केंद्र सरकार ने पाम ऑइल क्षेत्र में 11,000 करोड़ के निवेश को मंज़ूरी दी

Editorial Team27 अग॰. 2021
ताड़ की खेती: पाम ऑइल आर्थिक मुनाफे के हिसाब से तो अच्छा है लेकिन जैव विविधता और पर्यावरण के लिये इसकी खेती एक चुनौती है। – Pixabay

ताड़ की खेती: पाम ऑइल आर्थिक मुनाफे के हिसाब से तो अच्छा है लेकिन जैव विविधता और पर्यावरण के लिये इसकी खेती एक चुनौती है। – Pixabay


केंद्र सरकार ने पाम ऑइल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिये 11,040 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को मंज़ूरी दी है। भारत अभी ज़्यादातर पाम ऑइल इंडोनेशिया और मलेशिया से मंगाता है। कैबिनेट ने पिछले हफ्ते इस कार्ययोजना के प्रस्ताव को पास किया। अब नेशनल मिशन ऑन एडिबल आइल्स-आइल-पाम्स (NMEOOP) अंडमान और निकोबार द्वीप समूहों समेत उत्तर-पूर्व के राज्यों में इसके उत्पादन पर ज़ोर देगा।  जहां एक ओर पाम ऑइल एक मुनाफा वाली फसल है वहीं  इसकी खेती पर्यावरण के लिये एक चुनौती है।  इसके लिये बहुत बड़े इलाके के जंगल काटे जाते हैं और अगर सस्टेनेबल तरीके से इसे न उगाया गया तो यह पारिस्थितिकी यानी इकोलॉजी के लिये बड़ा ख़तरा है। 

रेफ्रिजेरेशन में काम आने वाले एचएफसी को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करेगा भारत 

रेफ्रिजेरेशन में काम आने वाले एचएफसी (हाइड्रोफ्लोरोकार्बन) ग्लोबल वॉर्मिंग का बड़ा कारण हैं। एचएफसी असल में रसायनों का समूह है जो कि एयर कंडिशनिंग और रेफ्रिजेरेशन जैसे उद्योगों में इस्तेमाल होता है और यह ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ाने में कार्बन डाइ ऑक्साइड से कहीं अधिक ख़तरनाक हैं। साल 2016 में ओज़ोन गैस बढ़ाने वाले तत्वों को रोकने से जुड़े मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉट में एक संशोधन किया गया था जिसमें हाइड्रोफ्लोरोकार्बन का प्रयोग धीरे-धीरे खत्म करने का फैसला किया गया। इसे संशोधन को किगाली संशोधन कहा जाता है। कैबिनेट ने इसे पिछले बुधवार को प्रभावी कर दिया।  इसके तहत दुनिया में एचएफसी का प्रयोग 85% करने का लक्ष्य है। विकसित देशों को यह लक्ष्य 2036 तक हासिल करना है जबकि कई अन्य देशों के लिये 2045 की डेडलाइन है। भारत का एक्शन प्लान 2023 तक तैयार हो जायेगा और उसने यह लक्ष्य हासिल करने के लिये 2047 तक की डेडलाइन रखी है। 

कोयला, रेल समेत कई संपत्तियों के मौद्रिकरण से सरकार को 6 लाख करोड़ जुटाने की उम्मीद 

केंद्र सरकार ने अगले चार साल में करीब ₹ 6 लाख करोड़ ($ 8100 करोड़) जुटाने के इरादे से संपत्तियों के मौद्रिकरण (मोनिटाइज़ेशन) की योजना बनाई है। इसके तहत रेल, कोयला और हवाई अड्डों का मौद्रिकरण किया जायेगा। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि मौद्रिकरण के लिये संपत्तियों की पहचान कर ली गई है। इसमें 15 रेलवे स्टेडियमों और 160 कोयला खदानों को शामिल किया गया है। सरकार ने इस काम को अंजाम देने के लिये राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन का उद्घाटन किया। कांत ने कहा कि 26,700 किलोमीटर हाइवे के मौद्रिकरण से 1.65 लाख करोड़ रूपया आयेगा।  इसी तरह ट्रांसमिशन लाइनों से सरकार 42,500 करोड़ जुटायेगी। केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार अपनी संपत्तियों को बेच नहीं रही है बल्कि उनका अधिकतम लाभ उठा रही है। इनका मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा। 

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