भारत के कई हिस्सों में बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों के आसपास की मिट्टी में सीसा (लेड) का खतरनाक स्तर पाया गया है, जो लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। पर्यावरण अनुसंधान संस्था टॉक्सिक्स लिंक की ओर से किए गए अध्ययन ‘सॉइल्ड विथ लेड: फ्रॉम बैटरी रीसाइक्लिंग‘ में यह खुलासा हुआ है।
अध्ययन के तहत दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों की मिट्टी से 23 नमूने लिए गए। इनमें से कई स्थान रिहायशी क्षेत्रों और स्कूलों के पास भी थे। सभी नमूनों में 100 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) से लेकर 43,800 पीपीएम तक सीसे का स्तर पाया गया, जो व्यापक प्रदूषण की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 52 प्रतिशत नमूनों में सीसे की मात्रा 5,000 पीपीएम की सीमा से अधिक थी। सीसे की इतनी मात्रा जिस स्थान पर हो उसे खतरनाक प्रदूषित स्थल माना जाता है। वहीं 31 प्रतिशत नमूने औद्योगिक क्षेत्रों के तय मानकों से भी ऊपर पाए गए।
चौंकाने वाली बात यह रही कि अधिकृत (फॉर्मल) रीसाइक्लिंग इकाइयों के आसपास औसतन ज्यादा सीसा पाया गया, जबकि अनधिकृत इकाइयों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सीसा एक अत्यंत विषैला धातु है, जो हवा, पानी और मिट्टी के जरिए मानव शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
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