प्रदूषण नियंत्रण योजना पर आवंटित फंड का 1% से भी कम हुआ खर्च

Editorial Team31 मार्च. 2025
प्रदूषण नियंत्रण योजना पर आवंटित फंड का 1% से भी कम हुआ खर्च

वित्तीय वर्ष 2024-25 में ‘प्रदूषण नियंत्रण’ योजना के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को आवंटित 858 करोड़ रुपये में से अब तक 1 प्रतिशत से भी कम का उपयोग किया गया है। यह बात मंगलवार को संसद में पेश एक रिपोर्ट से पता चली। 

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर विभाग-संबंधी स्थायी समिति ने अनुदानों की मांगों (2025-26) की रिपोर्ट पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए मंत्रालय से “आत्मनिरीक्षण” करने और धन के उपयोग न किये जाने के कारणों पर गंभीरता से ध्यान देने को कहा।

योजना के तहत कुल 858 करोड़ रुपये का संशोधित आवंटन था जिसमें से 21 जनवरी तक केवल 7.22 करोड़ रुपये ही व्यय हुआ।   पैनल ने को अपने जवाब में मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इस योजना को जारी रखने के लिए अनुमोदन की प्रतीक्षा के कारण धन का उपयोग नहीं किया जा सका। रिपोर्ट में दिखाया गया है कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में, मंत्रालय ने इस योजना के लिए आवंटित सारा बजट खर्च कर दिए।

यह योजना पूरी तरह से केंद्र द्वारा चलाई जाती है। सरकार का नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी)  इस फंड से चलता है। एनसीएपी के तहत 2026 तक देश भर के 131 शहरों में पार्टिकुलेट मैटर पीएम 10 (सूक्ष्म प्रदूषक) प्रदूषण को कम करने का लक्ष्य रखा है। इनमें 49 शहर दस लाख से अधिक आबादी वाले हैं और बाकी 82 दूसरे शहर हैं जिनके लिए योजना के तहत 3072 करोड़ रुपये 2019-20 से 2025-26 के बीच खर्च किये जाने थे।  

फेफड़ों से अधिक दिल को नुकसान पहुंचाता है वायु प्रदूषण: विशेषज्ञ

वायु प्रदूषण केवल हमारे फेफड़ों के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि दिल के दौरे और हृदय रोगों में भी इसका प्रमुख योगदान है। एसोसिएटेड चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) द्वारा आयोजित ‘इलनेस टू वेलनेस’ सम्मलेन में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ संदीप बंसल ने समझाया कि कैसे प्रदूषण का हमारे दिल पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि पीएम2.5 कण रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं, जिससे दिल के दौरे पड़ते हैं।

उन्होंने बताया कि सफदरजंग अस्पताल में हुए एक अध्ययन में बढ़ते प्रदूषण और दिल के दौरे के बढ़ते मामलों के बीच संबंध पाया गया। वायु प्रदूषण अब दुनियाभर में होने वाली मौतों का तीसरा प्रमुख कारण है।

गंगा प्रदूषण: एनजीटी के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल द्वारा बिहार सरकार पर लगाए गए 50,000 रुपए के जुर्माने पर रोक लगा दी है। एनजीटी ने गंगा प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण से संबंधित मामले में निर्देशों का पालन न करने और ठीक तरह से न्यायाधिकरण की सहायता न करने के लिए बिहार सरकार पर अर्थदंड लगाया था।

ट्राइब्यूनल बिहार में गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों की पानी की गुणवत्ता की समस्या का संज्ञान लिया था। इस मामले में राज्य के अधिकारियों को पानी के सैंपल का परीक्षण करने का आदेश दिया गया था। जहां प्रत्येक सहायक नदी गंगा में शामिल होती है, और हर नदी के बिहार में प्रवेश और निकास के स्थानों पर से सैंपल एकत्र किए जाने थे। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया और उसे कोई रिपोर्ट नहीं दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश के विरुद्ध बिहार सरकार की याचिका पर केंद्र और दूसरे पक्षों से जवाब मांगा है।

प्रदूषण के कारण काठमांडू में उड़ानें हुईं बाधित

प्रदूषण और धुंध की मोटी परत के कारण सोमवार को काठमांडू घाटी में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को ‘बेहद खराब’ स्थिति में पहुंच गया, जिससे त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानें बाधित हुईं

प्रदूषणकारी धुंध के कारण करीब आधा दर्जन उड़ानों को डाइवर्ट करना पड़ा, जिसमें एयर इंडिया की दो उड़ानें भी शामिल थीं। एयरपोर्ट के प्रवक्ता के अनुसार, जज़ीरा एयरवेज, एयर इंडिया और फ्लाई दुबई की उड़ानें खराब विजिबिलिटी के कारण उतरने में असमर्थ रहीं। जज़ीरा एयरवेज और एयर इंडिया की दो उड़ानों को वाराणसी डाइवर्ट किया गया, जबकि फ्लाई दुबई की उड़ान को भैरहवा में गौतम बुद्ध अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ले जाया गया।

अन्य उड़ानों को भी लैंडिंग से पहले देरी का सामना करना पड़ा।

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