395 करोड़ रुपए का घाटा, देश में सबसे बड़ी वित्तीय बोझ बनीं

मध्य प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने मिलकर 71,395 करोड़ रुपए का भारी घाटा दर्ज किया है और वे देश की सबसे बड़ी वित्तीय ‘सिंकहोल’ के रूप में उभरी हैं। ईटी एनर्जीवर्ल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च एटीएंडसी (AT&C) नुकसान, एसीएस-एआरआर के बीच बड़ा अंतर, समय पर टैरिफ संशोधन न होना और सरकार पर बढ़ते बकाये को इस वित्तीय संकट की प्रमुख वजह बताया गया है।

AT&C का अर्थ है कि बिजली उत्पादन से लेकर बिल वसूली तक की प्रक्रिया में कितनी बिजली ‘गायब’ हो जाती है – यानी जिसके पैसे कंपनी को नहीं मिलते जबकि एसीएस-एआरआर का अंतर सीधे घाटे का संकेतक है यानी बिजली उत्पादन में खर्च और उससे मिले राजस्व का अंतर। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कुल डिस्कॉम घाटे का 11 प्रतिशत अकेले मध्य प्रदेश के हिस्से में है। राष्ट्रीय स्तर पर बिजली वितरण कंपनियों का कुल घाटा 6.47 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। वर्षों से सुधार आधारित सहायता और बेलआउट पैकेज के बावजूद कई राज्यों में वित्तीय दबाव की गहराई उजागर हुई है।

ऊर्जा स्रोतों में विविधीकरण की दिशा में कदम: अमेरिका से तेल खरीदना भारत के हित में: पीयूष गोयल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि ऊर्जा संसाधनों में विविधता (Diversity) लाने की दिशा में अमेरिका से कच्चा तेल खरीदना भारत के रणनीतिक हित में होगा। ईटी एनर्जीवर्ल्ड के अनुसार, गोयल ने स्पष्ट किया कि तेल खरीदने का फैसला पूरी तरह कंपनियों और वाणिज्यिक खरीदारों (तेल और गैस कंपनियों) के हाथ में है, न कि व्यापार वार्ताकारों के।

उन्होंने भारत की ऊर्जा रणनीति और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के दायरे के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित किया।

मध्य पूर्व तनाव के बीच कच्चे तेल के दाम 1% चढ़े, अमेरिकी भंडार वृद्धि से बढ़त सीमित

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिकी कच्चे तेल भंडार में साप्ताहिक आधार पर बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट ने कीमतों में तेजी को सीमित रखा, रॉयटर्स ने बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और वार्ता जारी रहने की संभावना है। पिछले सप्ताह ओमान में अमेरिकी और ईरानी राजनयिकों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत हुई थी, जबकि क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती ने तनाव बढ़ाया है। अगली दौर की वार्ता की तारीख और स्थान की घोषणा अभी नहीं की गई है।

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