भारत इस समय पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते गहरे ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा कि सरकार कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए सभी संभावित स्रोतों से खरीद कर रही है और आने वाले दिनों में भी यह प्रयास जारी रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन के रणनीतिक तेल भंडार तैयार किए गए हैं, जबकि अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन क्षमता बढ़ाने का काम जारी है। ऊर्जा परिवहन को मजबूत करने के लिए सरकार ने ₹70,000 करोड़ का जहाज निर्माण कार्यक्रम भी शुरू किया है।
केंद्र के दावों के बावजूद पंजाब में एलपीजी संकट गहराया
पंजाब के चंडीगढ़ स्थित एलपीजी वितरकों का कहना है कि केंद्र और तेल कंपनियों के पर्याप्त आपूर्ति के दावों के बावजूद गैस की भारी कमी बनी हुई है। वितरकों ने लंबित बुकिंग को पूरा करने के लिए आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है।
फेडरेशन के अध्यक्ष के अनुसार, अचानक कीमतों में वृद्धि, बुकिंग पर अंतराल की पाबंदी और अस्थायी रूप से बुकिंग चैनलों के बंद होने से उपभोक्ताओं में घबराहट बढ़ी है और लंबित बुकिंग में तेज उछाल आया है।
एलपीजी संकट ने ‘स्वच्छ रसोई’ रणनीति की कमजोरियां उजागर कीं
एलपीजी की कमी के चलते निम्न आय वर्ग, छात्रावासों और छोटे भोजनालयों में फिर से लकड़ी के चूल्हों का उपयोग बढ़ने लगा है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के बाद आपूर्ति बाधित होने से देरी और अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
भारत की लगभग 60% घरेलू एलपीजी खपत आयात पर निर्भर है, जिसमें से 90% पश्चिम एशिया से आता है।
दिल्ली में जलावन लकड़ी की कीमत ₹10 प्रति किलो से बढ़कर ₹20 प्रति किलो हो गई है। वहीं, काले बाज़ार में गैस सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। देश में करीब 33.2 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी कनेक्शन हैं, जिनमें 10.4 करोड़ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत हैं। शहरी क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
एलपीजी संकट के बीच बायोगैस और वैकल्पिक ईंधनों की ओर रुख
केरल, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्य एलपीजी की कमी से निपटने के लिए बायोगैस और अन्य वैकल्पिक ईंधनों को तेजी से अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
मुंबई की कई संस्थाओं ने बताया कि उनके वेस्ट-टू-गैस प्लांट आपूर्ति की अनिश्चितता को संभालने में मदद कर रहे हैं। वहीं, ग्रामीण गुजरात में समुदाय स्थानीय नवीकरणीय ऊर्जा समाधान पर प्रयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आयातित ईंधनों पर अत्यधिक निर्भरता भारत को वैश्विक झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
रिलायंस ने अमेरिकी छूट के बाद ईरानी तेल खरीदा
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में दी गई छूट के बाद ईरान से 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद की है। हाल के वर्षों में ईरानी तेल मुख्य रूप से चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियों द्वारा खरीदा जाता रहा है और अक्सर इसे अन्य देशों के नाम से रीब्रांड किया जाता है।
यह सौदा मई 2019 के बाद भारत द्वारा ईरानी तेल का पहला आयात है, जब अमेरिका ने तेहरान पर प्रतिबंध दोबारा लागू किए थे।
जापान ने घरेलू मांग पूरी करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा तेल भंडार जारी किया
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने घोषणा की है कि 8 करोड़ बैरल कच्चा तेल रिफाइनरियों को उपलब्ध कराया जाएगा, जो देश की 45 दिनों की मांग के बराबर है। यह राष्ट्रीय भंडार से अब तक की सबसे बड़ी रिलीज़ है।
सरकार ने ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सब्सिडी भी शुरू की है, जिससे गैस की कीमत लगभग ¥170 (करीब $1.10) प्रति लीटर पर सीमित की जा सके। हाल ही में खुदरा कीमत ₹190.8 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। प्रारंभिक सब्सिडी की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी।
दो साल पहले, हमने अंग्रेजी में एक डिजिटल समाचार पत्र शुरू किया जो पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर रिपोर्ट करता है। लोगों ने हमारे काम की सराहना की और हमें प्रोत्साहित किया। इस प्रोत्साहन ने हमें एक नए समाचार पत्र को शुरू करने के लिए प्रेरित किया है जो हिंदी भाषा पर केंद्रित है। हम अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद नहीं करते हैं, हम अपनी कहानियां हिंदी में लिखते हैं।
कार्बनकॉपी हिंदी में आपका स्वागत है।
आपको यह भी पसंद आ सकता हैं
-
प्रतिबंधों में ढील फिर भी तेल महंगा: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछली
-
ईरान हमले से बढ़ा तनाव, वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहराया संकट
-
मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों पर 71,395 करोड़ रुपए का घाटा, देश में सबसे बड़ी वित्तीय बोझ बनीं
-
रूस पर निर्भरता घटाने के लिए यूरोपीय संघ एलएनजी आयात बढ़ाएगा
-
अमेरिका ने शुरू की वेनेज़ुएला के तेल की बिक्री
