ईवी और सोलर बैटरियों से चांदी के दामों में उछाल

वर्ष 2025 में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है, और इसके पीछे केवल पारंपरिक मांग ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और सोलर ऊर्जा तकनीक का भी बड़ा हाथ है। जैसा कि पर्यावरण-अनुकूल टेक्नोलॉजी की ओर दुनिया तेजी से बढ़ रही है, चांदी अब सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि इसे ऊर्जा संक्रमण की महत्वपूर्ण धातु के रूप में देखा जा रहा है। इस बदलाव ने चांदी की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक धकेल दिया है, खासकर जब सप्लाई उसके बढ़ते मांग का साथ नहीं दे पा रही है।

ईवी और सोलर पैनलों में चांदी का उपयोग बढ़ा है क्योंकि यह अत्यधिक बिजली चालकता और थर्मल गुणों के कारण इन तकनीकों के लिए अनिवार्य माना जाता है। हर EV और सोलर पैनल में इस्तेमाल होने वाली चांदी की मात्रा के कारण औद्योगिक मांग वर्ष 2025 में बहुत तेज़ी से बढ़ी है, जिससे बाजार में चांदी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। इस समय अधिकांश चांदी ताम्बे, सीसा या जस्ता खानों के साथ एक सह-उत्पाद के रूप में निकलती है, इसलिए मांग बढ़ने के बावजूद उत्पादन को जल्दी बढ़ाना कठिन साबित हो रहा है। 

दूसरी तरफ, पारंपरिक गहनों और निवेश के लिए भी चांदी की मांग स्थिर बनी हुई है, जिससे कुल मांग और भी ऊँची हो गई है। निवेशकों ने सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में चांदी की तरफ रुख किया है, खासकर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच, जिससे कीमतों में और मजबूती आई है।

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक ईवी, सोलर और अन्य हरित तकनीकों की मांग ऐसे उच्च स्तर पर बनी रहेगी और उत्पादन विस्तार सप्लाई को नहीं पकड़ पाएगा, चांदी की कीमतें उच्च स्तर पर स्थिर या और बढ़ सकती हैं। मौजूदा हाल में चांदी अब सिर्फ पारंपरिक धातु नहीं बल्कि ऊर्जा संक्रमण और इलेक्ट्रिक भविष्य की एक रणनीतिक सामग्री बन रही है। 

देशभर में 27,000 से अधिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित, केंद्र सरकार का ‘ग्रीन मोबिलिटी’ मिशन तेज़

भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2025 में 27,000 से अधिक नए चार्जिंग स्टेशन पेट्रोल पंपों पर लगाए गए हैं, जिससे चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करते हुए देशभर में ईवी अपनाने की प्रक्रिया को गति मिली है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की वर्षांत रिपोर्ट के अनुसार, फेम-II योजना के तहत 8,932 चार्जिंग स्टेशन खुदरा ईंधन आउटलेट्स पर स्थापित किए गए। वहीं तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने अपने संसाधनों से 18,500 से अधिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए, जिससे कुल संख्या 27,432 हो गई। यह चार्जिंग नेटवर्क अब देश के प्रमुख शहरों, हाइवे कॉरिडोर और ग्रामीण इलाकों तक फैला है।

मंत्रालय ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां 2024-25 से 2028-29 के बीच 4,000 ‘एनर्जी स्टेशन’ स्थापित करेंगी, जहां पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल-डीजल) के साथ बायोफ्यूल, सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक चार्जिंग सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। नवंबर 2025 तक ऐसे 1,064 ऊर्जा स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं।

बड़ी ट्रकों के लिए भी सरकार ने ‘अपना घर परियोजना’ के तहत 500 से अधिक विश्राम स्थल बनाए हैं, जिससे सड़क सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार दोनों को बल मिला है।

रिपोर्ट के अनुसार, एथनॉल मिश्रण दर 19.24% तक पहुंच गई है, जिससे अब तक 1.55 लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बचत और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान, स्वच्छ भारत मिशन और डोर-टू-डोर फ्यूल डिलीवरी जैसी पहलों ने पेट्रोलियम क्षेत्र में पारदर्शिता और सुविधा को और मजबूत किया है।

ईवी पर टैक्स छूट दिसंबर 2027 तक जारी रहेगी: तमिलनाडु सरकार

तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर मोटर वाहन कर में छूट दिसंबर 2027 तक जारी रहेगी। राज्य के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने लिया है, जिससे ईवी एडॉप्शन, उनकी किफायती कीमत और बड़े पैमाने पर निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु मोटर वाहन कर अधिनियम, 1974 के तहत बैटरी चालित सभी परिवहन और गैर-परिवहन वाहनों को 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2027 तक कर से पूरी तरह छूट दी गई है। मंत्री ने कहा कि 2025 में राज्य में ईवी अपनाने की दर 7.8 प्रतिशत रही, लेकिन चार्जिंग ढांचे और हरित आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करने की जरूरत है।

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