महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में खनन के लिए काटे जाएंगे 1.23 लाख पेड़

Editorial Team18 अक्टू॰. 2024
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में खनन के लिए काटे जाएंगे 1.23 लाख पेड़

महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव बोर्ड ने गढ़चिरौली जिले की एटापल्ली और भामरागढ़ तहसीलों में 1,070 हेक्टेयर वन भूमि को खनन के लिए डाइवर्ट करने के तीन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इस परियोजनाओं के लिए लगभग 1.23 लाख पेड़ काटे जाएंगे। 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार, पिछली बैठक के केवल आठ दिन बाद आनन-फानन में 9 अक्टूबर को बोर्ड की स्थायी समिति की छठी बैठक बुलाई गई। इस बैठक में एक बड़ी कंपनी द्वारा एक दिन पहले ही जमा किए गए प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। यह कंपनी सुरजागढ़ में भी लौह अयस्क खनन में शामिल है।

इन प्रस्तावों के तहत दस वन क्षेत्रों में हेमेटाइट और क्वार्टजाइट भंडार की खोज और लौह अयस्क का खनन किया जाना है। यह परियोजनाएं ताडोबा-इंद्रावती बाघ अभयारण्य कॉरिडोर में हैं। हालांकि राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन ने देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा सुझाए गए संरक्षण उपायों के साथ ही इन्हें मंजूरी दी है।

शर्तों में ताडोबा फाउंडेशन को 4 प्रतिशत संरक्षण शुल्क अदा करने के साथ क्षतिपूर्ति के लिए आस-पास के इलाकों में वृक्षारोपण और डब्ल्यूआईआई के वाइल्डलाइफ मिटिगेशन प्लान का पालन करना भी आवश्यक है।

भूमिगत सड़क/रेलवे सुरंगों से पर्यावरण को नुकसान नहीं: वन सलाहकार समिति

केंद्र सरकार की वन सलाहकार समिति के अनुसार वन क्षेत्रों में भूमिगत रोड/रेलवे टनल के लिए खुदाई करने से जमीन के ऊपर पेड़-पौंधों और वनस्पति को कोई नुकसान नहीं होता है इसलिए इन्हें “एनवायरमेंट फ्रेंडली” गतिविधि माना जाना चाहिए। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने एक राज्य सरकार को पत्र लिखकर यह बात कही है, जिसे परिवेश वेबसाइट पर पोस्ट किया गया है। इस पत्र के द्वारा केंद्र ने ‘वन क्षेत्र में सड़क/रेलवे सुरंगों के निर्माण’ को भूमिगत खनन परियोजनाओं के बराबर मानने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि “भूमिगत खनन परियोजनाओं में प्रतिपूरक वनीकरण की शर्त नहीं होती है क्योंकि इनसे जमीन के ऊपर की वनस्पति और वन्य जीवन को कोई नुकसान नहीं होता है।” समिति का कहना है कि पर्यावरण मंत्रालय को इसी तर्ज पर स्पष्ट करना चाहिए कि वन क्षेत्र में सड़क/रेलवे सुरंगों के निर्माण की परियोजनाओं में भी प्रतिपूरक वनीकरण की आवश्यकता न रखी जाए।

संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान संशोधित जैव-विविधता योजना जारी करेगा भारत

भारत ने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडाइवर्सिटी फ्रेमवर्क (केएम-जीबीएफ) के अनुरूप जैव-विविधता के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय योजना में संशोधन किया है

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि संशोधित योजना 21 अक्टूबर से 1 नवंबर तक कैली, कोलंबिया में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जैव-विविधता सम्मेलन (कॉप16) के दौरान जारी की जाएगी। 1992 के कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी (सीबीडी) के तहत सभी देशों को राष्ट्रीय स्तर पर जैव-विविधता के संरक्षण और उपयोग के लिए एक राष्ट्रीय जैव-विविधता रणनीति और कार्य योजना (एनबीएसएपी) बनाना आवश्यक है।

केएम-जीबीएफ का एक प्रमुख लक्ष्य है 2030 तक दुनिया की कम से कम 30% भूमि और महासागरों की रक्षा करना। 2030 तक जंगलों, आर्द्रभूमि और नदियों जैसे क्षतिग्रस्त इकोसिस्टम को बहाल करना भी इसका लक्ष्य है, ताकि वह साफ पानी और हवा प्रदान करना जारी रखें।

यूरोप के कार्बन टैक्स से भारतीय निर्यात होगा प्रभावित: वित्तमंत्री

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) को एकतरफा और मनमाना बताते हुए कहा है कि इसके लागू होने  के बाद भारत के निर्यात को नुकसान होगा।

सीबीएएम वह टैरिफ हैं जो यूरोपीय संघ (ईयू) में आयातित ऐसी वस्तुओं पर लागू होंगे जिनके निर्माण, प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्ट में बहुत अधिक ऊर्जा खर्च होती है। ईयू ने स्टील, सीमेंट और उर्वरक सहित सात कार्बन-इंटेंसिव क्षेत्रों पर 1 जनवरी, 2026 से कार्बन टैक्स लगाने का फैसला किया है।

वित्तमंत्री के कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ से इसको लेकर चिंता व्यक्त की है और सरकार लेनदेन की लागत कम करने के तरीकों पर भी विचार कर रही है। यूरोपीय संघ के इस फैसले से भारतीय निर्यातकों का मुनाफा कम हो सकता है, क्योंकि यूरोप भारत के शीर्ष निर्यात स्थलों में से एक है।

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