अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने भारतीय सौर उत्पादों पर 126 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। यह कदम प्रारंभिक एंटी-सब्सिडी जांच के बाद उठाया गया। एंटी-सब्सिडी जांच में देखा जाता है कि क्या किसी कंपनी को सरकार से अनुचित वित्तीय मदद मिली है। अडानी ग्रुप की दो कंपनियां – मुंद्रा सोलर एनर्जी और मुंद्रा सोलर पीवी – जांच में शामिल नहीं हुईं। उन्हें अनिवार्य उत्तरदाता माना गया था। सहयोग न करने पर ‘एडवर्स फैक्ट्स अवेलेबल’ नियम लागू किया गया। इसका मतलब है कि जांच एजेंसी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कड़ी सजा तय करती है। इस फैसले से भारतीय सौर निर्यात पर बड़ा असर पड़ सकता है।
फ्लोटिंग सोलर नीति पर केंद्र ने मांगे राज्यों के सुझाव
केंद्र सरकार ने फ्लोटिंग सोलर नीति के मसौदे पर हितधारकों से चर्चा की है। फ्लोटिंग सोलर की संभावित क्षमता की आकलन रिपोर्ट नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोलर एनर्जी ने पेश की है, जबकि नीति आईआईटी-रुड़की ने बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार सौर परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी के कारण फ्लोटिंग सोलर को विकल्प माना जा रहा है। अभी तक भारत में लगभग 700 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं शुरू हुई हैं। सरकार ने राज्यों से जल, वन, कृषि और बिजली विभागों से राय लेकर सुझाव भेजने को कहा है।
मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक बिजली उत्पादन में 26% होगी नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी
रेटिंग एजेंसी इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के अंत तक कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत हो जाएगी। 2026 के पहले नौ महीनों में 49 गीगावाट नई क्षमता जुड़ी। यह 2030 तक 500 गीगावाट लक्ष्य की दिशा में प्रगति दिखाता है। इस अवधि में बिजली उत्पादन वृद्धि का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आया। इससे स्वच्छ ऊर्जा का योगदान तेजी से बढ़ रहा है।
2025 में बैटरी स्टोरेज की लागत रिकॉर्ड निचले स्तर पर
ब्लूमबर्गएनईएफ की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं की लागत रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। चार घंटे की बैटरी परियोजना की वैश्विक औसत लागत 27 प्रतिशत घटकर 78 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा रही। बैटरी पैक सस्ते होने और तकनीक बेहतर होने से लागत घटी है। इससे सौर ऊर्जा के साथ बैटरी जोड़ने वाली परियोजनाएं बढ़ी हैं। वहीं सौर और पवन परियोजनाओं की लागत में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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