भारत ने वर्ष 2025 में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बनाया है। पीवी मैगजीन के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच देश में 37.9 गीगावाट सौर और 6.3 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई। यह अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक इजाफा है।
2024 की तुलना में सौर क्षमता में 54.7 प्रतिशत और पवन ऊर्जा में 85.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 258 गीगावाट पहुंच गई। इसमें सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी सबसे अधिक करीब 53 प्रतिशत है। इसके बाद पवन ऊर्जा, बड़े जलविद्युत, बायो पावर और स्मॉल हाइड्रोपॉवर का स्थान है।
जीआईबी संरक्षण से प्रभावित सौर परियोजनाओं को केंद्र की राहत
केंद्र सरकार ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी के संरक्षण से प्रभावित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान और गुजरात में इन परियोजनाओं में देरी को ‘फोर्स मेज्योर’ (अप्रत्याशित, अनियंत्रित घटनाएं जो अनुबंध दायित्वों को पूरा करने में बाधक होती हैं) माना जाएगा। इससे डेवलपर्स को परियोजनाएं चालू करने की तय समय-सीमा बढ़ाने का मौका मिलेगा।
यह निर्णय दिसंबर 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लिया गया है, जिसमें एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को मंजूरी दी गई थी। समिति ने जीआईबी आवास क्षेत्रों में नई पवन और बड़ी सौर परियोजनाओं पर सख्त सीमाएं लगाने की बात कही थी। साथ ही, बिजली लाइनों को भूमिगत करने और मार्ग बदलने का सुझाव दिया गया था।
भारत में 50% बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट ही आर्थिक रूप से लाभकारी: रिपोर्ट
मेरकॉम इंडिया रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 50 प्रतिशत स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) परियोजनाएं ही आर्थिक रूप से लाभकारी पाई गई हैं। ये परियोजनाएं जुलाई से नवंबर 2025 के बीच नीलामी के जरिए आवंटित की गई थीं।
पीवी मैगजीन में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि अध्ययन में ऊर्जा भंडारण की मौजूदा लागत और नीलामी में लगाई गई बोलियों की तुलना की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, कई परियोजनाओं में लागत, राजस्व और बाजार जोखिमों के कारण मुनाफा सीमित दिखा। इससे संकेत मिलता है कि भारत में बैटरी स्टोरेज सेक्टर को टिकाऊ बनाने के लिए नीतिगत समर्थन और लागत में और कमी की जरूरत है।
चीन ने अमेरिकी सोलर-ग्रेड सिलिकॉन पर एंटी-डंपिंग शुल्क की अवधि बढ़ाई
चीन ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया से आयात होने वाले सोलर-ग्रेड सिलिकॉन पर एंटी-डंपिंग शुल्क को आगे भी जारी रखने का फैसला किया है। पीवी मैगजीन के अनुसार, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 2014 में लगाए गए इन शुल्कों को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। अमेरिकी उत्पादकों पर यह शुल्क 53.3 से 57 प्रतिशत के बीच रहेगा, जबकि दक्षिण कोरियाई कंपनियों पर 2.4 से 48.7 प्रतिशत तक शुल्क लागू होगा। चीन का कहना है कि इन आयातों से घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंच रहा था। इस फैसले का वैश्विक सौर आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है, क्योंकि सिलिकॉन सौर पैनलों का एक अहम कच्चा माल है और चीन इस क्षेत्र में बड़ा उत्पादक है।
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