Vol 1, February 2026 | जैव-विविधता की क्षति: कंपनियों के लिए खतरे की घंटी

झारखंड में हाथी-मानव संघर्ष: 10 दिनों में 11 मौतें, ग्रामीणों में दहशत

झारखंड के बोकारो और हजारीबाग जिलों में हाथियों के झुंड ने पिछले 10 दिनों में कम से कम 11 लोगों की जान ले ली, जिससे इलाके में भय और चिंता फैल गई है। यह वही झुंड माना जा रहा है जिसने बोकारो के बरकीपुनु गांव में एक ही परिवार के तीन बुजुर्गों को कुचल दिया था और बाद में गैंगपुर गांव में दो और परिवारिक सदस्यों को मौत के घाट उतारा था।

लीक से भटककर चल रहे इस पांच हाथियों के समूह ने मध्यरात्रि के समय हजारीबाग के चुरचू प्रखंड के गोंदवार गांव में कच्चे घरों में घुसकर छतों पर सो रहे लोगों पर हमला किया, जिसमें छह लोग – बच्चों समेत – मारे गए। वन विभाग को फ़िलहाल झुंड की गर्दन और व्यवहार समझने में कठिनाई हो रही है, जबकि प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में लोगों को रात में घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी है और उन्हें जंगल की ओर वापस ढकेलने के उपाय कर रहा है। 

हाथियों की अचानक और हिंसक गतिविधियों ने स्थानीय आबादी की सुरक्षा और वन्यजीव संघर्ष समाधान पर नई चुनौती खड़ी कर दी है। 

जुलाई की बारिश और बांध संचालन में गड़बड़ी हिमाचल और पंजाब में 2023 की भयावह बाढ़ का कारण, अध्ययन में खुलासा

एक नए अध्ययन में पाया गया है कि अगस्त 2023 में पंजाब में आई बाढ़, जिसमें 50 लोगों की मौत हुई थी, बाढ़ के दौरान हुई बारिश के कारण नहीं बल्कि उससे एक महीने पहले हुई असाधारण रूप से अधिक वर्षा के कारण आई थी। मोंगाबे की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी-मंडी के अध्ययन में यह सामने आया कि पोंग बांध के संचालन में पूर्वानुमान की कमी ने इस घातक बाढ़ को और गंभीर बना दिया।

शोधकर्ताओं ने जुलाई और अगस्त 2023 में पंजाब में आई बाढ़ की घटनाओं की तुलना की। अगस्त में औसत से कम वर्षा होने के बावजूद बाढ़ बेहद गंभीर हो गई और 11,927 गांव जलमग्न हो गए। शोधकर्ताओं ने कहा, “हमने देखा कि जुलाई में जब हिमाचल में भीषण बाढ़ आई थी, तब पंजाब के निचले इलाकों में उसका असर उतना नहीं पड़ा। इसके विपरीत अगस्त में स्थिति उलट रही, जिसकी जांच जरूरी थी।”

अध्ययन के अनुसार, ब्यास नदी पर स्थित मिट्टी से भरा भंडारण और जलविद्युत बांध पोंग बांध ने जलाशय को अधिकतम स्तर के करीब भरने दिया और फिर अचानक पानी की निकासी बढ़ा दी, जिससे आपदा और भी गंभीर हो गई।

वैज्ञानिकों ने पहली बार पृथ्वी के मेंटल की गहराइयों में आने वाले दुर्लभ भूकंपों का वैश्विक मानचित्र तैयार किया

शोधकर्ताओं ने पहली बार महाद्वीपीय मेंटल में आने वाले दुर्लभ भूकंपों का वैश्विक मानचित्र तैयार किया है। डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, साइंस पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि ये भूकंप विश्वभर में होते हैं, लेकिन हिमालय और बेरिंग जलडमरूमध्य के नीचे अधिक केंद्रित हैं।

शिकी (एक्सेल) वांग और साइमन क्लेम्परर के नेतृत्व में किए गए इस शोध में बताया गया कि जहां भूपर्पटी (क्रस्ट) में भूकंप आमतौर पर 10 से 29 किलोमीटर की गहराई पर उत्पन्न होते हैं, वहीं मेंटल भूकंप मोहोरोविसिक असंततता (मोहो) – जो क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा है – से 80 किलोमीटर से भी अधिक गहराई पर उत्पन्न हो सकते हैं।

इनकी पहचान के लिए शोध टीम ने Sn तरंगों, जो ऊपरी मेंटल से गुजरती हैं, और Lg तरंगों, जो क्रस्ट से होकर गुजरती हैं, की तुलना की। 1990 के बाद दर्ज 46,000 से अधिक भूकंपों का विश्लेषण करने पर 459 पुष्ट महाद्वीपीय मेंटल भूकंपों की पहचान की गई। इन तरंगों की सापेक्ष शक्ति के आधार पर वैज्ञानिक यह निर्धारित कर सकते हैं कि भूकंप क्रस्ट में उत्पन्न हुआ या मेंटल में। वांग ने कहा, “हमारा तरीका पूरी तरह से गेम-चेंजर है, क्योंकि अब केवल भूकंपीय तरंगों के आधार पर मेंटल भूकंप की पहचान की जा सकती है।”

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत ‘संतुलित तरीके’ से कृषि आयात खोलने का फैसला, किसान संगठनों में चिंता

भारत ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत कृषि आयात को ‘संतुलित (कैलिब्रेटेड) तरीके’ से खोलने का निर्णय लिया है। हालांकि किसान संगठनों ने मक्का, ज्वार, सोयाबीन और पशु चारे में इस्तेमाल होने वाली अन्य फसलों की कीमतों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई है।

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, किसान समूहों का कहना है कि सोयाबीन तेल के आयात पर शुल्क में कमी से घरेलू सोयाबीन कीमतें और गिर सकती हैं। पिछले वर्ष से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और राजस्थान के सोयाबीन किसान लंबे मूल्य संकट का सामना कर रहे हैं।

एएसएचए-किसान स्वराज के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में सोयाबीन का अखिल भारतीय औसत बाजार भाव 3,942 रुपए रहा, जो 5,328 रुपए के एमएसपी से लगभग 26% कम है। वहीं मक्का की कीमतें भी एमएसपी से करीब 24% नीचे रहीं। संगठन ने चेतावनी दी कि यह समझौता किसानों की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

जैव-विविधता बहाली पर कदम नहीं उठाए तो बड़े नुकसान में होंगी कंपनियां: रिपोर्ट

इंटरगवर्मेंटल साइंस-पॉलिसी प्लेटफॉर्म ऑन बायोडाइवर्सिटी एंड इकोसिस्टम सर्विसेज (आईपीबीईएस) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछली दो शताब्दियों में वैश्विक अर्थव्यवस्था सौ गुना से अधिक बढ़ी है, जिसकी कीमत जैव-विविधता को भारी नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रकृति का यह नुकसान अब अर्थव्यवस्था, वित्तीय स्थिरता और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन गया है।

रिपोर्ट तीन वर्षों में 35 देशों के 79 विशेषज्ञों ने तैयार की। इसमें कहा गया है कि जैव-विविधता को बचाने में कंपनियों की अहम भूमिका है, लेकिन उन्हें पर्याप्त जानकारी, प्रोत्साहन और सहयोग नहीं मिलता। 2023 में लगभग 7.3 ट्रिलियन डॉलर ऐसे कामों में खर्च हुए जिनसे प्रकृति को नुकसान हुआ, जबकि संरक्षण पर सिर्फ 220 अरब डॉलर खर्च हुए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों को अभी से ठोस लक्ष्य तय कर प्रकृति संरक्षण को अपनी रणनीति में शामिल करना चाहिए।

मेघालय में अवैध रैट-होल खदान विस्फोट में 27 मजदूरों की मौत

मेघालय के ईस्ट जयन्तिया हिल्स जिले के माइनसिंगत गांव में अवैध रैट-होल कोयला खदान में हुए विस्फोट में 27 मजदूरों की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। विस्फोट पांच फरवरी को हुआ, जिसके बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने कई दिनों तक बचाव अभियान चलाकर शव निकाले। मृतकों में असम और नेपाल के श्रमिक शामिल हैं। मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। रैट-होल खनन पर 2014 में नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने प्रतिबंध लगाया था, फिर भी अवैध खनन जारी है। इससे पहले भी क्षेत्र में ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिन पर अदालतें सख्त टिप्पणी कर चुकी हैं।

रैट-होल खनन दुनिया की सबसे खतरनाक खनन पद्धतियों में गिनी जाती है। इसमें मजदूर बेहद संकरी, हाथ से खोदी गई सुरंगों में बिना पर्याप्त वेंटिलेशन, सुरक्षा उपकरण या गैस जांच के उतरते हैं। सुरंगें अक्सर पानी से भरी पुरानी खदानों या मीथेन गैस पॉकेट्स से जुड़ी होती हैं, जहां जरा सी चिंगारी भी विस्फोट का कारण बन सकती है। ढांचागत सहारे के अभाव में धंसान और बाढ़ का खतरा लगातार बना रहता है। इसके अलावा, अम्लीय खदान जल निकासी से नदियां प्रदूषित होती हैं, जमीन बंजर होती है और आसपास के समुदायों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव पड़ते हैं।

नेट ज़ीरो लक्ष्य के लिए बड़े ऊर्जा सुधार जरूरी: नीति आयोग

नीति आयोग की नई रिपोर्ट ‘सिनारियोज़ टुवर्ड्स विकसित भारत एंड नेट जीरो’ के अनुसार भारत 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल कर सकता है। रिपोर्ट में दो परिदृश्य बताए गए हैं — वर्तमान नीति और नेट ज़ीरो। नेट ज़ीरो मार्ग में बिजली अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगी और 2070 तक नवीकरणीय व परमाणु ऊर्जा का वर्चस्व होगा। इसके लिए 2070 तक लगभग 22.7 ट्रिलियन डॉलर निवेश की जरूरत होगी। भूमि, पानी, खनिज और वित्त बड़ी चुनौतियां हैं। रिपोर्ट ने ऊर्जा दक्षता, ग्रीन फाइनेंस, संस्थागत सुधार और मिशन मोड में काम करने पर जोर दिया है, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकें।

सड़कों की धूल नियंत्रण पर खर्च हुए 7,094 करोड़ रुपए, लोकसभा में खुलासा

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि देश भर के शहरी स्थानीय निकायों (अर्बन लोकल बॉडीज़) ने सड़क पर धूल को नियंत्रित करने के लिए कुल 7,094.39 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह जानकारी मंत्रालय ने 2 फरवरी को सदन में दी, जिसमें कहा गया कि यह धन नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के अंतर्गत सड़कों पर धूल और वायु गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर लगाया गया है।

130 शहरों के बीच 48 मिलियन-प्लस आबादी वाले शहरी क्षेत्रों को पंद्रहवें वित्त आयोग के ‘मिलियन-प्लस सिटी चैलेंज फंड’ के तहत सहायता मिली है, जबकि शेष 82 शहरों को प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत वित्त पोषण हुआ है।

सरकार ने कहा कि एनसीएपी के तहत सड़क की धूल को कम करने के लिए किए गए उपायों – जैसे मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण – ने कई शहरों में पीएम10 स्तर में सुधार लाने में मदद की है। 

प्रदूषण से बढ़ता बलगम फेफड़ों के लिए खतरा: अध्ययन

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बॉम्बे के एक अध्ययन में पाया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण शरीर में अत्यधिक बलगम बनने से फेफड़ों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है। शोध के अनुसार, सामान्यतः बलगम बाहरी कणों को फंसाकर श्वसन तंत्र को सुरक्षा देता है, लेकिन प्रदूषण के कारण जब इसकी मात्रा बहुत बढ़ जाती है तो यह समान रूप से फैलने के बजाय संकरे उभार बना लेता है। इससे श्वासनली की दीवारों के कई हिस्से खुले रह जाते हैं, जहां सूक्ष्म कालिख कण आसानी से जमा हो सकते हैं। अध्ययन में बताया गया कि इससे एलर्जी और अस्थमा के तेज हमलों का खतरा बढ़ता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि महानगरों में बढ़ते प्रदूषण के बीच यह निष्कर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकेत है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन बजट में कटौती, सीएक्यूएम आवंटन घटा

केंद्र सरकार ने 2026-27 के बजट में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आवंटन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का कुल बजट 3,759.46 करोड़ रुपए रहा, जो 2025-26 के बजट अनुमान से 10 प्रतिशत अधिक है। हालांकि मंत्रालय के तहत काम करने वाले वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को 35.26 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले बजट अनुमान 38.98 करोड़ रुपए से कम हैं। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  को 123 करोड़ रुपए मिले, जो पिछले अनुमान से कम लेकिन संशोधित अनुमान से अधिक हैं।

मशीनों से सड़क की सफाई के लिए सीएक्यूएम ने जारी किए नए मानक

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सफाई मशीनों के उपयोग संबंधी नए मानक जारी किए हैं। आयोग ने कहा कि सड़क की धूल पीएम10 का प्रमुख स्रोत है और शुष्क मौसम में पीएम2.5 में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। अधिसूचना के अनुसार, मशीनों की तैनाती सड़क की चौड़ाई के अनुसार की जाएगी और उनमें प्रभावी धूल निस्पंदन प्रणाली अनिवार्य होगी। नए बेड़े में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक मशीनें शामिल की जाएंगी, जो कम से कम आठ घंटे काम कर सकें। सफाई का दिन और समय पहले से सार्वजनिक करना भी जरूरी होगा।

भारत ने 2025 में जोड़ी रिकॉर्ड सौर क्षमता

भारत में वर्ष 2025 के दौरान सौर ऊर्जा क्षेत्र में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। देश ने इस साल 36.6 गीगावॉट नई सौर क्षमता स्थापित की, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है। यह आंकड़ा 2024 में जोड़ी गई 25.6 गीगावॉट क्षमता की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी मेरकॉम इंडिया की ‘क्यू4 और वार्षिक 2025 इंडिया सोलर मार्केट अपडेट’ रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार कुल नई क्षमता में से करीब 81 प्रतिशत बड़े पैमाने की परियोजनाओं से आई, जिनमें ओपन एक्सेस (ऑफ-साइट वाणिज्यिक एवं औद्योगिक) परियोजनाएं भी शामिल हैं, जबकि रूफटॉप सोलर की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत रही। राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र बड़े सौर संयंत्रों की स्थापना में अग्रणी रहे।

भारत ने 10 महीनों में रिकॉर्ड बिजली क्षमता जोड़ी, बड़ा हिस्सा अक्षय ऊर्जा का

देश में मौजूदा वित्त वर्ष में 31 जनवरी तक रिकॉर्ड 52,537 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। इसमें 39,657 मेगावाट क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी है, जिसमें 34,955 मेगावाट सौर और 4,613 मेगावाट पवन ऊर्जा शामिल हैं। यह एक वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार देश की कुल स्थापित क्षमता 5,20,510.95 मेगावाट हो गई है, जिसमें गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी 2,71,969.33 मेगावाट है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता और 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य की प्रतिबद्धता दोहराई।

सौर ऊर्जा बजट में 32% की भारी बढ़ोतरी: अब 30,539 करोड़ रुपए का आवंटन

केंद्र सरकार ने इस साल सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए बजट आवंटन में बड़ी वृद्धि की है। सौर क्षेत्र के लिए बजट पिछले वर्ष (2025) के 24,200 करोड़ रुपए (~$2.64 बिलियन) से बढ़ाकर इस वर्ष 30,539.36 करोड़ रुपए (~$3.33 बिलियन) कर दिया गया है।

बजट 2026 में सौर ऊर्जा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के फंड में विस्तार किया गया है।

पीएम कुसुम: किसानों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले इस कार्यक्रम का परिव्यय पिछले साल के 2,600 करोड़ रुपए (~$283.57 मिलियन) से बढ़ाकर अब 5,000 करोड़ रुपए (~$545.33 मिलियन) कर दिया गया है।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना: बजट में इस फ्लैगशिप योजना का दबदबा बरकरार है। मेरकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, इसका खर्च 20,000 करोड़ रुपए (~$2.18 बिलियन) से बढ़ाकर 22,000 करोड़ रुपए (~$2.39 बिलियन) करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दिया गया है। इकोनॉमिक टाइम्स (ईटी) की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 30,539.36 करोड़ रुपए के परिव्यय में से सोलर पावर ग्रिड के लिए 1,775 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। पिछले आवंटन (1,000 करोड़ रुपए) की तुलना में यह 77.5% की जबरदस्त वृद्धि को दर्शाता है, जो भविष्य में ग्रिड की मजबूती पर सरकार के फोकस को स्पष्ट करता है।

एएलएमएम सूची-II में 3 गीगावॉट सौर सेल क्षमता और जुड़ी, कुल क्षमता 26 गीगावॉट

केंद्र सरकार ने सौर सेल के लिए अनुमोदित मॉडलों और निर्माताओं की सूची (एएलएमएम) की दूसरी श्रेणी में चौथा संशोधन जारी किया है। इस संशोधन के साथ कुल सूचीबद्ध विनिर्माण क्षमता बढ़कर 26 गीगावॉट हो गई है। ताजा संशोधन में 3 गीगावॉट से अधिक नई सौर सेल निर्माण क्षमता जोड़ी गई है।

इस नीति का उद्देश्य सौर उत्पादन के सभी चरणों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। संशोधित सूची में प्रीमियर एनर्जीज़ और अडानी समूह जैसे घरेलू निर्माताओं को अतिरिक्त सेल मॉडलों के लिए मंजूरी मिली है। एवरवोल्ट सोलर टेक्नोलॉजी को पहली बार सूची में शामिल किया गया है। कंपनी की आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में 1,074 मेगावॉट क्षमता की इकाई है, जहां उच्च दक्षता वाले बाइफेशियल मोनोक्रिस्टलाइन पीईआरसी सेल बनाए जाते हैं।

भारत ने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रा में तेज़ी से बढ़ाया कदम: 72,000 फास्ट चार्जर लक्ष्य घोषित

भारत इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए बड़ा लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, जिसमें 72,000 फास्ट चार्जरों की तैनाती शामिल है, जिससे ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश तेज़ होगी। यह जानकारी भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) के अतिरिक्त सचिव हनीफ़ कुरैशी ने एसआईएएम (SIAM) 5वीं ग्लोबल इलेक्ट्रीफिकेशन मोबिलिटी समिट में दी। केंद्र सरकार ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं और पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत कई राज्यों, तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) और सार्वजनिक उपक्रमों से चार्जर नेटवर्क के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। 

कुरैशी ने कहा कि राज्यों को क्रियान्वयन के तरीकों का चयन अपनी मर्जी से करने की आज़ादी है, लेकिन सबसे कम लागत पर उपभोक्ताओं को सुविधा उपलब्ध कराने पर ज़ोर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले यह चिंता थी कि वाहनों और चार्जरों के बीच संतुलन नहीं बन पाएगा, लेकिन अब यह समस्या हल हो चुकी है। सरकार का यह कदम ईवी अपनाने में रेंज चिंता को कम करने और देशभर में चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।

चीन, अमेरिका में मंदी से वैश्विक स्तर पर ईवी बिक्री में गिरावट

दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री जनवरी में 3 प्रतिशत घट गई। कंसल्टेंसी बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार चीन में खरीद टैक्स और सब्सिडी घटने तथा अमेरिका में नीतिगत बदलावों से मांग कमजोर हुई। जनवरी में वैश्विक ईवी पंजीकरण करीब 12 लाख रहे। चीन में बिक्री 20 प्रतिशत घटकर दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि उत्तरी अमेरिका में 33 प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई। यूरोप में 24 प्रतिशत वृद्धि हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त पर्यावरण नियमों और बाजार की अनिश्चितता के बीच कई खरीदार अब हाइब्रिड वाहनों को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

ईवी नीतियों में यू-टर्न से वैश्विक ऑटो उद्योग को 65 अरब डॉलर का झटका

अमेरिका में जलवायु नीतियों में बदलाव और ईवी इंसेंटिव में कटौती के बाद वैश्विक ऑटो उद्योग को बीते एक साल में कम से कम 65 अरब डॉलर का झटका लगा है। कई कंपनियों ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन योजनाएं घटाई या बदली हैं। स्टेलैंटिस ने 26 अरब डॉलर का प्रावधान करते हुए कुछ इलेक्ट्रिक मॉडल बंद कर पेट्रोल इंजन दोबारा शुरू करने का फैसला किया। फोर्ड मोटर कंपनी, फॉक्सवैगन और होंडा ने भी भारी घाटे की सूचना दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मांग घटने और नीतिगत अनिश्चितता के कारण कंपनियां अब हाइब्रिड और पेट्रोल वाहनों पर फिर से जोर दे रही हैं।

मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों पर 71,395 करोड़ रुपए का घाटा, देश में सबसे बड़ी वित्तीय बोझ बनीं

मध्य प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने मिलकर 71,395 करोड़ रुपए का भारी घाटा दर्ज किया है और वे देश की सबसे बड़ी वित्तीय ‘सिंकहोल’ के रूप में उभरी हैं। ईटी एनर्जीवर्ल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च एटीएंडसी (AT&C) नुकसान, एसीएस-एआरआर के बीच बड़ा अंतर, समय पर टैरिफ संशोधन न होना और सरकार पर बढ़ते बकाये को इस वित्तीय संकट की प्रमुख वजह बताया गया है।

AT&C का अर्थ है कि बिजली उत्पादन से लेकर बिल वसूली तक की प्रक्रिया में कितनी बिजली ‘गायब’ हो जाती है – यानी जिसके पैसे कंपनी को नहीं मिलते जबकि एसीएस-एआरआर का अंतर सीधे घाटे का संकेतक है यानी बिजली उत्पादन में खर्च और उससे मिले राजस्व का अंतर। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कुल डिस्कॉम घाटे का 11 प्रतिशत अकेले मध्य प्रदेश के हिस्से में है। राष्ट्रीय स्तर पर बिजली वितरण कंपनियों का कुल घाटा 6.47 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। वर्षों से सुधार आधारित सहायता और बेलआउट पैकेज के बावजूद कई राज्यों में वित्तीय दबाव की गहराई उजागर हुई है।

ऊर्जा स्रोतों में विविधीकरण की दिशा में कदम: अमेरिका से तेल खरीदना भारत के हित में: पीयूष गोयल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि ऊर्जा संसाधनों में विविधता (Diversity) लाने की दिशा में अमेरिका से कच्चा तेल खरीदना भारत के रणनीतिक हित में होगा। ईटी एनर्जीवर्ल्ड के अनुसार, गोयल ने स्पष्ट किया कि तेल खरीदने का फैसला पूरी तरह कंपनियों और वाणिज्यिक खरीदारों (तेल और गैस कंपनियों) के हाथ में है, न कि व्यापार वार्ताकारों के।

उन्होंने भारत की ऊर्जा रणनीति और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के दायरे के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित किया।

मध्य पूर्व तनाव के बीच कच्चे तेल के दाम 1% चढ़े, अमेरिकी भंडार वृद्धि से बढ़त सीमित

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिकी कच्चे तेल भंडार में साप्ताहिक आधार पर बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट ने कीमतों में तेजी को सीमित रखा, रॉयटर्स ने बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और वार्ता जारी रहने की संभावना है। पिछले सप्ताह ओमान में अमेरिकी और ईरानी राजनयिकों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत हुई थी, जबकि क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती ने तनाव बढ़ाया है। अगली दौर की वार्ता की तारीख और स्थान की घोषणा अभी नहीं की गई है।

कार्बन कॉपी
Privacy Overview

This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.